इस स्कूल में रोज गाया जाता है यह गीत

आरएलबी स्कूल में ये 'मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानीÓ. नियमित रूप से स्कूल में होने वाले किसी कार्यक्रम के साथ असेम्बली में गाया जाता है. इसके साथ हीच्बच्चों को इस गीत से पहले इसके पीछे जुड़े इतिहास की जानकारी दी जाती है. इतना ही नहीं स्कूल के हर क्लास रूम में चीन, पाकिस्तान और कारगिल लड़ाइयों के नायकों की तस्वीर और उनके बारे में जानकारी दी गई है. जिसे स्टूडेंट्स उनके बारे में जानकारी ले उन जैसा बनने की प्ररेणा ले.

लखनऊ में पढ़े थे कवि प्रदीप

51 साल पहले देश के सैनिकों के गिरे मनोबल को बढ़ाने के लिए ये मेरे वतन के लोगो, जरा आंख में भर लो पानी, जैसे सांग को रचने वाले कवि प्रदीप का सिटी से गहरा नाता है. पूर्व आईएएस दिनेश चंद्र अवस्थी का कहना है कि पहली बार 1937 में कवि प्रदीप पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की एक किताब को अनुवाद करने के लिए सिलसिले में अपने भाई कृष्णा वल्लभ द्विवेदी के साथ आए थे. तब वह लखनऊ के गणेशगंज एरिया में रहते थे. उन्होंने 1939 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से बीए कम्पलीट कर मुम्बई चले गए. वहां उन्होंने फिल्मों के लिए गाने खिलने का काम शुरू कर दिया.

दे दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढाल

इतिहासविद् योगेश परवीन का कहना है कि कवि प्रदीप ने जब 'ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानीÓ लिखा, तो उसे पहले ही वीर रस के कवि के तौर पर प्रसिद्ध हो चुके थे. इससे पहले वह 1952 में आई फिल्म जागृति में कवि प्रदीप का लिखा गीत दे 'दी हमें आज़ादी बिना खड्ग बिना ढालÓ भी बड़ा मशहूर हुआ था. ये गाना उन्होंने महात्मा गांधी को समर्पित था. इसके साथ ही वह कई बार सिटी में कवि सम्मेलनों में शामिल हो चुके थे. फिल्मों में जाने से पहले उनकी कविता पानीपत काफी फेमस हो गया था.

Posted By: Inextlive