राजधानी दून में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए कागजों में मेट्रो ट्रेन चलाने के लिए कई परियोजनाएं चली लेकिन धरातल पर एक भी नहीं उतर पाई। अब उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन यूके एमआरसी दून में पॉड टैक्सी चलाने की योजना बना रहा है। इसके लिए सर्वे भी पूरा हो चुका है।

- दून में सपना बनकर रह गई मेट्रो, 6 साल में कागजों से बाहर नहीं निकल सका प्रोजेक्ट
- अब यूकेएमआरसी पॉड टैक्सी चलाने की कर रहा तैयारी, पहले फेज को प्रेमनगर-रेलवे स्टेशन रूट का सर्वे पूरा

देहरादून (ब्यूरो): प्रोजेक्ट स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया है। इससे पूहले दून मेें मोनाल, रबड़ टायरा और जियो समेत न जाने कौन-कौन से टे्रन चलाने के लिए सर्वे और डीपीआर बनाई गई। अफसर और नेताओं ने न जाने कितने देशों की यात्राएं कर ली, लेकिन नतीजा सिफर। मेट्रो कहां गई किसी को नहीं पता। सर्वे और डीपीआर के नाम पर जनता की मोटी कमाई पानी की तरह बहाया जा रहा है। पिछले छह साल में मेट्रो के नाम पर सर्वे और डीपीआर बनाने का खेल खेला जा रहा है। दूनाइट्स पूछ रहे हैं कि आखिर कब तक सर्वे-सर्वे का खेल चलता रहेगा। फिलहाल दून में मेट्रो सपना बनकर रह गई है।

6 साल से दिखाए जा रहे सपने
राजधानी दून में मेट्रो ट्रेन चलाने के सपने पिछले 6 साल से दिखाए जा रहे हैं। 2017 में दिखाए गए मेट्रो ट्रेन का सपना तमाम घोषणाओं और दावों के बावजूद साकार नहीं हो पाया। कागजों में एक के बाद एक प्रोजेक्ट के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं। मंत्री-अधिकारियों ने मेट्रो ट्रेन के नाम पर लंदन और जर्मनी समेत कई देशों की यात्रा कर करोड़ों रुपये खर्च कर डाले। दून में मेट्रो कॉरपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारियों की सैलरी आदि पर भी सालाना 5-6 करोड़ खर्च हो रहे हैं। हैरत की बात यह है कि साल दर साल बीतते जा रहे हैं और मेट्रो के नाम पर एक ईंट तक नहीं जोड़ी जा सकी।

ऐसे बदलते रहे प्रोजेक्ट
1. मेट्रो ट्रेन
2. एलआरटी ट्रेन
3. केबल मेट्रो
4. रबर टायर मेट्रो
5 अब नियो मेट्रो


प्रेमनगर-रेलवे स्टेशन चलेगी पॉड टैक्सी
मेट्रो ट्रेन बनाने में अब तक फेल साबित हुई यूके एमआरसी अब पॉड टैक्सी चलाने की योजना बना रहा है। यूकेएमआरसी के अधिकारियों की मानें तो जिन सघन इलाकों में नियो मेट्रो नहीं चल सकती है वहां पर्सनल रैपिड ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट के तहत पॉड टैक्सी चलाने का निर्णय शासन लिया गया है। पहले चरण में प्रेमनगर के पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक 6 किमी। रूट पर इसका संचालन करने के लिए फिजिबिलिटी सर्वे पूरा होने के बाद प्रोजेक्ट को स्वीकृति के लिए शासन को भेज दिया गया है।

पहले रोप-वे की थी योजना
मेट्रो कारपोरेशन के अधिकारियों ने बताया कि पॉड टैक्सी का संचालन फायदे का सौदा है। इससे होने वाली कमाई से खर्च आसानी से निकल जाएगा। इससे टै्रफिक दबाव काफी कम हो जाएगा। प्रेमनगर से रेलवे स्टेशन तक इससे पहले रोप-वे चलाने की योजना थी, लेकिन अब शासन ने पॉड टैक्सी चलाने के आदेश दिए हैं। सर्वे रिपोर्ट को स्वीकृति मिलते ही जल्द ही डीपीआर बनाने का काम शुरू किया जाएगा।

