काशी की महिलाओं ने देश को आगे बढ़ाने के लिए खुद को किया समर्पित देश की संस्कृति में भी स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना गया


वाराणसी (ब्यूरो)नवरात्रि चल रहे हैं, तो नारी शक्ति की बात जरूर होनी चाहिए। देश की संस्कृति में भी स्त्री को शक्ति का स्वरूप माना गया है। कहा भी गया है, जहां नारी की पूजा होती है, वहां स्वर्ग होता है। ऐसे में आज हम शिवपुरी (वाराणसी का एक नाम) की उन नारियों की बात कर रहे हैं, जो एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस, पुलिस, पॉलिटिक्स, वकालत के क्षेत्र में काम कर वाराणसी को सशक्त बनाने का काम कर रही हैं या फिर समृद्ध सिस्टम के लिए सपोर्टिव हैं। दैनिक जागरण आईनेक्स्ट में आज हम आपको ऐसी ही नारी शक्ति के बारे में बताएंगे।

टैक्सेशन को कर रहीं सशक्त

मुश्किलें सभी के साथ होती हैं, पर जो उन मुश्किलों को हराकर आगे बढ़ता है। वह जीवन में सफलता जरूर पाता है। ऐसी ही कहानी है नोएडा की रहने वाली पीसीएस अधिकारी अर्पिता राय की। अर्पिता के पिता का 2018 में निधन हो गया था। उस समय उनका भाई इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था और उनकी मां नील राय हाउस वाइफ थीं। ऐसी स्थिति में अर्पिता ने हार नहीं मानी और परिवार की जिम्मेदारी को समझते हुए एक प्राइवेट जॉब करने लगी। पर शुरू से ही अर्पिता को सिविल सर्विस की तैयारी करनी थी। इसलिए जब वह रात में जॉब करके आती थीं, तब सिविल सर्विस की तैयारी के लिए पढ़ाई करती थीं। आज वह बनारस मेें बतौर असिस्टेंट कमिश्नर जीएसटी काम कर रही हैं।

अर्पिता की सीख

अर्पिता ने कहा, लड़की होने पर खुद को साबित थोड़ा ज्यादा करना पड़ता है। लेकिन आगे बढऩे के लिए इतना तो करना ही होगा। किसी भी परिस्थिति में हिम्मत मत हारें। किसी के कहने पर ना आएं। अपने सपनों के प्रति क्लियर रहें और शेड्यूल बना कर पढ़ाई करें।

गल्र्स को हमेशा मिलीं ममता

जौनपुर निवासी एडीसीपी ममता रानी चौधरी लंबे समय से वाराणसी में कार्यरत हैं। अगर हिम्मत, निडरता और देश के लिए समर्पित तीनों गुण किसी एक ही महिला में देखना हो तो वह हमें ममता रानी में देखने को मिलेगा। ममता रानी महिला क्राइम देखती हैं। दरअसल, लड़कियों और महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों को वह बखूबी समझती हैं और हर तरह से उनकी मदद करने को तैयार रहती हैं। अगर कोई महिला सुसाइड करने का प्रयास करती है तो उसे वह रोकती हैं और आगे बढऩे के लिए मोटिवेट करती हैं। उनके पिता फतेह बहादुर एडमिनिस्ट्रेशन में थे। इसलिए वह भी बढ़ा अफसर बनना चाहती थीं। अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की और उन्हें कामयाबी भी मिली।

ममता की सीख

ममता रानी ने कहा, अगर बेटियों को आगे बढऩा है तो सबसे पहले उन्हें बुरी आदतों और बुरे दोस्तों से दूरी बनानी होगी। अच्छे दोस्त बनाएं, जो आपको पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करें और पुलिस लाइन में देश सेवा करने के भाव से ही आना चाहिए।

समर्पण से मिला मुकाम

सीजीएसटी कमिश्नर कविता सिंह सोनभद्र की रहने वाली हैं। वाराणसी में 2020 से पदस्थ हैं। उन्होंने बचपन में अपने आस-पास ज्यादातर लड़कों को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हुए देखा। तब उन्हें लगा कि वह भी यह कर सकती हैं। उन्होंने खूब पढ़ाई की और माता-पिता के सहयोग से यह मुकाम हासिल की। उन्होंने बताया कि कभी कभी घर और ऑफिस के काम को मैनेज करने में प्रॉब्लम तो होती है। पर उनके परिवार का बहुत सपोर्ट है और उन्हें काम में लापरवाही नहीं पसंद है। इसलिए वह कहती हैं कि कोई भी काम करें तो उसमें खुद को समर्पित कर दें।

