सरकार के कई अहम योजनाओं में रुचि नहीं दिखा रहे प्राइवेट पार्टनर

प्रस्ताव के एक साल बाद भी अडानी गु्रप ने शुरू नहीं किया डिपो का निर्माण

पीपीपी मॉडल पर प्रधानमंत्री आवास के निर्माण को राजी नहीं हैं प्राइवेट बिल्डर

Meerut. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सेशन 2.0 के पहले बजट में एक बार फिर प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर जोर दिया है. इंफ्रास्ट्रक्चर बेस्ड महंगी और महत्वपूर्ण योजनाओं में पीपीपी मॉडल का जिक्र सरकार करती आई हैं. यह मॉडल धरातल पर कितना कारगर है. इसकी हकीकत को दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने टटोला. दरअसल, पीपीपी मॉडल पर पूर्व में संचालित कुछ स्कीमों की स्थिति को खंगाला तो निकलकर आया कि मेरठ में पीपीपी को सफलता नहीं मिल सकी है. अडानी गु्रप लॉजिस्टिक कारीडोर और ड्राई पो‌र्ट्स से हाथ खींच चुका है तो कूड़ा कलेक्शन में लगी एटूजेड कंपनी का हश्र सभी को मालूम है.

प्लान नंबर 1

नहीं बना लॉजिस्टक कॉरीडोर

गौरतलब है कि गत वर्ष फरवरी में अडानी गु्रप की एक टीम ने मेरठ का दौरा किया. ग्रुप के अधिकारियों ने मंशा जाहिर की कि वे मेरठ में लॉजिस्टिक कॉरीडोर और ड्राई पोटर््स खोलना चाह रहे हैं. मेरठ विकास प्राधिकरण ने शताब्दीनगर में टीम का दौरा कराया और तत्कालीन उपाध्यक्ष साहब सिंह और गु्रप के बीच प्रोजेक्ट को लेकर लंबे समय तक पत्राचार चला. कंपनी पीपीपी मॉडल पर लॉजिस्टिक कॉरीडोर का निर्माण करना चाह रही थी. बता दें कि गत वर्ष यूपी इंवेस्टर्स समिट में विभिन्न औद्योगिक गु्रप के साथ-साथ अडानी गु्रप ने मेरठ में इंवेस्टमेंट की इच्छा जाहिर की थी. कड़ी कवायद के बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर सकी. प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजेश कुमार पाण्डेय ने बताया कि फिलहाल प्रोजेक्ट को लेकर कोई अपडेट नहीं है और न ही अडानी ग्रुप की ओर से इस संबंध अग्रिम कार्यवाही की गई.

प्लान नंबर- 2

नहीं मिल रहे बिल्डर्स

मेरठ में प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण प्राधिकरण पीपीपी मॉडल पर करना चाह रहा है. इस संबंध में प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजेश कुमार पाण्डेय की कई चरण में प्राधिकरण के रियल एस्टेट कारोबारियों से वार्ता हो चुकी है. किंतु कोई भी विकासकर्ता अभी तक तैयार नहीं हुआ है. वहीं दूसरी ओर शासन की ओर से पीएम आवासों का निर्माण पीपीपी मॉडल पर कराने को लेकर दबाव दिया जा रहा है. मेरठ के रियल एस्टेट कारोबारी कमल ठाकुर ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास की प्रपोज्ड लागत कम है जिसके चलते पीपीपी मॉडल पर आवासों का निर्माण संभव नहीं है. इस संबंध में एमडीए से बता चल रही है.

प्लान नंबर 3

अधर में 122 करोड़ का प्लांट

किला रोड पर गावड़ी में 122 करोड़ 26 लाख की लागत से पीपीपी मॉडल पर कूड़ा निस्तारण प्लांट तीन साल से अधर में है. इस प्लांट में कूड़े से बिजली, सीएनजी और कम्पोस्ट तीनों तैयार किए जाने की योजना निगम ने तैयार की थी, लेकिन अभी तक प्लांट को संभालने के लिए कोई कंपनी सामने नही आ रही है. इस प्रोजेक्ट के लिए गत वर्ष सोलापुर की कंपनी की ओर से तैयार 122 करोड़ 26 लाख के डीपीआर को उच्चाधिकार समिति से स्वीकृति के लिए शासन को भेजा गया था और मुख्य सचिव ने इसकी स्वीकृति का आदेश जारी कर दिया था. लेकिन बावजूद इसके यह प्लांट आज तक चालू नही हो सका है. अपर नगरायुक्त अमित सिंह का कहना है कि पीपीपी मॉडल के आधार पर गांवड़ी स्थित प्लांट को चालू किया जाना है लेकिन अभी प्रक्रिया में मुख्यालय स्तर पर कंपनियों का चयन बाकी है. जल्द प्लांट चालू होगा.

प्लान नंबर 4

भैंसाली डिपो बनेगा मॉडल बस डिपो

भैंसाली डिपो को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के मल्टीमॉडल परिवहन डिपो के तर्ज पर तैयार किया जाना है इसकी घोषणा परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव द्वारा भी की जा चुकी है. लेकिन इस प्रोजेक्ट में अभी जमीन की कमी आडे़ आ सकती है. पहले से ही रोडवेज के वर्कशॉप को रैपिड रेल स्टेशन के लिए शताब्दीनगर में शिफ्ट किया जा रहा है ऐसे में मॉडल बस डिपो की प्लानिंग में समय लग सकता है. हालांकि गत वर्ष ही भैंसाली डिपो के परिसर में करोड़ों रुपए की लागत से बदलाव किया गया है. आरएम नीरज सक्सेना का कहना है कि पीपीपी मॉडल बस अड्डा विकसित होगा लेकिन इसकी कार्ययोजना अभी मुख्यालय स्तर पर बनेगी उसमें समय लगेगा.

क्या है पीपीपी मॉडल

दरअसल, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानि पीपीपी के तहत सरकार निजी कंपनियों के साथ अपनी परियोजनाओं को पूरा करती है. देश के कई हाइवे इसी पीपीपी मॉडल के तहत ही बने हैं. इस करार के मुताबिक किसी जन सेवा या बुनियादी ढांचे के विकास के लिए धन की व्यवस्था की जाती है. इसमें सरकारी और निजी संस्थान मिलकर निर्धारित लक्ष्य पर कार्य करते हैं.