संस्कृत यूनिवर्सिटी में अब योग की क्लास

Updated Date: Sat, 10 Oct 2020 07:48 AM (IST)

-विद्यापरिषद के बाद कार्यपरिषद ने भी लगायी अपनी मुहर

-अगले सेशन से योग सहित चार वर्षीय ग्रेजुएशन में होगा एडमिशन

प्राच्य विद्या के केंद्र संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी में अब योग की पढ़ाई होगी। यहां स्टूडेंट्स ज्योतिष, वेद, आधुनिक विद्या के कोर्सेस के साथ अब योग भी पढ़ेंगे। यूनिवर्सिटी में पहले योग के लिए डिप्लोमा कोर्स स्टार्ट होगा। इसके बाद इसकी डिग्री कोर्स पर विचार किया जाएगा। इस कोर्स में एडमिशन सेशन 2021-22 में होगा। इस पर विद्यापरिषद के बाद कार्यपरिषद ने भी अपनी मुहर लगा दी है। इस कोर्स में सीट और एडमिशन प्रॉसेस से जुड़ी जानकारी जल्द ही यूनिवर्सिटी की ओर से जारी की जाएगी।

चार वर्षीय होगा ग्रेजुएशन भी

यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन नई शिक्षा नीति के अनुरूप कोर्सेस बनाने में जुटा हुआ है। इसके तहत सभी हेड को चार वर्षीय शास्त्री (स्नातक) का पाठ्यक्रम बनाने का निर्देश भी दिया जा चुका है, ताकि अगले सेशन 2021-22 से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम भी शुरू किया जा सके। वीसी प्रो। राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित योग साधना केंद्र के संवाद कक्ष में एक दिन पहले हुई विद्यापरिषद व शुक्रवार को कार्यपरिषद की मीटिंग में नई शिक्षा नीति को लागू करने की हरी झंडी मिल गई। नई शिक्षा नीति पांच साल में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसे देखते हुए यूनिवर्सिटी ने पहले चरण में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने का डिसीजन लिया है। हालांकि तीन वर्षीय शास्त्री के कोर्स को बंद नहीं किया जाएगा। वहीं एक वर्षीय योगा डिप्लोमा कोर्स भी शुरू करने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।

जॉब ओरिएंटेड कोर्स की तैयारी

संपूर्णानंद संस्कृत यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन अन्य संस्थाओं की तरह जॉब ओरिएंटेड कोर्सेस संचालित करने की तैयारी में जुटा हुआ है। इसके तहत अगले सेशन से चार वर्षीय शास्त्री (स्नातक) का कोर्स शुरू करने की योजना है। वहीं योग में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स स्टार्ट करने की योजना है। इस क्रम में हेड को कोर्स बनाने का भी निर्देश दिया जा चुका है। वीसी प्रो। राजाराम शुक्ल की अध्यक्षता में आयोजित मीटिंग में संस्तुति को हरी झंडी मिल गई। इसके अलावा 27 अप्रैल को वित्त समिति की संस्तुतियों को भी कार्यपरिषद ने स्वीकृति दे दी। वहीं फर्जीगिरी कर शास्त्री की डिग्री हासिल करने वाले रामप्रसाद शुक्ल की उपाधि कार्यपरिषद ने निरस्त करने की मंजूरी दे दी। मीटिंग में रजिस्ट्रार राजबहादुर, फाइनेंस ऑफिसर अमित कुमार श्रीवास्तव, प्रो। सुधाकर, प्रो। जितेंद्र कुमार, प्रो। हरिप्रसाद अधिकारी, प्रो। रमेश प्रसाद, डॉ। विद्या चंद्रा, डॉ। विजय पांडेय सहित अन्य उपस्थित रहे।

Posted By: Inextlive
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