पूर्व क्रिकेटरों द्वारा जो किताबें लिखी जा रही हैं, उनमें सचिन तेंदुलकर पर बचकानी और बेतुकी बात लिखना मानो फैशन सा हो चला है. पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर की किताब का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा था कि पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर और भारत के पूर्व कोच ग्रेग चैपल अपनी किताब को बेचने के चक्कर में ‘पागलपन’ की सीमाएं लांघ बैठे.

अपनी नई किताब में चैपल ने तेंदुलकर को मानसिक रूप से कमजोर बताने की कोशिश की है. चैपल 2005 से 2007 तक भारतीय क्रिकेट टीम के कोच रहे और उनका कार्यकाल विवादों से घिरा रहा. अपनी नई किताब ‘फीयर्स फोकस’ में उन्होंने लिखा है कि तेंदुलकर 2006 में ‘मानसिक तौर पर काफी कमजोर’ रहे. उन्होंने लिखा है, ‘भारतीय टीम के साथ मेरे शुरुआती दौर में वह (तेंदुलकर) मुझसे दो-दो घंटे तक बात करता था.’ chappell

हेराल्ड सन में प्रकाशित किताब के कुछ अंशों में कहा गया, ‘वह अपने फॉर्म को लेकर संशय में था. मलेशिया में 2006 में वनडे टूर्नामेंट से लौटने के बाद मानसिक तौर पर वह आश्चर्यजनक रूप से काफी कमजोर हो गया था और मेरे पास मदद के लिए आता था.’

ये कोई चाल तो नहीं

कुछ दिनों पहले ही ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय चयनकर्ता के पद से हटाए गए चैपल ने कहा कि तेंदुलकर अपेक्षाओं के बोझ से प्रभावित हो गए थे. उन्होंने लिखा है, ‘टीम जब विदेश दौरे पर जाती थी तो वह (तेंदुलकर) हमेशा हेडफोन लगाए रहता था और आजू-बाजू देखता भी नहीं था. इतनी अधिक अपेक्षाओं का बोझ डॉन ब्रैडमेन पर भी नहीं रहा होगा, जो सचिन 1989 से झेल रहा है. वह आराम भी नहीं कर पाता था.

एक बार मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे तो बहुत सारे दोस्त होंगे और उन सबसे संपर्क में रह पाना मुश्किल होता होगा. उसने मेरी आंखों में आंखें डालकर कहा कि मुझसे ज्यादा भारत में आपके दोस्त होंगे.’

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