पॉड टैक्सी पर एक नजर
पॉड टैक्सी पूरी तरह स्वचालित होती है। इसे चलाने को ड्राइवर की जरूरत नहीं होती है। यह कार के आकार की होती है और यह सड़क पर नहीं, बल्कि कॉलम पर बने स्ट्रक्चर पर स्टील के ट्रैक पर चलती है। इसकी कैपेसिटी 6-7 यात्रियों को ले जाने की है।

ऐसे दिखाए गए मेट्रो के सब्जबाग
-वर्ष 2017 में सबसे पहले दून में मेट्रो ट्रेन का सपना देखा गया।
-इसके बाद मेट्रोमैन श्रीधरन को मार्गदर्शन के लिए उत्तराखंड को सलाहकार बनाने का प्रस्ताव आया
-मेट्रो के बाद केबल कार यानि रोपवे का प्रोजेक्ट आया
-2018 में शहरी विकास मंत्री की अध्यक्षता में लंदन, जर्मनी का दौरान किया गया।
-हरिद्वार में पौंड टैक्सी पर भी विचार किया गया।
-बात नहीं तो नियो मेट्रो का प्रोजेक्ट तैयार किया। इसके लिए ऋषिकेश-हरिद्वार को मेट्रोपोलिटिन एरिया किया घोषित।
-यूकेएमआरसी के एमडी ने सितंबर में इस्तीफा दिया, लेकिन सरकार ने इस्तीफा नामंजूर किया।

दूनाइट्स की राय
कागजों में एक के बाद एक प्रोजेक्ट के सब्जबाग दिखाए जा रहे हैं। मंत्री-अधिकारियों ने मेट्रो ट्रेन के नाम पर लंदन और जर्मनी समेत कई देशों की यात्रा कर करोड़ों रुपये खर्च कर डाले, लेकिन स्थिति ज्यों की त्यों बनी है।
यशवीर आर्य, सोशल एक्टिविस्ट

लगातार बढ़ रहे ट्रैफिक से दूनवासी परेशान है। सरकार सर्वे पर सर्वे कर रही है। मेट्रो के नाम पर करोड़ा रुपये खर्च किए गए, लेकिन एक ईंट तक नहीं जोड़ी गई। राज्य को इस मामले में यूपी से सीख लेनी चाहिए, जहां कई शहरों में मेट्रो चलने वाली है।
आरएस रौतेला, रिटायर्ड इंजीनियर

दून में मेट्रो ट्रेन चलाने के सपने पिछले 6 साल से दिखाए जा रहे हैं। 2017 में दिखाए गए मेट्रो ट्रेन का सपना तमाम घोषणाओं और दावों के बावजूद साकार नहीं हो पाया। इस पर सरकार को अब सोचना बंद कर देना चाहिए।
संजय जुयाल, डायरेक्टर, देवभूमि किसान विकास निधि लिमिटेड

दून में मेट्रो कारपोरेशन के अधिकारी-कर्मचारियों की सैलरी आदि पर भी सालाना 5-6 करोड़ खर्च हो रहे हैं। 6 साल हो गए और मेट्रो का कहीं कोई अता-पता नहीं है। क्या कुछ लोगों कोरोजगार देकर मेट्रो का सपना पूरा हो गया है।
दीपक गोयल, रिटायर्ड इंजीनियर

शहर में ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए नई तकनीकियों पर काम किया जा रहा है। पॉड टैक्सी वल्र्ड की सबसे आधुनिक तकनीक है। दून में पहला चरण पंडितवाड़ी से रेलवे स्टेशन तक है। प्रयोग सफल रहा, तो अन्य हिस्सों में भी नेटवर्क बढ़ाया जाएगा।
जितेंद्र त्यागी, एमडी, यूकेएमआरसी

Posted By: Inextlive