कबाड़ में फेंक दिया करोड़ों का प्लांट

Updated Date: Thu, 04 Mar 2021 07:38 AM (IST)

-करीब 15 करोड़ का ओडब्ल्यूसी प्लांट बंद किया मंडी बोर्ड ने

-तंगहाली से जूझते बोर्ड ने इस प्लांट की मशीनें बेचने तक ही जरूरत नहीं समझी

-कबाड़े के रूप में एक खाली जगह पर फेंकी गई हैं मशीनें

देहरादून

कृषि उत्पादन मंडी बोर्ड बेशक फाइनेंशियल क्राइसिस से गुजर रहा है, लेकिन उसने अपना करीब 15 करोड़ रुपये का ऑर्गेनिक वेस्ट कन्वर्टर प्लांट उखाड़ कर फेंक दिया है। निरंजनपुर मंडी में कुछ वर्ष पहले लगाये गये ओडब्ल्यूसी प्लांट में मंडी से निकलने वाले ऑर्गेनिक वेस्ट से खाद बनाई जाती थी और इस खाद को बेचकर प्लांट चलाने की खर्च निकला जाता था। जहां ये प्लांट लगा था, वहां अब गोदाम बना दिया गया है और प्लांट की महंगी मशीनें उखाड़कर एक खाली प्लॉट में फेंक दी गई हैं।

वेस्ट से बनती थी खाद

करीब 8 साल पहले केन्द्र सरकार की ओर से देहरादून की मंडी में ओडब्यूसी प्लांट लगाया गया था। प्लांट कुछ साल तक अच्छी तरह चला, लेकिन हाल के दिनों में इसे बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही प्लांट की सभी मशीनें उखाड़कर एक खाली प्लॉट में फेंक दी गई हैं। मंडी समिति के पूर्व सचिव रविन्द्र आनन्द बताते हैं कि उनके कार्यकाल में यह मशीन सफलतापूर्वक चलाई गई। इससे बनने वाली खाद नर्सरी वालों आसपास के किसानों के साथ ही घरों में छोटी-छोटी जगहों पर बागवानी करने वाले ले जाते थे।

खप जाता था मंडी का वेस्ट

बताया जाता है कि इस ओडब्ल्यूसी प्लांट में मंडी से हर रोज निकलने वाला कई टन ऑर्गेनिक कचरा खत जाता था। मशीन सबसे पहले कचरे में से पॉलीथिन आदि अलग करती थी, उसके बाद ऑर्गेनिक कचरा, जिनमें सड़ी हुई सब्जियां ज्यादा होती थी, उन्हें दो-तीन स्टेप में प्रोसेस करके खाद बनाई जाती थी। पूर्व सचिव रविन्द्र आनन्द के अनुसार यह खाद 5 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेची जाती थी। इससे एक तरफ खाद बेचकर कुछ आमदनी होती थी और दूसरी तरफ मंडी से कचरा उठाने का खर्च भी कम हो जाता था।

घरों का कचरा उठाने की थी योजना

पूर्व सचिव रविन्द्र आनन्द के अनुसार उनके कार्यकाल में इस प्लांट से पूरे शहर के घरों का कचरा प्रोसेस करने की भी योजना था। उनका कहना है कि जब डॉ। हरक सिंह निगम कमिश्नर थे, उस समय उनके साथ मंडी समिति एक समझौता करने वाली थी, जिसमें शहरभर में घरों के किचन से निकलने वाले कचरे को प्रोसेस किया जाना था। लेकिन, डॉ। हरक सिंह का ट्रांसफर होने के कारण इस पर बात आगे नहीं बढ़ी।

अब सिर्फ कबाड़ का ढेर

करीब 15 करोड़ रुपये का ओडब्यूसी प्लांट अब कबाड़ का ढेर बन चुका है। इस बारे में पूछे जाने पर मंडी समिति के अध्यक्ष राजेश शर्मा कहते हैं कि मंडी समिति मशीन का खर्च नहीं उठा पा रही थी। इस पर काम करने वाले कर्मचारियों को सैलरी तक नहीं दे पा रहे थे। इसके अलावा प्लांट से बदबू आती थी और आसपास के लोग इसका विरोध कर रहे थे।

ऑक्शन तक नहीं की

खास बात यह है कि मंडी समिति ने इस महंगे प्लांट की मशीनों का ऑक्शन करने या प्लांट को कहीं अन्यत्र शिफ्ट करने की भी जरूरत नहीं समझी, बल्कि मशीनों को उखाड़कर फेंक दिया गया। अब इस स्क्रैप के भाव बेचने पर विचार किया जा रहा है। इस प्लांट में काम करने वाले कर्मचारी कहते हैं कि मशीन पूरी तरह से ठीक थी, लेकिन अचानक कहा गया कि रुद्रपुर मुख्यालय से प्लांट बंद करने का आदेश आया है।

ओडब्ल्यूसी प्लांट चलाना संभव नहीं हो पा रहा था। सैलरी भी नहीं निकल रही थी। इसके अलावा आसपास की पॉश कॉलोनियों के लोग प्लांट से उठने वाली बदबू के कारण इसका विरोध कर रहे थे। मुख्यालय के आदेश पर प्लांट बंद कर दिया गया।

राजेश शर्मा, अध्यक्ष, कृषि उत्पादन मंडी समिति

Posted By: Inextlive
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