10 मार्च को विनायक चतुर्थी: जानें व्रत और पूजा विधि, 21 दूर्वा दल अर्पित करना है जरूरी

Updated Date: Wed, 06 Mar 2019 05:34 PM (IST)

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा से विशेष लाभ बताया गया है।

विघ्नहर्ता श्री गणेश भक्तों को कष्टों से मुक्त करते हैं और उनके नाम के स्मरण मात्र से बिगड़े हुए काम बन जाते हैं, इसलिए उनको विघ्नहर्ता कहा जाता है। इस बार मार्च की विनायक चतुर्थी 10 मार्च दिन रविवार को है।

इस दिन भगवान गणेश जी की अराधना करने से घर में सुख-समृद्धि, धन-दौलत और आर्थिक संपन्नता तो आती ही है, साथ ही साथ ज्ञान एवं बुद्धि की प्राप्ति होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी तथा कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान श्री गणेश की पूजा से विशेष लाभ बताया गया है।

व्रत एवं पूजा विधि

इस दिन भक्त को अपने दैनिक कार्यों से सुबह ही निवृत होकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें, अगर संभव हो तो लाल रंग का वस्त्र पहनें। इसके बाद विघ्नहर्ता भगवान गणेश को प्रणाम करें और उनके व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।

दोपहर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद गणेश जी का पूजन करने के बाद आरती करें और उनको 21 दूर्वा दल तथा सिंदूर अर्पित करें। भगवान गणेश को दूर्वा प्रिय है। इसके दौरान 'ॐ गं गणपतयै नम: मंत्र का जाप करते रहें। इसके बाद बूंदी के लड्डुओं का भोग लगाएं। इसके बाद प्रसाद लोगों को वितरित कर दें। शाम के समय में गणेश जी की आरती करें और 'ॐ गणेशाय नम:' मंत्र के जाप से पूजा का समापन करें। और फिर भोजन ग्रहण करें।  

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Posted By: Kartikeya Tiwari
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