यात्रा सीजन शुरू होने के साथ ही उत्तराखंड में बारिश का दौर भी शुरू हो चुका है। पिछले एक हफ्ते के दौरान राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की तो कहीं भारी बारिश दर्ज की गई है। आने वाले दिनों में बारिश का सिलसिला बढऩे के आसार हैं। पिछले वर्ष मई के महीने में राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बादल फटने की 7 घटनाएं हुई थी। कोविड के कारण पिछले वर्ष यात्रा बंद थी लेकिन इस वर्ष यात्रा पूरे जोर पर है और चारधाम मार्ग पूरी तरह से असुरक्षित हैं। ऐसे में यात्रा रूट पर डिजास्टर मैनेजमेंट शुरू कर दिया गया है।

देहरादून (ब्यूरो)। थर्सडे को ऋषिकेश में नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सदस्य की अध्यक्षता में हुई बैठक से साफ हो गया है कि सरकार चारधाम मार्ग को कितना भी सुरक्षित होने का दावा करे, लेकिन उसे अच्छी तरह मालूम है कि बारिश होते ही चारधाम मार्गों पर स्थिति बेहद खराब होने वाली है और इससे रोड बंद होने के अलावा एक्सीडेंट होने की भी पूरी संभावना है।

मौसम की गतिविधियों पर नजर
ऋषिकेश के नगर पालिका हॉल में हुई बैठक में एनडीएमए के सदस्य राजेन्द्र सिंह ने मौसम संबंधी गतिविधियों पर खास ध्यान रखने को कहा। उनका कहना था कि मानसून को देखत हुए आपातकालीन स्थिति में डिजास्टर मैनेजमेंट टीम को हर समय अलर्ट रखा जाए। मानसून और मौसम संबंधी जानकारी से हर समय अपडेट रहें और इस तरह की जानकारी विभिन्न माध्यमों से लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि भीड़ बढऩे की स्थिति पर खास नजर रखें और ऐसी स्थिति में स्थानीय संसाधनों का किस प्रकार उपयोग किया जाना है इसकी योजना बनाएं। मीटिंग में डिजास्टर मैनेजमेंट और संबंधित जिलों के अधिकारियों को यात्रा रूटों पर 8-9 बड़ेे और 6-7 छोटे प्वांइट चिन्हित करने के लिए कहा गया। ये भी आदेश दिये गये कि इन प्वॉइंट्स पर सेना, पैरा मिलिट्री फोर्स और एसडीआरएफ के जवानों को तैनात किया जाए, ताकि किसी भी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

पूरे रूट पर पत्थर गिरने का खतरा
चारधाम रोड प्रोजेक्ट के तहत पिछले कुछ सालों में सभी सड़कों को चौड़ा किया गया है। इससे पहाड़ों को काटा गया है। पहले जहां सड़क के किनारे पहाड़ी ढलान होते थे, नई स्थिति में अब सड़क के ठीक ऊपर पहाड़ी है। ज्यादातर जगहों पर पहाड़ी के ऊपर बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा है, जो बारिश होते ही सीधे रोड पर आ सकता है और दुर्घटनाएं हो सकती हैं। यही वजह है कि यात्रा रूटों पर हर सौ-दो सौ मीटर पर हाल के दिनों में सूचना बोर्ड लगाये गये हैं। हजारों की संख्या में लगाये गये इन बोर्ड पर पत्थर गिरने का खतरा बताते हुए देखकर चलने की सलाह दी गई है। हालांकि पहाड़ी सड़कों पर ऐसे बोर्ड लगाया जाना आम बात है, लेकिन पहले पत्थर गिरने का भय कुछ खास जगहों पर होता था, अब हर जगह पत्थर गिरने का भय है।

रोड बंद होने का सिलसिला शुरू
चारधाम यात्रा मार्गों का सड़कें बंद होने का सिलसिला शुरू हो चुका है। केदारनाथ से बदरीनाथ जाने वाले कुंड-चोपता-गोपेश्वर रोड का करीब 10 मीटर हिस्सा थर्सडे को पूरी तरह ढह गया था, इसे ठीक होने और इस मार्ग पर यात्रा शुरू होने में अभी लंबा वक्त लगने की संभावना है। तब तक यात्रियों को रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग होकर जाना पड़ेगा। जोशीमठ से आगे बल्दिया के पास भी बार-बार रोड जाम हो रही है। बिरही और जोशीमठ के बीच पहाड़ काटे जा रहे हैं और बीच-बीच में ट्रैफिक रोका जा रहा है।
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Posted By: Inextlive