विकास दुबे एनकाउंटर: अखिलेश बोले - सरकार न पलटे इसलिए गाड़ी पलट दी गई तो मायावती ने SC से स्वतंत्र जांच की मांग की

Updated Date: Fri, 10 Jul 2020 03:35 PM (IST)

पांच लाख के इनामी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर विपक्ष ने तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं। यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव का कहना है कि सरकार न पलटे इससे बचने के लिए गाड़ी पलटा दी गई।

कानपुर (एएनआई)। कई विपक्षी दलों के नेताओं ने आरोप लगाया है कि उत्तर प्रदेश सरकार शुक्रवार को कानपुर मुठभेड़ के मुख्य आरोपी विकास दुबे की हत्या के संबंध में "एक गहरा रहस्य" छिपा रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कटाक्ष किया और कहा कि मुठभेड़ ने सरकार को पलटने से बचा लिया। यादव ने ट्वीट किया, "मूल रूप से कार पलट नहीं गई, लेकिन सरकार को पलटने से बचा लिया गया है। कार पलट गई और विकास दुबे ने दौड़ने की कोशिश की। अगर उसे भागना पड़ा, तो वह आत्मसमर्पण क्यों करेगा। राज बहुत गहरा है।"

दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है.

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) July 10, 2020


मायावती ने जांच की मांग की
बसपा प्रमुख मायावती ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मुठभेड़ में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की मौत की सुप्रीम कोर्ट से निगरानी, ​​स्वतंत्र जांच की मांग की है। मायावती ने ट्विटर पर तंज कसते हुए कहा कि मामले की जांच होनी चाहिए, जिसमें कानपुर में हुई मुठभेड़ और बाद में विकास दुबे की हत्या भी शामिल है।

1. कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड की तथा साथ ही इसके मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने व उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। 1/2

— Mayawati (@Mayawati) July 10, 2020
तीनों एनकाउंटर एक जैसे क्यों

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने मुठभेड़ पर सवाल उठाया और कहा कि तीनों एनकाउंट एक जैसे क्यों हुए। उन्होंने दुबे की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण की न्यायिक जांच के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी पूछा। दिग्विजय सिंह ने कहा, 'मैं विकास दुबे की गिरफ्तारी / आत्मसमर्पण की न्यायिक जाँच के लिए शिवराज जी से पूछता हूँ। यह जाँच होनी चाहिए कि कौन से राजनेता और पुलिस अधिकारी उनके संपर्क में थे। विकास दुबे की सुरक्षा न्यायिक हिरासत में सुनिश्चित की जानी चाहिए थी ताकि सभी को हिरासत में लिया जा सके। रहस्य का खुलासा किया जा सकता था। हमें जो डर था वह हुआ।'

जिसका शक था वह हो गया। विकास दुबे का किन किन राजनैतिक लोगों से, पुलिस व अन्य शासकीय अधिकारियों से उसका संपर्क था, अब उजागर नहीं हो पाएगा। पिछले 3-4 दिनों में विकास दुबे के 2 अन्य साथियों का भी एनकाउंटर हुआ है लेकिन तीनों एनकाउंटर का पैटर्न एक समान क्यों है?

— digvijaya singh (@digvijaya_28) July 10, 2020
राजनीतिक लोगों का खुल जाता राज
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, 'कौन से राजनीतिक लोग, पुलिस, और अन्य सरकारी अधिकारी विकास दुबे के संपर्क में थे, अब उजागर नहीं किए जा सकते। पिछले 3-4 दिनों में, विकास दुबे के दो अन्य सहयोगियों से भी मुठभेड़ हुई है, लेकिन तीनों का पैटर्न एक समान क्यों है? कांग्रेस नेता जितिन प्रसाद ने भी टि्वटर पर इस एनकाउंटर पर सवाल किए।

अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?

— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) July 10, 2020


प्रियंका गांधी ने भी खड़े किए सवाल
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को गैंगस्टर विकास दुबे की हत्या के मामले में यूपी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जब अपराधी चला गया है तो उसकी रक्षा करने वालों का क्या होगा। हिंदी में एक ट्वीट में, कांग्रेस नेता ने कहा, "अपराधी चला गया है, लेकिन अपराध और उसकी रक्षा करने वालों के बारे में क्या। कानपुर हत्याकांड के मुख्य आरोपी दुबे को गुरुवार सुबह मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किया गया। गांधी ने पहले दुबे को "सुरक्षा के अनुदान" के बारे में तथ्यों का पता लगाने के लिए सीबीआई जांच की मांग की थी।
अदालत से मिलनी चाहिए थी सजा
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को कहा कि गैंगस्टर विकास दुबे को अदालत में मुकदमे के बाद दंडित किया जाना चाहिए था और आरोप लगाया था कि उसकी हत्या कर दी गई। राजभर ने एएनआई को बताया, "वह (विकास दुबे) इसलिए मारा गया है, ताकि सरकार अपनी अक्षमता को छिपा सके। वह एक अपराधी था और उसे सजा मिलनी चाहिए थी। उसे अदालत की सुनवाई के बाद कानून के तहत सजा मिलनी चाहिए थी।"

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
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