वट सावित्री व्रत शनि जयंती से विशेष संयोग प्राप्त होगी सूर्य की विशेष कृपा

2019-06-03T10:55:17Z

इस वर्ष ज्येष्ठ मास के अमावस्या और वट सावित्री व्रत वर्ग दाही शनि जयंती सोमवती अमावस्या सुकर्म आयोग होने के कारण विशेष संयोग उत्पन्न हो रहा है। प्रातः काल 728 से लेकर 930 तक राहुकाल रहेगा।

इस कालखंड पर पूजन नव विवाहित महिलाओं को पूजन से बचना चाहिए उक्त जानकारी कानपुर के पंडित दीपक पांडे ने दीपक राही में पूजन करने से पति के स्वास्थ्य सहित यदि घर में कलह हो रही हो तो उस में मधुरता आती है। सोमवती अमावस्या में वट सावित्री होने के कारण सोमवार का दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण है इससे जीवन साथी पर मधुरता आएगी। यदि महिलाएं वटवृक्ष के तीन चक्र लगाएं फिर भी लाभ मिलता है और 24 शक्कर लगाएं तो और भी लाभ मिलता है कुल मिलाकर के इस वर्ष की वट सावित्री व्रत राही के पूजन से सूर्य की विशेष कृपा प्राप्त होगी और जीवनसाथी से कटता दूर होगी।
करते समय किन बातों का रखें ध्यान

रक्षा सूत्र पवित्र प्रेम धर्म के लिए पवित्र धागा बांधा जाता है 12 फेरे लगाने से संकट हरते हैं। बरगद आ इसे 12 की तादात में चढ़ाने और खाने से जीवन में जीवन साथी के प्रति मिठास बढ़ाती। है माला पशु से बनाया जाता है 12 धागे से एक माला बनती है इसे मंगल माला कहा जाता है। खरबूजा गर्मी की ऋतु में खरबूजे का दान सर्वोत्तम माना जाता है और इससे लाभ मिलता है।
पूजन के बाद बरगद का किला खाया जाता है
चना पुष्टिवर्धनम् खाली पेट खाने से नुकसान नहीं करता व्रत में सब उत्तम आहार माना जाता है। बरगद का किला पूजन के बाद खाया जाता है। बरगद के किले का आयुर्वेदिक महत्त्व भी अधिक है। बरगद का पूजन बरगद को वेदों में अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है यहां दीर्घायु का प्रतीक होता है। पूजन के दौरान संपूर्ण श्रंगार होना चाहिए बरगद के नीचे वापस के नीचे बरगद के अखंड दीपक प्रज्वलित करना चाहिए। बरगद के वृक्ष का ही पूजन करें जिसकी आयु 12 वर्ष से अधिक हो चुकी हो निश्चित रूप से जीवन साथी की दीर्घायु होगी
पंडित दीपक पांडे


Posted By: Vandana Sharma

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