ओपीडी में पेशेंट्स की कतार पुरुषों से ज्यादा महिलाएं चपेट मेें डॉक्टर दे रहे कपड़े से ढककर निकलने की सलाह किरणों की तीव्रता त्वचा को कर रही प्रभावित


वाराणसी (ब्यूरो)भीषण गर्मी के साथ चिलचिलाती धूप लोगों की त्वचा को भी प्रभावित कर रही है। आग रूपी धूप की वजह से लोग सनबर्न, चिकनपॉक्स और फंगल इंफेक्शन से ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। मंडलीय अस्पताल में स्किन समस्या से परेशान होकर पहुंचने वाले पेशेंट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें पुरुषों से ज्यादा महिलाएं है। डॉक्टर्स का कहना है कि इन दिनों सुबह 9 बजे तक हाई और शाम 4 बजे तक एक्स्ट्रा डिम लेवल पर सूरज की किरणें पहुंच रही हैं। इससे लोगों में स्किन प्रॉब्लम बढ़ गई है। चिंता की बात यह है कि इस बार इस मौसम में भी चिकनपॉक्स, सनबर्न, हीट रैश के केसेस तेजी से फैल रही है। मौसम में बदलाव की वजह से कई तरह के वायरस सक्रिय हो गए हैं, जिन्होंने सूरज की किरणों की तरह बॉडी पर अपना असर शरीर पर दिखाना शुरू कर दिया दिया है.

150 से ज्यादा मरीज पहुंच रहे डेली

मंडलीय अस्पताल में चर्म रोग विभाग के सीनियर स्किन स्पेशलिस्ट डॉ। मुकुंद श्रीवास्तव की मानें तो इस बार तापमान की तीव्रता तेजी से बढ़ रही है। 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के आसपास तापमान पहुंच चुका है। इस वजह से सूरज की पराबैंगनी किरणों से निकलने वाली तीव्रता शरीर के साथ ही त्वचा पर तेजी से असर डाल रही है। यही वजह है कि इन दिनों ओपीडी में डेली 150 से 175 के करीब मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इसमें भी 50 प्रतिशत से ज्यादा महिलाएं है। इन मरीजों में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल रही हैं। सभी बीमारियां वायरस से ही है। इस मौसम में चिकनपॉक्स नहीं होती थी, लेकिन इस बार डेली एक दो केस इसके भी आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि युवाओं में ये लक्षण देखने को मिल रहा है, जबकि यह बीमारी पहले बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती थी.

इस तरह की आती है समस्या

सनबर्न में मरीजों को लाल रंग के चकत्ते के साथ बाजू, हाथ, गले में समस्या भी हो रही है। वहीं, हीट रैशज की समस्या वाले मरीज भी अधिक आ रहे हैं। इसके अलावा ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में करीब 40 परसेंट मामले फंगल इंफेक्शन के भी है। चिकित्सकों का कहना हैं कि ऐसा तब होता है जब पसीना शरीर से बाहर नहीं निकल पाता और त्वचा में जमा रहता है। इसके कारण दाने हो जाते है और खुजली की समस्या होने लगती है। वहीं, दाने जब फटने लगते है, तो पसीना बाहर निकलने लगता है और त्वचा लाल होने लगती है बता दें की चर्म रोग की दिक्कत आने वाले एक माह तक लोगों को और प्रभावित करेगा.

ये 5 सलाह दे रहे हैं डॉक्टर

1-धूप में न निकलें.

2-दूसरा धूप में निकलें तो चेहरे, सिर को धूप से बचाएं.

3-अधिक मात्रा में पानी पीते रहें, कॉटन व आरामदायक कपड़े पहनें.

4-धूप में निकलने से पहले सनस्क्रीम का इस्तेमाल करें.

5-फलों का जूस और शिकंजी या पानी पीते रहें.

क्या है सनबर्न और कारण क्या हैं

-सूरज यूवीबी और यूवीए दोनों किरणों को छोड़ता है। यूवीबी किरणें छोटी होती हैं और त्वचा कैंसर के विकास के लिए जिम्मेदार होती हैं। यूवीए किरणें लंबी होती हैं और त्वचा में गहराई तक प्रवेश करती हैं.

-हमारी त्वचा में मेलेनिन होता है जिसे शरीर का प्राकृतिक सनस्क्रीन माना जा सकता है। त्वचा यूवी प्रकाश से सूरज की क्षति को महसूस करती है और शरीर उन्हें और नुकसान से बचाने के प्रयास में आसपास की कोशिकाओं में मेलेनिन भेजता है.

-गहरे रंग की त्वचा वाले लोगों के पास अधिक मेलेनिन होता है, जबकि पीली त्वचा वाले लोग जल्दी जलते हैं.

सनबर्न के लक्षण

-कोमल त्वचा छूने पर गर्म या गर्म महसूस होती है.

-त्वचा की रंगत में परिवर्तन, जैसे गुलाबीपन या लाली.

-तरल पदार्थ से भरे छोटे-छोटे छाले, जो टूट सकते हैं.

-सनबर्न गंभीर होने पर सिरदर्द, बुखार, मतली और थकान महसूस होती हैं.

इस मौसम में सूर्य की रोशनी तेज होती है। जो सीधा शरीर के साथ त्वचा को अधिक प्रभावित करती है। धूप का असर ऐसा है कि लोग सनबर्न के साथ हीट रैश की समस्या से जूझ रहे हैं। स्किन से रिलेटेड डेली 150 से ज्यादा केस आ रहे हैं, जिसमें सबसे ज्यादा सन बर्न, फंगल इंफेक्शन और चिकनपॉक्स के केस है.

डॉमुकुंद श्रीवास्तव, सीनियर स्किन स्पेशलिस्ट, मंडलीय अस्पताल

Posted By: Inextlive