कविता की सीख

कविता कहती हैं कि आज के समय में लड़कियों का आगे बढऩा बहुत जरूरी है। समाज में खुद को स्थापित करने के लिए उन्हें समाज में अपनी पहचान तो बनानी ही होगी। जो भी करें, अपने माता पिता के मार्गदर्शन में रहते हुए ही करें।

वकालत से दे रहीं संबल

संगीता की जब शादी हुई, तब वह बस आठवीं क्लास तक ही पढ़ी थीं। उन्हें शुरू से ही पढ़ाई करने का शौक था। पर कम उम्र में शादी होने के कारण वह पढ़ तो नहीं पाई, लेकिन खुद के सपने को उन्होंने खत्म नहीं होने दिया और पति संतोष मिश्रा के सपोर्ट से उन्होंने 12वीं की पढ़ाई पूरी की। और उसके बाद वह वकालत करने लगीं। आज संगीता शहर की जानीमानी वकील तो हैं ही। साथ ही उन बच्चों को पढ़ा भी रही हैं, जो खुद की पढ़ाई करने के लिए फाइनेंशियल कमजोर हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी परेशानी होने पर वह अपने पति को बताती थीं और उनके पति उन्हें आगे बढ़ाने के लिए हर मुमकिन प्रयास करती थे।

संगीता की सीख

संगीता कहती हैं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। किसी भी उम्र में वह अपनी पढ़ाई को पूरा कर सकती हैं। इस क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए आपको थोड़ी ज्यादा मेहनत करनी होगी। वकील बनने के बाद लोगों की मदद करने के भाव से काम करें। इससे महिलाएं आगे बढ़ेंगी।

महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए चुनी राजनीति

जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्य चाहती थीं कि देश की महिलाएं अपने अधिकारों को समझें और ज्यादा से ज्यादा राजनीति में आएं। क्योंकि अगर महिलाएं राजनीति में आएंगी तो वह ज्यादा से ज्यादा महिलाओं की समस्या को समझ सकती हैं। इसके लिए वह जगह जगह जागरुकता कार्यक्रम भी करती हैं, जिससे महिलाएं इनसे जुड़े और देश को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे सकें। वह कहती है कि कई बार मैने देखा है कि पत्नी पार्षद होती है और उनकी जगह उनके पति कार्य रहे होते हैं। इसलिए ऐसी चीजों को रोकना होगा। और महिलाओं को घर के बाहर निकलना होगा तभी वह अपने और दूसरों के लिए कुछ कर सकती हैं.

पूनम की सीख

पूनम कहती हैं कि महिलाओं को अगर अपने अधिकारों को पाना है तो घर से बाहर निकल कर मेहनत करनी होगी। तब ही वह दूसरी महिलाओं के लिए भी कुछ कर पाएंगी। इसलिए ज्यादा ज्यादा से महिलाओं का राजनीति में आना जरूरी है।

लड़कियों की पढ़ाई में मदद

शिक्षा का दान देकर बच्चों का भविष्य संवार रही सीएचएस स्कूल की प्रिंसिपल स्वाति अग्रवाल बनारस की ही रहने वाली हैं। उन्होंने बचपन में ही शिक्षक बनने का सोचा था। माता-पिता भी पढ़ा लिखा कर शिक्षक ही बनाना चाहते थे। माता-पिता और खुद का सपना पूरा करने के लिए स्वाति ने मेहनत करके पढ़ाई की। आज वह प्रिंसिपल तो हैं ही साथ ही उन लड़कियों की पढ़ाई में मदद भी करती हैं जो खुद से पढ़ाई नहीं कर सकती हैं। उनका कहना है कि देश तब ही आगे बढ़ेगा, जब बेटियां भी देश में बढ़-चढ़कर अपना योगदान देंगी। उनके माता-पिता और शादी के बाद पति ने उन्हें आगे बढ़ाने में बहुत सपोर्ट किया है।

स्वाति की सीख

स्वाति ने कहा कि अगर बेटियों को आगे बढऩा है तो शिक्षा के महत्व को समझना होगा। माता-पिता को साथ लेकर चलें। उनसे मार्गदर्शन लें, उनके बताए मार्ग पर चलने से आपको सही रास्ता मिलेगा और आप करियर में जरूर सफल होंगी.

Posted By: Inextlive