उत्तराखंड : SOP का पालन करने के बाद भी कोई छात्र या टीचर कोरोना पॉजिटिव होता है स्कूल नहीं होंगे दोषी

Updated Date: Fri, 30 Oct 2020 05:03 PM (IST)

उत्तराखंड में कोविड-19 लॉकडाउन के बाद फिर से स्कूल खुलने के बारे में राज्य सरकार ने शुक्रवार को कहा कि स्कूलों के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं। इनका पालन करने के बाद भी अगर कोई शिक्षक या छात्र कोरोना पॉजिटिव हो जाता है तो स्कूल को इसके लिए दोष नहीं दिया जाएगा।


देहरादून (एएनआई)। उत्तराखंड में कोविड-19 लॉकडाउन के बाद फिर से स्कूलों के खुलने के बारे में शुक्रवार को राज्य सरकार ने कई संशयों को दूर किया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार शिक्षा विभाग ने 2 नवंबर से कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए फिर से खोलने के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के तहत तैयारी शुरू कर दी है। हालांकि कोरोना वायरस संकट के बीच निजी स्कूलों के साथ-साथ सरकारी स्कूल भी डरे हुए हैं कि यदि कोई छात्र कोविड -19 के लिए सकारात्मक परीक्षण करता है, तो संबंधित प्रबंधन और प्राचार्यों के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है।स्कूलों के लिए मानक निर्धारित किए गए
एसओपी के बारे में भ्रम और भय के मद्देनजर, राज्य के शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि स्कूलों के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं, और इनका पालन करने के बाद भी अगर कोई शिक्षक या छात्र कोरोना पॉजिटिव हो जाता है, तो स्कूल को इसके लिए दोष नहीं दिया जाएगा। सभी स्कूलों को एसओपी का पालन करना होगा। महामारी रोग अधिनियम केवल तभी लागू होगा जब कोई व्यक्ति सरकार द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता है। ऑनलाइन शिक्षा जारी रखी जाएगी


इसके साथ ही यह भी कहा कि सभी सावधानियों के बाद भी यदि संक्रमण फैलता है, तो सरकार उपचार में सहयोग करेगी। शिक्षा सचिव ने कहा कि छात्रों को स्कूल आने से पहले माता-पिता से लिखित अनुमति लेनी होगी, और अगर माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं, तो उनकी ऑनलाइन शिक्षा जारी रखी जाएगी।

Posted By: Shweta Mishra
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