सावधान बदल रहा है मौसम दिन और रात के तापमान में अंतर से खतरा बढ़ा फ्लैग बेरहम मौसम में बच्चे बेदम हेडिंग

2016-02-28T02:11:07Z

दस में से चार बच्चे मौसमी बीमारियों से परेशान

अस्पतालों की ओपीडी में लग रही है लंबी लाइन

ALLAHABAD: बदलते मौसम में बच्चे अधिक बीमार पड़ रहे हैं। मौसमी बीमारियों ने उन्हें चपेट में लेना शुरू कर दिया है। दिन में तापमान बढ़ रहा है और रात में ठंड बनी हुई है। इससे बच्चे कोल्ड डायरिया, निमोनिया, सर्दी-जुकाम का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर्स के अनुसार हॉस्पिटल आने वाले दस में चार बच्चे इसी से परेशान हैं।

खतरे में हैं नवजात

इस मौसम में सबसे ज्यादा खतरा नवजात बच्चों को है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने पर उन्हें मौसमी बीमारियां अपनी चपेट में ले रही हैं। हॉस्पिटल्स की ओपीडी में आने वाले अधिकतर बीमार बच्चों की उम्र पांच साल से कम है। डॉक्टर्स कहते हैं कि इस साल सर्दी ठीक से नहीं पड़ी। फरवरी के महीने में यह तापमान झेलना बच्चों के लिए मुश्किल है। शनिवार को चिल्ड्रेन हॉस्पिटल की ओपीडी पहुंची रिया (2), प्रवेश (1), अनुज (3), शाजिद (7), विक्रम (6)और नेहा (5) के परिजनों ने बताया कि पिछले कई दिनों बुखार इनका पीछा नहीं छोड़ रहा है। शुरुआती इलाज में फायदा न होने से अब परिजनों को हास्पिटल का चक्कर काटना पड़ रहा है। डॉक्टर्स ने बताया कि सबसे ज्यादा मामले कोल्ड डायरिया और निमोनिया के हैं।

इन बातों का रखें ख्याल

डायरिया में बच्चों को उल्टी और दस्त दोनों एक साथ शुरू हो जाता है।

बच्चे को पांच से ज्यादा बार पतली टट्टी हो तो उसे दस्त मानें

सांस फूलना और सीने में खरखराहट के साथ बुखार निमोनिया के लक्षण हैं

बच्चों को आइसक्रीम या ठंडे पानी से बचाएं, बच्चों को ढीले कपड़े पहनाएं

बुखार आने पर तत्काल पैरासिटामाल दे सकते हैं, डायरिया हो तो ओआरएस का घोल पिलाएं

तबियत न सुधरे तो डाक्टर से दिखाकर कोई दवा दें

सफाई का विशेष ध्यान रखें, हमेशा हाथ साफ करके ही खाना खिलाएं

ताजा और हल्का खाना खिलाएं, बाहर के खाने से परहेज करें

बॉक्स

अभी सतर्क रहने की जरूरत

इस साल पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर रहने से मैदानी इलाकों में ठंड कम पड़ी है। इससे दिन और रात के तापमान में लगातार वैरिएशन बना है। वर्तमान में दिन का तापमान रात के मुकाबले दोगुना है। यह सेहत के लिए खतरे की घंटी है।

छोटे बच्चे मां के दूध पर निर्भर होते हैं। उन्हें बाहर की चीजों से दूर रखना जरूरी है। हो सके तो बच्चों को घर का बना ताजा और हल्का भोजन ही दें।

-डॉ। मनीषराज चौरसिया,

चाइल्ड स्पेशलिस्ट

ओपीडी में आने वाले चालीस फीसदी बच्चे मौसमी बीमारियों से पीडि़त है। इन्हें दवा से ज्यादा सावधानी की जरूरत है। घर में एसी और ठंडे पानी का उपयोग फिलहाल न करें।

-डॉ। ओपी त्रिपाठी,

फिजीशियन


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