जेल में नहीं हो सकेगी बंदी से वीआईपी मिलाई

2019-01-03T06:00:34Z

जेल में बदमाशों पर कंट्रोल करने के लिए शासन ने उठाया कदम

वीआईपी मिलाई के जरिए नेटवर्क मजबूत कर रहे थे बदमाश

Meerut। अब जेलों में बदमाशों के साथ वीआईपी मिलाई करने वाले लोगों के लिए बुरी खबर है। शासन ने जेलों में होने वाली वीआईपी मिलाई पर रोक लगा दी है। वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ। विधु दत्त पांडे का कहना है कि शासन के आदेश के अनुसार वीआईपी मिलाई पर तत्काल से रोक लगा दी गई है।

क्या है मामला

देवरिया में पूर्व सांसद अतीक अहमद द्वारा जेल में एक व्यापारी की पिटाई के बाद सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी। छानबीन में निकल कर आया था कि देवरिया में अतीक अहमद को काफी छूट दी जा रही थी। उससे प्रतिदिन वीआईपी मिलाई भी कराई जाती थी। वहीं उसके गुर्गे बाहर लोगों को धमकाते थे। वीआईपी मिलाई के दौरान फोन से भी अतीक अहमद की बातें कराते थे। जेल में बदमाशों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए शासन ने जेल में बंदियों की वीआईपी मिलाई पर रोक लगा दी है।

वीआईपी मिलाई

वीआईपी मिलाई में सांसद, पूर्व संासद, विधायक, पूर्व विधायक, महापौर पूर्व महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष, पूर्व वरिष्ठ जेल अधिकारी समेत किसी भी राजनैतिक पार्टी का जिला अध्यक्ष, महानगर अध्यक्ष अपने लेटर पेड का इस्तेमाल करके जेल में बंदी से बिना लाइन में लगे मिलाई कर सकता है।

मिलाई के नियम

जेल में बंदी से मिलाई के लिए सुबह आठ बजे जेल गेट पर फॉर्म भरकर नंबर लिखवाना पड़ता है।

जेल में मिलाई के लिए बंदी का नाम, पिता का नाम, धारा, थाना समेत बंदी से सबंधित कई महत्वपूर्ण जानकारी फॉर्म में भरनी होती है।

जेल अधिकारी इस फॉर्म को चेक करते हैं और संबंधित बंदी को मिलाई केंद्र में बुलाते है।

मिलाई केंद्र में दोपहर 12 बजे उसकी मिलाई करा दी जाती है।

पहचान पत्र भी जरूरी

एक बंदी की हफ्ते में दो बार हो सकती है मिलाई

शनिवार को नहीं होती है मिलाई

दो शिफ्टों में कराई जाती है मिलाई

मिलाई के समय आधार कार्ड या पहचान पत्र किया जाता है चेक

जेल के भीतर जाने जाने से पहले बंदी रक्षक लेते है तलाशी

मेरठ जेल का हाल

मेरठ जेल में पहले बड़े-बड़े बदमाश रहे है। उनका भी राजनैतिक पार्टियों से गठजोड़ रहा है। उनकी वीआईपी मिलाई भी होती रही है। कई बार पुलिस ने उनकी वीआईपी मिलाई पर रोक लगाने के लिए शासन को लेटर भी लिखा था। योगेश भदौड़ा, उधम सिंह, बदन सिंह बद्दो, सुनील राठी जैसे कई बदमाशों को राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है। उनका हालचाल लेने के लिए राजनैतिक पार्टियों के लोग वीआईपी मिलाई करते थे।


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