-अटैची में रखे रिकॉर्ड लेने के लिए कुशीनगर टीम रवाना

-तीन तरह से कंपनी में इन्वेस्ट करा रहा था रुपए

BAREILLY: 300 करोड़ की ठगी के महाठग राजेश मौर्या ने पुलिस पूछताछ में कई खुलासे किए हैं. पुलिस उसके बरेली स्थित ऑफिस लेकर पहुंची और वहां से तीन बैग जब्त किए हैं, जिसमें जमीनों की रजिस्ट्री समेत कई रिकार्ड हैं. इसके अलावा पुलिस की एक टीम कुशीनगर रवाना हो गई है. वहां उसने एक अटैची में कंपनी के सारे डॉक्यूमेंट रखे हैं. पुलिस ने उसकी निशानदेही पर कंपनी के नाम रजिस्टर्ड एक और कार कब्जे में ली है. पुलिस ने उसका लैपटाप आईपैड और मोबाइल कब्जे में ले लिया है और साइबर सेल पूरा डाटा हार्ड डिस्क में ट्रांसफर कर रही है. राजेश मौर्या को फ्राइडे को पुलिस ने गाजियाबाद के साहिबाबाद से हिरासत में लिया था. दैनिक जागरण आईनेक्स्ट ने सबसे पहले इस खबर को ब्रेक किया था. अभी पुलिस उससे पूछताछ कर अधिक से अधिक रिकार्ड कलेक्ट कर रही है. उसके बाद उसकी गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाएगा.

सेटिंग से पकड़ा गया राजेश

लगातार शहर बदल रहा राजेश मौर्या, इतनी आसानी से पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है. वह किसी भी हाल में सरेंडर नहीं करना चाहता था, लेकिन जब उसका परिवार जेल चला गया तो फिर उसने गाजियाबाद के एक पुलिस अधिकारी से संपर्क किया और फिर साहिबाबाद थाने पहुंच गया. जहां से बरेली पुलिस को बुलाया गया और फिर पुलिस उसे लेकर बरेली आ गई. यहां एसएसपी, एसपी क्राइम, एसपी सिटी व क्राइम ब्रांच ने उससे कई घंटे पूछताछ की. विवेचक ने भी उसके बयान रिकॉर्ड किए हैं.

18 ऑफिस का चला पता

पुलिस पूछताछ में राजेश मौर्या ने बताया कि उसने करीब 18 ऑफिस बनाए हैं. सेंट्रल ऑफिस में तलाशी के दौरान वीडियोग्राफी भी की गई है. इन सभी ऑफिस में हेड बनाए गए थे. इन्हीं हेड के जरिए इनवेस्टर्स कंपनी में रुपए लगाते थे. अब पुलिस इन सभी ऑफिसेस का रिकॉर्ड खंगालेगी. इन ऑफिस में कितने लोगों ने इनवेस्ट किया उसका रिकॉर्ड खंगाला जाएगा. कंपनी के नाम 10 गाडि़यां हैं, जिसमें से 6 गाडि़यां अब तक कब्जे में ली जा चुकी हैं. सैटरडे को राजेश मौर्या के बताने पर कंपनी के कोहाड़ापीर ऑफिस के हेड सुबोध मिश्रा से फोर्ड कार कब्जे में ली गई है. एक अन्य चंदीप सिंह के पास भी कंपनी की कार है. पुलिस जल्द उसे भी कब्जे में लेगी. इसके अलावा कई अन्य बड़े लोगों के भी नाम आ रहे हैं, जिन पर राजेश मौर्या ने रुपए खर्च किए हैं.

3 तरह से हो रहा थ्ा इनवेस्ट

राजेश मौर्या ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह तीन तरह से कंपनी में पैसा इनवेस्ट करा रहा था. पहले तरीके से वह रियल एस्टेट के नाम पर इनवेस्ट कराता था. इसके तहत वह प्लॉट देता था और 1 परसेंट का ब्याज भी देता था. उसने दो जगह कॉलोनी भी काट दी थीं. दूसरे तरीके से वह कंपनी में कर्ज के तौर पर इनवेस्ट करता था और उसी आधार पर पैसा दिया जाता था. तीसरा तरीका डिजिटल क्वाइन में इनवेस्ट किया है. इससे जो इनकम होती थी, वह निवेशकों को देता था.

तीन अलग-अलग तरीके से जांच

अभी तक इस केस में 4 एफआईआर दर्ज की गई हैं. पुलिस ने तीन अलग-अलग तरह की एफआईआर दर्ज की हैं, जिसमें रियल स्टेट, लोन व डिजिटल क्वाइन के नाम से इन्वेस्टमेंट की हैं. अब जो भी इनवेस्टर यानि पीडि़त शिकायत लेकर आएगा, उसकी जिस तरह की शिकायत होगी, उसकी शिकायत उसी तरह की एफआईआर में जोड़ दी जाएगी. इसके लिए तीन अलग-अलग इंस्पेक्टर को जांच दी गई है.

इन प्वाइंटस पर पुलिस की जांच

-गंगा इन्फ्रासिटी कंपनी का स्ट्रक्चर क्या है, इस कंपनी में कितने लोग जुड़े हुए हैं.

-कंपनी के ऑफिस कहां कहां हैं और उनके हेड कौन-कौन हैं

-किस-किस ऑफिस से कितने लोगों ने रुपए इनवेस्ट किए हैं

-गंगा इन्फ्रासिटी के नाम से सभी रजिस्ट्री हुई हैं. इन सभी रजिस्ट्री का रिकार्ड पुलिस देख रही है.

-कुछ जमीनों के एग्रीमेंट नोटरी के जरिए हुए हैं, उसने पुलिस को नोटरी वकील का नाम बताया है.

-उसके पास रजिस्टर्ड बैनामे के रिकार्ड हैं, यह किन-किन के नाम है, इसे चेक किया जा रहा है

-कुशी नगर में कंपनी के सारे डॉक्यूमेंट हैं, जिसमें बैलेंस सीट, इनकम टैक्स रिटर्न व अन्य के कागजात हैं -कंपनी के नाम जमीन की कितनी वैल्यू है

-उसने डिजिटल क्वाइन में कितना रुपए लगाए हैं, इसका रिकार्ड खंगाला जा रहा है

-जब सभी रिकॉर्ड सामने आ जाएंगे तो पता चलेगा कि कंपनी में कितना इनवेस्ट हुआ है और कितना रुपए की देनदारी बाकी है.

तो क्या साथियों ने की ठगी

पुलिस की मानें तो राजेश का कहना है कि कंपनी में कुछ भी गड़बड़ नहीं था. कंपनी इन्वेस्टर्स का पैसा भी दे रही थी, लेकिन कंपनी में जो लोग जुड़े हैं और जिन्हें उसने अलग-अलग ऑफिस का हेड बनाया, उन लोगों ने कंपनी में पैसा न लगाकर अपने या अपने परिवार के किसी सदस्य के नाम करा लिए. इस वजह से इन्वेस्टर्स का पैसा कंपनी में नहीं पहुंचा. उसके बाद इन्हीं लोगों ने हंगामा कर दिया कि कंपनी भाग रही है. उसकी कंपनी रजिस्टर्ड है. वह चाहता तो कंपनी को दिवालिया घोषित कर सकता था.