-माता-पिता को दिया गोल्डन गर्ल ने सफलता का श्रेय

-छोटे भाई को भी मेडिकल के लिए किया मॉटीवेट

आगरा. यूनिवर्सिटी से 11 गोल्ड हासिल कर गोल्डन गर्ल बनी आकांक्षा ने क्लास नाइंथ से मेडिकल की पढ़ाई शुरू की. उन्होंने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता और टीचर्स को दिया. डॉ. भीमराव आम्बेडकर यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस करने वाली मेडिकल की स्टूडेंट्स आकांक्षा सिंह की बचपन से ही पढ़ाई में रूचि थी. पिता सतवीर सिंह और माता सरला लेक्चरर हैं.

पेरेंट्स ने किया मॉटीवेट

गोल्डन गर्ल आकांक्षा सिंह ने अपनी सफलता में पेरेंट्स के सहयोग को अहम बताया. बचपन से ही उन्होंने अपनी इच्छा कभी नहीं जाहिर की. स्वयं ही फील्ड का चयन करने के लिए प्रेरित किया. क्लास नाइंथ और टेंथ में साइंस में अच्छे मा‌र्क्स देखकर मेडिकल फील्ड का चयन खुद ही किया. पेरेंट्स ने भी इस पर अपनी सहमति व्यक्त कर दी.

छोटे भाई आलोक को किया गाइड

गोल्डन गर्ल ने बताया कि परिवार में बड़ी होने के चलते उन्होंने छोटे भाई आलोक को भी मेडिकल के लिए मॉटीवेट किया. आज आलोक यूएस से एमबीबीएस कर रहा है. अक्सर स्टडी में समस्या आने पर में वह आलोक को गाइड करती हैं.

सोशल मीडिया से दूरी बताया सफलता का सूत्र

गोल्डन गर्ल ने सोशल मीडिया से दूरी को भी सफलता का सूत्र बताया. आकांक्षा का कहना है कि वर्तमान में सब कुछ डिजिटल है. मोबाइल, सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, फेसबुक से हम घिरे हैं. सफलता के लिए इससे दूरी बहुत जरूरी है. इसके साथ ही सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य को निर्धारित कर उसे पाने की प्रबल इच्छा से सफलता हासिल की जा सकती है.

नोवल पढ़ने, मूवी में है इंट्रेस्ट

गोल्डन गर्ल ने पढ़ाई के साथ मूवी देखने, डांस और नोवल पढ़ने में अपनी हॉवी जाहिर की. आकांक्षा ने बताया कि पढ़ाई के साथ दूसरी एक्टिविटीज को भी समय देना चाहिए.

गायनिक बनना चाहती है आकांक्षा

आकांक्षा ने बताया कि वह गायनिक बनना चाहती हैं, जिसमें ऐसे महिलाओं की भी सेवा कर सकें जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं. खराब खान-पान के चलते बच्चे और महिलाएं कुपोषण का शिकार होते हैं. अगर उन्हें समय रहते पोषण मिले तो बड़ी समस्या से बचा जा सकता है.