तो पूरी होती है बेटर लाइफ की तलाश

2013-11-12T17:44:00Z

Jamshedpur कुछ सालों पहले तक दिल्ली मुंबई पुणे और बंगलोर जैसी सिटीज में जॉब पाने के लिए एड़ीचोटी का जोड़ लगा देने वाले यंग प्रोफेशनल्स अब बेहतर लाइफ और सुकून की तलाश में छोटे शहरों का रुख कर रहे हैं जमशेदपुर भी ऐसी सोच रखने वाले कई यूथ का ड्रीम डेस्टिनेशन बन रहा है

बढ़ रही है city की demand
महेश कुमार सिंह एस्सार ग्र्रुप की बीपीओ कंपनी एजिस के सिटी स्थित सेंटर में 2011 से बतौर एचआर हेड पोस्टेड हैं. इससे पहले वो कई सालों तक दिल्ली में रहे. जमशेदपुर से ही बिलांग करने वाले महेश कुमार सिंह सिटी से प्लस टू तक की पढ़ाई कम्प्लीट करने के बाद हायर स्टडीज के लिए दिल्ली चले गए और पढ़ाई कम्प्लीट करने के बाद वहीं सेटल हो गए. पर उन्होंने कहा कि एजिस में काम करते हुए जब उन्हें जमशेदपुर जाने का मौका मिला तो बिना एक पल सोचे वो इसके लिए राजी हो गए. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि अपने होम टाउन वापस आने से ना सिर्फ पारिवारिक जरूरतें पूरी हुईं बल्कि एक सुकून का अहसास भी हुआ. डिफरेंट कंपनीज में मीडियम और हायर लेवल पर काम कर रहे कई लोग इस सोच के साथ मेट्रो सिटीज का मोह छोड़ छोटे शहरों का रुख कर रहे हैं. इनमें जमशेदपुर का रुख करने वाले कुछ लोगों के लिए भले ही ये होम टाउन हो पर यहां आने वाले ज्यादातर लोग किसी तरह का कनेक्शन ना होने पर भी एक बेटर लाइफ के लिए यहां आ रहे हंै.

लंबी है list
बड़े शहरों में जाकर अपना एक मुकाम बनाने के बाद छोटे शहरों का रुख करने वाले लोगो की बड़ी संख्या है. पिछले कुछ सालों में बड़े शहरों से जमशेदपुर माइग्र्रेट करने वाले लोगों की तादाद भी काफी बढ़ी है. महेश सिंह ने बताया कि पिछले एक साल में मिडल और सीनियर रैैंक पर दूसरे सिटीज में पोस्टेड कई लोग जमशेदपुर में वेकेंसी होने पर यहां आए हैैं. टाटा बिजनेस सपोर्ट सर्विसेज (टीबीएसएस) के जमशेदपुर सेंटर के रिक्रूटमेंट हेड शिरीष शेखर ने बताया कि सिटी या आसपास के इलाकों से जुड़े कई लोग मौका मिलने पर यहां आना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि कोलकाता और पुणे जैसे सिटीज से कई लोग वापस जमशेदपुर आकर जॉब करते हैं.

Better life  की तलाश
 मेट्रो सिटीज से आकर छोटे शहरों में करियर तलाश करने वाले लोग की एक आम सोच, इंकम और खर्च का बैलेंस है. बैैंकिंग सेक्टर में सीनियर एग्जिक्यूटिव के रैैंक पर मुंबई में दो साल तक काम कर जमशेदपुर आने वाले पंकज गुप्ता ने बताया कि बड़े शहरों के कंपैरिजन में स्मॉल सिटीज में सैलरी कम होने पर भी खर्च में काफी कटौती हो जाने की वजह से सेविंग ज्यादा होती है. इसके अलावा भागदौड़ कम होने की वजह से एक सुकून भी रहता है. इसकी और बड़ी वजह है स्मॉल सिटीज में भी क्वालिटी ऑफ लाइफ में इंप्रूवमेंट होना है.
'मेट्रो सिटीज में पोस्टेड कई मिडल और सीनियर लेवल के इंप्लाई जमशेदपुर आना चाहते हैं. मैैं खुद कई सालों तक दिल्ली में रहने के बाद जमशेदपुर आया हूं.'
-महेश कुमार सिंह, एचआर हेड, एजिस, जमशेदपुर
'कोलकाता, पुणे,  जैसी सिटीज से जमशेदपुर आने वाले लोग की अच्छी-खासी संख्या है.'
-शिरीष शेखर रीक्रूटमेंट हेड टीबीएसएस
Report by : abhijit.pandey@inext.co.in


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