चरस अफीम गांजा ब्राउन सुगर बोलो क्या चाहिए?

2012-06-26T11:20:02Z

बदलते वक्त के साथ सिटी में ड्रग्स यूजर्स की संख्या बढ़ रही है इस वजह से यहां क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है यहां काफी मात्रा में ड्रग्स का खेप आसानी से पहुंच रहा है

बदलते वक्त के साथ सिटी में ड्रग्स यूजर्स की संख्या बढ़ रही है. इस वजह से यहां क्राइम का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. बिहार, बंगाल और ओडि़शा से सटे होने के कारण यहां काफी मात्रा में ड्रग्स का खेप आसानी से पहुंच रहा है. अगर बात ड्रग्स यूजर्स की करें तो इनमें स्कूल स्टूडेंट्स से लेकर 40-45 साल के लोग भी शामिल हैं. सिटी में  रेलवे स्टेशन एरिया से लेकर सोनारी, कदमा, साकची से लेकर एग्रिको, टिनप्लेट, सिदगोड़ा जैसे एरियाज में ड्रग्स का करोबार फल-फूल रहा है.

बदल रहा है ट्रेंड
सिटी के ड्रग्स के यूज करने के ट्रेंड में काफी चेंज आया है. पहले जहां भांग, गांजा और अफीम जैसे ड्राई ड्रग्स का यूज काफी ज्यादा होता था, वहीं पिछले 8-10 सालों में ब्राउन सुगर, चरस के साथ-साथ इंजेक्टिव ड्रग्स का चलन काफी बढ़ा है.

बॉर्डर एरिया का उठाते हैं फायदा
जमशेदपुर इंडस्ट्रियल सिटी होने की वजह से बिहार, बंगाल और ओडि़शा के कई मेजर सिटीज से कनेक्टेड है. बंगाल और ओडि़शा से यहां बहरागोड़ा के रास्ते ड्रग्स की सप्लाई की जाती है. इसके साथ ही इसे ट्रेन के रास्ते से सिटी लाया जाता है. इसके बाद सिटी के डिफरेंट एरिया में इसकी सप्लाई की जाती है.

महिलाएं भी हैं शामिल
ऐसा नहीं है ड्रग्स पेडलिंग में सिर्फ पुरूष ही शामिल हैं. पुलिस और लोगों की नजर से बचने के लिए इस बिजनेस में महिलाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है. सिटी में कई बार पुलिस ने महिला सप्लायर को अरेस्ट कर काफी मात्रा में गांजा अरेस्ट कर इंटरस्टेट गैंग का खुलासा कर चुकी है.


आसानी से अवेलेबल हैं ड्रग्स
सिटी में चल रहे ड्रग्स रिहैबिलिटेशन सेंटर्स के मुताबिक रेलवे स्टेशन, बिष्टुपुर, कदमा, एग्रिको, एमजीएम सिदगोड़ा, बागबेड़ा और परसूडीह, बिरसा नगर,  पारडीह में ब्राउन सुगर से लेकर तमाम ड्रग्स आसानी से अवेलेबल हैं. कुछ ड्रग्स यूजर्स किसी भी मेडिकल शॉप से ब्लैक में इंजेक्शन खरीदकर उसका यूज करते हैं.

आ रहे हंै रिहैबिलिटेशन सेंटर
बारीडीह स्थित कोलकाता समारिटन द्वारा संचालित इंट्रीगेटेड रिहेबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्टस में अनेक ड्रग्स एडिक्ट रिहैबिलिटेशन और काउंसिलिंग के लिए आ रहे हैं. यह स्टेट गवर्नमेंट के एड्स कंट्रोल सोसाइटी का पार्टनर
भी है.

क्या हो सकता है असर?
-   हर्ट अटैक का चांस बढ़ सकता है.
-   किडनी फेल होने का चांस.
-    नर्वस सिस्टम फेल हो सकता है.
-    पागलपन का दौरा.

सिटी में ड्रग्स का चलन बढ़ता जा रहा है. इसकी वजह से इसका आसानी से अवेलेबल हो पाना. कई लोग खुद ही रिहेबिलिटेशन सेंटर में आ रहे हैं.
रेफेल फ्रांसिस
काउंसलर, इंट्रीगेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्टस, बारीडीह


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