नादिया मुराद आईएसआईएस की गुलामी से लेकर नोबेल पुरस्कार विजेता तक का सफर

2018-10-06T17:22:10Z

आईएसआईएस आतंकी संगठन के चंगुल से बचकर भागी नादिया मुराद को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है। नादिया का जीवन काफी संघर्षों से भरा है।

लंदन (थॉमस रॉयटर्स फाउंडेशन)। इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों की गुलाम रही इराकी यजीदी महिला नादिया मुराद को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुना गया है। नादिया मुराद का कहना है कि वह उम्मीद करती है कि नोबेल शांति पुरस्कार जीतने से उनके अपने लोगों की दुर्दशा के बारे में दुनिया अच्छी तरह से जान पायेगी। बता दें कि आतंकवादियों के चंगुल से जान बचा कर भागने वाली यजीदी महिला नादिया मुराद और कांगो के चिकित्सक डेनिस मुकवेगे को यौन हिंसा को युद्ध हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने पर रोक लगाने के इनके प्रयासों के लिए नोबेल शांति पुरस्कार के लिए संयुक्त रूप से चुना गया है।
उनकी मां और भाइयों को भी आतंकियों ने उतारा मौत के घाट
गौरतलब है कि मुराद, इराक में लगभग 7,000 महिलाओं और लड़कियों में से एक थी, जिन्हें अगस्त 2014 में मोसुल में इस्लामिक एस्टेट के आतंकियों द्वारा बंधक बनाया गया था। वहां मुराद के साथ मारपीट और दुष्कर्म किया जाता था। वह तीन महीने बाद आतंकवादियों के चंगुल से किसी तरह से भाग गई और जर्मनी पहुंची। जर्मनी से वह अब अपने लोगों को बचाने के लिए अभियान चलाती है। उन्होंने 2015 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में और दुनिया भर में सरकारों से यजीदी के समर्थन में आने के लिए अपील की थी। मुराद ने कहा कि वह इस पुरस्कार को हासिल कर बहुत सम्मानित महसूस कर रही हैं। इसे वह यज़ीदिज, इराकियों, कुर्दों और अन्य सताए गए अल्पसंख्यकों के साथ साझा करेंगी। उन्होंने बताया कि आतंकियों ने यजीदी समुदाय पर हमला करने के दौरान उनके मां और नौ भाइयों में से छह को बेरहमी से मौत के घात उतार दिया था।

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