जहां निकलेगा कूड़ा वहीं होगा डिस्पोजल

2018-11-09T06:00:03Z

RANCHI: राजधानी में हर दिन सैकड़ों टन कचरा निकलता है। लेकिन इसके डिस्पोजल की आजतक व्यवस्था ही नहीं हो पाई है। यही वजह है कि झिरी डंपिंग यार्ड में कचरे का पहाड़ खड़ा होता जा रहा है। ऐसे में रांची नगर निगम ने वेस्ट के सोर्स पर ही इसका डिस्पोजल करने की योजना बनाई है। इसके तहत सिटी में 150 जगहों पर वेस्ट टू कंपोस्ट बनाने के लिए मशीनें लगाई जाएंगी। इसके अलावा अंडरग्राउंड कंपोस्टिंग की भी व्यवस्था की जाएगी।

पार्क में डिस्पोजल व कंपोस्ट भी

शहर में बल्क जेनरेटर्स के अलावा दर्जनों पार्क हैं, जिससे कि हर दिन फूल-पत्ते और घास भी निकलते हैं। ऐसे वेस्ट को डिस्पोज करने के लिए पार्क में ही वेस्ट टू कंपोस्ट की व्यवस्था की जा रही है। जहां से निकलने वाले कंपोस्ट को पार्क में ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। वहीं एक्स्ट्रा कंपोस्ट निकलने पर इसे सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को दे दिया जाएगा, ताकि वे इसे बेचकर अपना गुजारा कर सके। इतना ही नहीं, लोगों को भी बेहतर खाद मिलने से इसकी बिक्री बढ़ेगी।

होटलों व बैंक्वेट से अधिक कचरा

सिटी में बल्क में कचरा जेनरेट होटलों और बैंक्वेट से होता है। इस वजह से ही काफी मात्रा में कचरा निकलता है। इसे निकालकर कांपैक्टर की मदद से झिरी डंपिंग यार्ड भेज दिया जाता है। इन होटलों में मशीन लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ये मशीनें कचरा डालने पर उसे कंपोस्ट में कनवर्ट कर देती हैं, जिसका उपयोग पौधे और फसलों के उत्पादन में किया जा सकता है।

डंपिंग यार्ड पर कम होगा लोड

रांची नगर निगम क्षेत्र से हर दिन लगभग 300 टन कचरा निकलता है, जिसका आधा से अधिक हिस्सा कांपैक्टर के माध्यम से डंपिंग यार्ड भेज दिया जाता है। लेकिन सोर्स पर डिस्पोजल होने से कचरा उठाकर कहीं और डंप करने की समस्या नहीं होगी। इसका फायदा यह होगा कि डंपिंग यार्ड में कचरे का लोड कम होगा। वहीं आसपास में रहने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी।

वर्जन

बल्क जेनरेटर्स को मशीन लगाने के लिए कहा गया है और इसमें तेजी भी आई है। हमारा फोकस है कि अपने संस्थान से निकलने वाला कचरा अगर वे लोग सोर्स पर ही डिस्पोज कर ले तो हमारी परेशानी कम हो जाएगी। इसके बाद कंपोस्ट का क्या करना है वे देख लें। सेल्फ हेल्प गु्रप को दे दिया जाए तो वे अपनी कुछ कमाई कर लेंगी। पार्को को भी टेंडर करके दे दिया गया है। उन्हें भी डिस्पोजल की व्यवस्था वहीं करनी है। चूंकि पत्ते-डाली और घास हर दिन निकलते हैं।

स्वाति राज, इंचार्ज, मार्केट सेक्शन, आरएमसी


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.