ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ऑफिस में पैनल डिस्कशन का किया गया आयोजन


वाराणसी (ब्यूरो)रोड सेफ्टी मसला ए जिदंगी अभियान के दौरान दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने सिटी के बिगड़े ट्रैफिक सिस्टम के हर हालात को दिखाया और बताया। यह भी बताया कि इस समस्या के पीछे असल जिम्मेदार कौन है और कहां हो रही चूक। कैसे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बना सकते हैं। पब्लिक के सुझाव लिये गए, जिसमें प्रॉब्लम आ सके। बनारस की सबसे बड़ी प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने ऑफिस में एक पैनल डिस्कशन आयोजित किया। इसमें ट्रैफिक विभाग की ओर से एसीपी ट्रैफिक विकास श्रीवास्तव के साथ शहर के व्यापारी, समाजसेवी, ऑटो संघ के प्रतिनिधि समेत कई एक्सपर्ट शामिल हुए। एसीपी ट्रैफिक ने समस्या पर चर्चा करने के साथ पब्लिक के सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान व्यापारी, समाजसेवी, ऑटो संघ के प्रतिनिधि समेत कई एक्सपर्ट ने अपने सुझाव रखे। डिस्कशन में निकलकर सामने आया कि बेहतर ट्रैफिक व्यवस्था के लिए सभी की सहभागिता और सहयोग जरूरी है। हर किसी को जिम्मेदारी निभानी होगी। तभी हालात बदलेंगे, जिसमें ट्रैफिक विभाग की भूमिका सबसे अहम है। डिस्कशन में एसीपी ट्रैफिक विकास श्रीवास्तव ने भरोसा दिलाया कि शहर के लिए समस्या बन चुके ई-रिक्शा को लेकर योजना बन रही है। बहुत जल्द ही इस समस्या से निजात मिलेगी। कहा कि ई-रिक्शा को मेन रोड से दूर किया जाएगा। ये सिर्फ अपने थाना सर्किल में ही चल सकेंगे। सड़कों पर सिर्फ फिटनेस और परमिट वाले ही ऑटो- ई रिक्शा चलेंगे।

पब्लिक ने शेयर किए प्रॉब्लम और दिए सुझाव

- शहर की सबसे बड़ी समस्या ई-रिक्शा है। इनकी वजह से ट्रैफिक सिस्टम बिगड़ गया है।

- शहर की सभी सड़कों पर वाहनों के लिए पार्किंग देने की जरूरत है।

- शहर के बाजारों में रविवार के बजाए अल्टरनेट डे पर साप्ताहिक बंदी होने से ट्रैफिक जाम पर लगाम लगेगा.

- दशाश्वमेध मार्केट से पटरी दुकानदारों को शिफ्ट करने से काफी हद तक समस्या खत्म हो सकती है।

- व्यापारियों के सहयोग से ट्रैफिक बिग्रेड की व्यवस्था को फिर से बहाल करने की जरूरत है.

- शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर हर महीने व्यापारियों के साथ बैठक करने से सुधार दिखेगा.

- ई-रिक्शा को कलर में बांटकर चलाने की जरूरत है। हर किसी रूट निर्धारित होना चाहिए.

- शहर के कमर्शियल बिल्डिंग के बेसमेंट को खाली कराकर पार्किंग के लिए इस्तेमाल करने से अतिक्रमण नहीं दिखेगा.

- ट्रैफिक पुलिस को पहले कमी को खोजने की जरूरत है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर जो भी योजनाएं बने तो उसमें व्यापारियों को जरूर शामिल करना चाहिए।

- शहर के सभी चौराहों पर ट्रैफिक सिंग्नल के साथ जेब्रा लाइन होनी चाहिए।

- गली में ई-रिक्शा को एंट्री नहीं मिलनी चाहिए।

पहले से टै्रफिक व्यवस्था सुधरी है। इसे और बेहतर करने के लिए ट्रैफिक पुलिस के साथ व्यापारी काम करने के लिए तैयार हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में साप्ताहिक बंदी अगल-अलग दिन होना चाहिए।

अजीत सिंह बग्गा

पहले व्यापार समिति की पहल पर ट्रैफिक बिग्रेड बनाये गए थे, जिससे यातायात व्यवस्था काफी बेहतर हुई थी। उसे फिर लागू करने की जरूरत है। हर एक या दो महीने पर पुलिस-व्यापारी के बीच बैठक भी होनी चाहिए।

प्रेम मिश्रा

यातायात जागरूकता को लेकर सिर्फ शहर में कार्यक्रम चलता है, जबकि जरूरत हाईवे और ग्रामीण इलाकों में है। हेलमेट पहनाने से जागरूकता नहीं आएगी। सख्ती से ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा।

मनोज मद्धेशिया

शहर में बेहिसाब दौड़ रहे ई-रिक्शा वालों के अंदर ट्रैफिक सेंस पैदा करने की जरूरत है। इनकी बदतमिजी बहुत ज्यादा बढ़ गई है। अनटे्रंड लड़कों के हाथ में इसकी स्टेयरिंग है।

राजेश सिंह

यातायात बेहतर होगा तभी बाजार में रौनक आएगी। व्यापारी भी अतिक्रमण के खिलाफ है। ट्रैफिक पुलिस का सहयोग करने के लिए भी तैयार हैं। सड़क किनारे व्हाइट लाइन को फिर से खींचने की जरूरत है.

