सब कुछ ठीकठाक रहा तो इस बार गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर उत्तराखंड की झांकी के तौर पर 'प्र्रगति के प्र्रगति के पथ पर उत्तराखंड ' नजर आएगी। अब दिसंबर पहले सप्ताह में होने वाली तीसरे दौर की बैठक पर उत्तराखंड की प्रस्तावित झांकी पर मुहर लगनी बाकी है। इधर शुरुआत में उत्तराखंड से पांच झांकियों के प्रस्ताव भेजे गए थे। डिफेंस मिनिस्ट्री की बैठक में चार प्रस्तावों को खारिज माना जा रहा है। ऐसे में अब 'प्र्रगति के प्र्रगति के पथ पर उत्तराखंड झांकी पर नजर टिकी है।


देहरादून (ब्यूरो)। 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर हर बार सभी राज्यों से झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। वर्ष 2000 में उत्तराखंड का गठन हुआ। लेकिन, वर्ष 2003 से लेकर अब तक 12 बार उत्तराखंड की झांकियां राजपथ पर प्रस्तुत करने में सफलता मिल चुकी है। इस बार भी डिफेंस मिनिस्ट्री से मांगे गए आवेदन की फेहरिस्त में सूचना विभाग की ओर से पांच आवेदन भेजे गए। सूचना विभाग के डीडी केएस चौहान के अनुसार वर्ष 2022 में प्रस्तुत होने वाली झांकियां के लिए आजादी महोत्सव को देखते हुए सालम क्रांति, कुली बेगार प्रथा, वीर शहीद दुर्गामल, शहीद केसरी चंद और प्रगति के पथ पर उत्तराखंड प्रस्ताव भेजे गए। दो दौर की बैठक के बाद आजादी से संबंधित प्रस्ताव खारिज कर दिए गए हैं। जबकि, उत्तराखंड प्रगति के पथ पर प्रस्ताव पर तीसरी बैठक में निर्णय होना बाकी है।

झांकियों के प्रस्ताव हुए शॉर्टलिस्ट
तमाम राज्यों से आने वाले झांकियों के तहत इस बार 32 प्रस्ताव आए थे। जिनमें से अब 25 झांकियों के प्रस्ताव रह गए हैं। बताया गया है 15 दिसंबर मिड में होने वाली बैठक उत्तराखंड की झांकी का फाइनल चयन होगा या नहीं, मुहर लगेगी।

ःःवर्षवार राजपथ उत्तराखंड की झांकियांःःः
2003--फूलदेई
2005--नंदा राजजात
2006--वैली ऑफ फ्लावर
2007--कॉर्बेट नेशनल पार्क
2009--एडवेंचर टूरिज्म
2010--हरिद्वार कुंभ
2014--उत्तराखंड की जड़ी-बूटी
2015--केदारनाथ
2016--रम्माण
2018--रूरल टूरिज्म
2019--कौसानी स्थित गांधी अनाशक्ति आश्रम
2020 ---केदारखंड

अबकी बार ये भेजे गए थे प्रस्ताव
-सालम क्रांति।
-कुली बेगार प्रथा।
-वीर शहीद दुर्गामल।
-शहीद केसरी चंद।

Posted By: Inextlive