बीएचयू में फर्राटा शहर में सन्नाटा

2018-11-30T06:00:50Z

-पीईडीएल साइकिल सर्विस को सिटी में नहीं मिला रिस्पॉन्स

-एप बेस्ड इस सर्विस में तीन रुपये में 30 मिनट के लिए मिल रही है साइकिल

-पॉल्यूशन व ट्रैफिक जाम से निजात के लिए शुरू की गयी सर्विस हुई धड़ाम

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पर्यावरण और खुद को फिट रखने के लिए बातें तो बहुत करते हैं, लेकिन जब बात कुछ करने की होती है तो हम आगे ही नहीं आते। यह हम नहीं कह रहे, बल्कि शहर में दम तोड़ रही एक नयी पहल उसकी गवाही कर रहा है। बाइक-कार से चलने में उलझन और घुटन से मुक्ति दिलाने के साथ ही हेल्थ और इन्वायरमेंट कॉन्शस लोगों के लिए किया गया प्रयास धड़ाम हो गया है। लगातार बिगड़ रहे शहर के सेहत को सुधारने तथा ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए तीन महीने पहले बनारस में नई पहल की गयी थी। जिसके तहत बीएचयू सहित शहर के अलग-अलग प्वाइंट पर साइकिल्स उपलब्ध करायी गयी। मात्र तीन रुपये में 10 मिनट की रेट से पेमेंट करने पर पब्लिक को साइकिल से आने-जाने की सुविधा दी जा रही है, पर सिटी में साइकिल चलाने वाले ही नहीं मिल रहे हैं। जबकि बीएचयू में यह हिट है।

एक महीने में सिर्फ 500 बुकिंग

ट्रैफिक जाम से रेंगते शहर में साइकिल बेहतर विकल्प हो सकता है। इसी सोच के तहत ट्रैफिक पुलिस की पहल पर जूमकार व नगर निगम ने हाथ मिलाया था। लेकिन उम्मीद पर पानी फिर गया। जहां बीएचयू कैंपस में एक महीने में 6000 तक साइकिल की बुकिंग हो रही है तो वहीं सिटी में मात्र 500 लोगों ने साइकिल बुक किया। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि शहर में साइकिल से आने-जाने का कितना क्रेज है। जबकि मिनट के साथ ही महीने का प्लान कंपनी की ओर से दिया जा रहा है।

बीएचयू के बाद सिटी में हुई शुरूआत

बंगलुरू बेस्ड कंपनी जूमकार ने आईआईटी बीएचयू से अपनी एप बेस्ड रेंटल साइकिल सर्विस की शुरूआत की थी। इसके बाद इसे शहर में नगर निगम से मिलकर लांच किया गया है। लेकिन यहां इसका फ्लाप शो है। बता दें कि कंपनी का ये प्रोजेक्ट पुणे व बंगलुरू में खासा पॉपुलर है। विदेशों की तर्ज पर इसमें आपको शहर में कहीं भी आने-जाने के लिए साइकिल किराये पर मिलती है। साइकिल लेने, उसका किराया देने, उसे वापस जमा करने का पूरा सिस्टम हाईटेक और एप आधारित है। कंपनी की सभी साइकिल्स में जीपीएस व एडवांस गियर इनबिल्ड है।

300 साइकिल्स, नौ जगह स्टैंड

साइकिल की इस नई सर्विस का नाम पीईडीएल है। इसके तहत बीएचयू व शहर के लिए कंपनी ने 300 हाइटेक साइकिल को उतारा है। जिनके के लिए बीएचयू कैंपस के अलावा सिटी में नौ प्वाइंट पर स्टैंड बनाए गए हैं। बावजूद इसके लोग साइकिल से दूरी बनाए हुए हैं। कंपनी के एरिया बिजनेस मैनेजर गुंजित सिंह ने बताया कि कंपनी ने बीएचयू में क्रेज को देखते हुए शहर में इस प्रोजेक्ट को लांच किया गया है। लेकिन सिटी में इसका रिस्पांस बहुत धीमा है।

आठवां शहर बना बनारस

जूमकार की पीईडीएल सर्विस पुणे के अलावा कोलकाता, बंगलुरु, नई दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, मुंबई में पहले से चल रही है। पीएम नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र बनारस आठवां शहर बना, जहां पीईडीएल की सर्विस उपलब्ध करायी गयी। ब

क्यू आर कोड से खुल रहा लॉक

-कंपनी की सभी साइकिल्स यूनिसेक्स मॉडल की हैं, जिसे लेडीज-जेंट्स दोनों चला सकते हैं।

-प्रत्येक साइकिल के फोर्क में डिजिटल लॉक है, जो जूमकार एप के क्यूआर कोड के जरिये ही खुलता है।

-हर साइकिल जीपीएस से लैस है, जिससे साइकिल की पल-पल की लोकेशन कंट्रोल रूम में ट्रैक होती है।

-सभी साइकिल्स में इंटरनेशन गियर सिस्टम लगा है, जो बहुत ही स्मूद साइकिलिंग का एक्सपीरियंस फिल कराता है।

-साइकिल के टैरिफ का पेमेंट पूरी तरह से डिजिटल है। यानि सर्विस एंड के बाद आपके अकाउंट से पेटीएम के थ्रू पैसे कट जाता है।

-जूमकार एप से कोई भी अपने आस-पास उपलब्ध साइकिल की लोकेशन व संख्या पता सकता है।

- ये एप गुगल प्लेस्टोर से किसी भी स्मार्ट मोबाइल फोन में डाउनलोड किया जा सकता है।

- बिना एप के वेबसाइट डब्लूडब्लूडब्लू.पीईडीएल.इन पर लॉग इन करके बुकिंग करना संभव है।

-इस सर्विस के रेगुलर कस्टमर्स के लिए मंथली पास की भी सुविधा दी गयी है।

-99 रुपये मंथली देने वाले को एक घंटे पर डे साइकिल चलाने को मिलता है। वहीं 199 रुपये मंथली पे करने वाला डेली डेढ़ घंटे साइकिल चला सकता है।

वर्जन-------

बीएचयू में सायकिलिंग के रेस्पांस को देखते हुए इस प्रोजेक्ट को सिटी में भी नगर निगम के सहयोग से लांच किया गया। जिसमें ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम व अन्य वजहों के चलते सफलता बहुत धीमी गति से मिल रहा है।

रूशाली, पीआर हेड

जूमकार, बंगलुरू

Posted By: Inextlive

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