प्रतीक गुप्ता

सोशल मीरिूया एक बड़ी ताकत बनकर सामने आई है। अगर इसका यूज सिटी के ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने के लिए किया जाए तो बहुत हद तक लड़ाई जीती जा सकती है.

सुष्मिता सेठ

ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए चालान केवल एक रास्ता नहीं है। जिस तरह से डिपार्टमेंट हर दिन सैकड़ों हजारों वाहनों का चालान कर रहा है, उससे लोगों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

आशुतोष वाष्र्णेय

अवेयरनेस प्रोग्राम के साथ-साथ रोड इंजीनियरिंग पर भी फोकस करना होगा। जिन जगहों पर फुटओवर ब्रिज या ओवरब्रिज की जरूरत है, वहां इसका निर्माण कराया जाए, ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आएगा.

अजय सिंह

मैदागिन से चौक तक कई थोक मार्केट है, जहां खरीदारी के लिए हर दिन बड़ी संख्या में भीड़ आती है। ऐसी स्थिति में कमर्शियल बिल्डिंग के बेसमेंट को खाली कराकर पार्किंग में तब्दील करने की जरूरत है.

सत्यनारायण सेठ

सड़कों पर जाम की स्थिति में लोग गलियों के सहारा लेते हैं, लेकिन ई-रिक्शा वालों की आवाजाही से वहां भी स्थिति काफी बदतर हो गई है। ट्रैफिक पुलिस को गलियों में ध्यान देने की जरूरत है.

अनिल केशरी

अतिक्रमण, जाम और दुकानदारों के बाहर माल हटवाने की जिम्मेदारी स्थानीय व्यापार मंडल को दे देनी चाहिए। इसमें ट्रैफिक पुलिस को मदद करनी चाहिए। इस पहल से पब्लिक से काफी हद तक जाम खत्म हो जाएगा.

संजय बनर्जी

ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए योजनाएं बहुत बनती हैं, लेकिन इसे लागू नहीं कराया जाता है। ट्रैफिक व्यवस्था में ऑटो यूनियन हर तरह से सहयोग के लिए तैयार है.

ईश्वर सिंह

जिंदा रहेंगे तभी सड़क पर चलेंंगे

पैंडल रिक्शा के ऑप्शन के तौर पर ई-रिक्शा को बढ़ावा दिया गया, लेकिन इनकी संख्या इतनी बढ़ गई कि अब इससे समस्या होने लगी है। इसे लेकर मंथन चल रहा है। 15 से 20 दिन में प्लान तैयार हो जाएगा। मेन रोड से ई-रिक्शा दूर हो जाएंगे। कलर के अनुसार ई-रिक्शा का संचालन कराया जाएगा। चालकों को कलर स्टीकर दिया जाएगा। थाना सर्किल के हिसाब से ई-रिक्शा पर कलर स्टीकर लगाए जाएंगे। अपने जोन से बाहर जाने पर ई-रिक्शा के खिलाफ कार्रवाई होगी। ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार सभी के सहयोग से होगा। ट्रैफिक पुलिस के अलावा अन्य विभागों का ट्रैफिक सिस्टम अहम रोल है, उन्हें भी अपना काम करना होगा। मैं पब्लिक के लिए हूं और ट्रैफिक सुधार के लिए काम करता रहूंगा। प्रतिदिन 60 से 80 ई-रिक्शा और ढाई हजार से अधिक वाहनों का चालान कर रहते हैं। लोगों से अपील है कि हेलमेट जरूर पहने। अगर माता-पिता को प्यार करते हैं तो हेलमेट जरूर लगाएं। अगर किसी भी चौराहे या तिराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिस ड्यूटी के प्रति लापरवाही करती है तो उसकी शिकायत जरूर करें, सजा के साथ तत्काल कार्रवाई होगी।

विकास श्रीवास्तव, एसीपी ट्रैफिक

सिटी के ट्रैफिक सिस्टम को सुधारने के लिए ग्राउंउ लेवल पर लगातार काम किया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस के साथ अन्य डिपार्टमेंट से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है। रोड पर व्हीकल चलाने वाले लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। ई-रिक्शा के चलते आ रही प्राब्लम को परमानेंट सॉल्व किया जाएगा। इसे लेकर तैयारी चल रही है, जिसका असर बहुत जल्द ही दिखेगा.

विक्रांत वीर, डीसीपी ट्रैफिक

Posted By: Inextlive