तीन साल में 40 परसेंट बढ़ी कम सुनने वाले मरीजों की संख्या इसमें 30 परसेंट यूथ शामिल 20-30 वर्ष की आयु में बढ़ी कम सुनाई देने की समस्या ईयरफोन कर रहा कान की नसों को डैमेज


वाराणसी (ब्यूरो)बालीउमर में लगा बहरेपन का रोग। जी हां, यह मैं नहीं हास्पिटल्स के डाक्टर्स बता रहे हैं। कोरोना के बाद से कम उम्र में ही कम सुनाई देने की समस्या यूथ में बढ़ गयी है। एक तो कान की नसें कमजोर हो गयी हैं उस पर से यूथ द्वारा लगातार कई घंटों तक ईयरफोन लगाने से कान की नसें डैमेज हो रही हैं। फिलहाल डाक्टर्स का कहना है कि कोरोना ने हार्ट और लंग्स में अटैक नहीं किया बल्कि कान को भी डैमेज किया है। हालात यह है कि हास्पिटलों में हर पांचवां आदमी कान से कम सुनाई देने की समस्या को लेकर पहुंच रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह डाक्टर ईयरफोन बता रहे हैं.

20-30 साल के यूथ

बीएचयू के ईएनटी डिपार्टमेंट के एसोसिएट प्रोफेसर डा। एसके अग्रवाल का कहना है कि कोरोना ने लंग्स और हार्ट पर अटैक किया। साथ ही कान के कई नसों को भी कमजोर कर दिया है। ऐसे में जब लोग अपने कान में लगातार ईयरफोन लगाकर सुनते हैं तो उनकी नसें डैमेज हो जा रही हंै। इसके चलते उनको कम सुनाई दे रहा है। यह समस्या कोरोना काल के बाद तेजी से यूथ में देखने को मिल रहा है.

हर पांचवां व्यक्ति शिकार

डा। एसके अग्रवाल का कहना है कि कोरोना काल के पहले ओपीडी में दो से तीन ही मरीज कान से कम सुनाई देने की समस्या लेकर आते थे, लेकिन इसके बाद इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़कर 20 से 25 हो गई है। यह तो सिर्फ बीएचयू के ओपीडी के आंकड़े हैं लेकिन शहर में कई प्राइवेट अस्पतालों में इस तरह के केस लेकर लोग पहुंच रहे हंै। उनकी संख्या 300 से अधिक बताई जा रही है.

दिमाग को कर रहा डैमेज

डाक्टर्स का कहना है कि लंबे समय तक ईयरफोन का इस्तेमाल करने से दिमाग पर प्रभाव पड़ता है। ईयरफोन या हेडफोन से निकलने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक वेव्स हमारी दिमाग को बुरी तरह से प्रभावित करती है। इसके अलावा तेज म्यूजिक की वजह से दिमाग की कोशिकाओं की ऊपरी लेयर नष्ट हो जाती है, जिससे कान और दिमाग का कनेक्शन कमजोर हो जाता है.

बहरेपन का शिकार

लंबे वक्त तक ईयरफोन के इस्तेमाल से ज्यादातर यूथ बहरेपन के भी शिकार हो रहे हंै। दरअसल देर तक ईयरफोन लगाए रखने से कानों की नसों पर दबाव पडऩे लगता है जिससे नसों में सूजन की समस्या बढ़ जाती है। वाइब्रेशन की वजह से हियरिंग सेल्स अपने संवेदनशील तक होने लगता है जिससे तेजी से बहरेपन का शिकार हो रहे हैं। डाक्टर के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति 2 घंटे से ज्यादा समय के लिए 90 डेसीबल से अधिक आवाज में गाना सुनते हैं तो वह बहरेपन का शिकार होने के अलावा कई और बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। दरअसल कानों की सुनने की क्षमता सिर्फ 90 डेसीबल होती है जो लगातार गाने सुनने से समय के साथ 40 से 50 डेसीबल तक कम हो जाती है, जिसकी वजह से व्यक्ति को दूर की आवाज सुनाई नहीं देती.

कान से सिटी बजने की समस्या

कोरोना काल के बाद शरीर की कई नसों पर असर पड़ा है। इनमें कान की नस भी शामिल है। इस बीमारी ने कान की नसों को भी अफेक्टेड किया है। इसके चलते टिनिटस की समस्या भी हो रही है। इसमें लगातार कानों के अंदर सीटी बजने या हवा चलने जैसी अवाजें सुनाई दे रही है। ये आवाज कानों के सबसे अंदरूनी हिस्से में मौजूद कॉक्लिया सेल्स के नष्ट होने की वजह से आती है।

ज्यादातर देर तक कान में ईयरफोन लगाने से कान की नसों के सेल फट जाते हैं। इससे बहरेपन की समस्या बढ़ जाती है.

डॉवीके शर्मा, ईएनटी, पं। दीनदयाल हॉस्पिटल

कान से कम सुनाई देने वाले मरीजों की संख्या बढ़ गई है। कोरोना के पहले जहां 10 से 15 मरीज आते थे वहीं अब 30 से 35 मरीज आ रहे हैं। निजी हास्पिटलों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ गई है.

डॉएसके अग्रवाल, बीएचयू ईएनटी विभागाध्यक्ष

Posted By: Inextlive