सूरज को चढ़ा बुखार धधक रही धरती

2017-04-22T07:40:16Z

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शरीर का नार्मल टेम्प्रेचर होता है 98.6 डिग्री फारेनहाईट

सूरज का तापमान पहुंचा 116 फारेनहाइट के पार

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: समूचे उत्तर भारत में भयावह गर्मी पड़ रही है। पहली बार ऐसा हुआ, जब मार्च में ही उत्तर भारत में रिकार्डतोड़ गर्मी पड़नी शुरू हो गई। शहर में एक पखवारे से पारा लगातार 40 डिग्री के ऊपर बना हुआ है। 19 अप्रैल को प्रचंड गर्मी ने 18 साल का रिकार्ड का रिकार्ड ब्रेक कर दिया। इस दिन का टेम्प्रेचर 46.5 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। भारत मौसम विज्ञान विभाग की गणना के मुताबिक इलाहाबाद में इससे पहले इतनी गर्मी 30 अप्रैल 1999 में पड़ी थी।

दनादन बीमार पड़ रहे लोग

सिटी में गर्मी ने लोगों की कमर किस कदर तोड़ रखी है। इसे केवल इस बात से समझा जा सकता है कि बॉडी का टेम्प्रेचर नार्मल से थोड़ा ऊपर हो जाए तो बुखार से जीना मुश्किल हो जाता है। यह 104 फारेनहाइट तक पहुंच जाए तो डॉक्टर के पास ले जाना मजबूरी होती है। इसके ठीक उलट इन दिनों हमारे आसपास का तापमान है। तभी तो मारे गर्मी के लोग दनादन बीमार पड़ रहे हैं। कोई बुखार से पीडि़त है तो कोई गर्मी के चलते किसी अन्य बीमारी से जूझ रहा है।

सड़क पर कोमा जैसे हालात

सूरज को चढ़े बुखार की गणना आप करना चाहें तो आप भी कर सकते हैं। एग्जाम्पल के तौर पर एक डिग्री सेल्सियस 33.8 डिग्री फारेनहाईट के बराबर होता है। इसके बाद प्रत्येक एक डिग्री सेल्सिय के हिसाब से 33.8 डिग्री फारेनहाईट में 1.8 डिग्री फारेनहाईट को जोड़ते जाईये। इस हिसाब से यदि किसी दिन का टेम्परेचर 43 डिग्री सेल्सियस है तो यह 109.4 डिग्री फारेनहाईट के बराबर निकलेगा। वहीं 46 डिग्री सेल्सियस है तो सड़क पर कोमा जैसे हालात बन गए हैं। इसका उदाहरण दिन में खाली सड़कें देती हैं।

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खतरनाक है ये तापमान

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में ज्योग्राफी डिपार्टमेंट के एक्स। एचओडी प्रो। बीएन मिश्रा बताते हैं कि सिर के पीछे वाले पार्ट में हाइपोथैलमस नामक जगह होती है। यह शरीर के ताप को नियंत्रित करती है। इतने ज्यादा तापमान में यह अनियंत्रित भी हो सकती है। जिससे शरीर का ताप अचानक से अनियंत्रित होकर बढ़ना शुरू हो सकता है और आप गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि थर्मोरेगुलेटरी सेंटर के फेल हो जाने पर शरीर बहुत तेजी से हीट होता है। इससे पूरा शरीर सूख जाता है और हाई फीवर के साथ लीवर फेल हो जाने समेत कई सारी समस्याएं हो सकती है।

गर्मी इतनी अधिक और लगातार पड़ रही है कि छत में लगी टंकी का पानी उबल रहा है। इसमें इतनी गर्माहट है कि अगर यह पानी शरीर पर पड़ जाये तो फफोले भी पड़ सकते हैं। लोगों को अपने आप को बचाकर रखने की जरूरत है।

-प्रो। सुनीत द्विवेदी,

आटोमेटिक वेदर सेंटर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी

ये है दिलचस्प आंकड़े

37 डिग्री सेल्सियस- 98.6 डिग्री फारेनहाईट

38 डिग्री सेल्सियस- 100.4 डिग्री फारेनहाईट

39 डिग्री सेल्सियस- 102.2 डिग्री फारेनहाईट

40 डिग्री सेल्सियस- 104 डिग्री फारेनहाईट

41 डिग्री सेल्सियस- 105.8 डिग्री फारेनहाईट

42 डिग्री सेल्सियस- 107.6 डिग्री फारेनहाईट

43 डिग्री सेल्सियस- 109.4 डिग्री फारेनहाईट


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