इंस्ट्रूमेंट न होने से होता है खेल
सैटर्डे दोपहर करीब 1.22 बजे सोनौली डिपो की बस संख्या यूपी-53एटी 5632 में नौतनवां से गोरखपुर के लिए करीब चार क्विंटल विदेशी सुपारी लोड की गई थी. कंडक्टर और ड्राइवर ने सुपारी की बुकिंग किए बिना ही माल को नौतनवां से गोरखपुर पहुंचा दिया. यह तो एक गाड़ी की कहानी है, इसके अलावा देवरिया, गोरखपुर और राप्तीनगर डिपो की बसों से भी कंडक्टर और ड्राइवर भारी मात्रा में कानपुर से मावा गोरखपुर ला रहे हैं. हैरत की बात यह है कि इन्हें गुड्स में न बुक करके साधारण बुकिंग में लाया जाता है. ज्यादातर कंडक्टर तो 4-5 क्विंटल के माल को सीधे एक क्विंटल ही दिखाते हैं. माल की बुकिंग के लिए रोडवेज के पास कोई ऐसा इंस्ट्रूमेंट नहीं है कि वह बस में लगेज की माप-तौल कर सके. ऐसी कंडीशन में अनुमान से माल की बुकिंग कर उस पर मनमाना चार्ज वसूलते हैं.

नहीं होती चेकिंग, लगाया जाता है चूना
बताया जा रहा है कि माल चाहे कानपुर से आ रहा हो या फिर नौतनवा से रोडवेज का चेकिंग दल किसी की भी चेकिंग नहीं करता है. सोर्सेज की माने तो चेकिंग दल अगर चेकिंग कर रहा होता तो शायद कुछ दिन पहले जिला प्रशासन रोडवेज से उतर रहे मावा को जब्त नहीं करता. इस संदर्भ में रोडवेज के चेकिंग दल की माने तो चेकिंग की जाती है लेकिन बस्ती एआरएम स्वॉयड की तरफ से नाइट चेकिंग के नाम पर वसूली की जाती है जिसके चलते कंडक्टर और ड्राइवर भी उनकी शह पर रोडवेज को चूना लगाने में लगे हैं.

चेकिंग दल अगर अपना काम नहीं कर रही है तो इसकी मॉनिटरिंग की जाएगी. जो भी वसूली में लिप्त पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
अतुल जैन, आरएम गोरखपुर रीजन

 

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