- सीटे कम करने से पहले एमसीआई ने केजीएमयू को भेजा था लेटर

- सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

<- सीटे कम करने से पहले एमसीआई ने केजीएमयू को भेजा था लेटर

- सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

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LUCKNOW: एक लेटर के कारण ही केजीएमयू में एमबीबीएस की म्भ् सीटें कम होने की नौबत आई. इस कारण अब सुप्रीम कोर्ट में केजीएमयू और एमसीआई आमने सामने हैं. इस चिट्ठी की जानकारी मिलने पर उसे इसे ढूंढ़ने के लिए केजीएमयू में शनिवार को दिनभर हड़कम्प मचा रहा. वीसी ऑफिस से लेकर रजिस्ट्रार के दफ्तर तक लेटर को तलाशा गया, लेकिन चिट्ठी नहीं मिली.

क्या था चिट्ठी में?

दरअसल, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने ब् जुलाई को लेटर भेजकर केजीएमयू प्रशासन से क्क् बिंदुओं पर जवाब मांगा था. एमसीआई ने इसके लिए केजीएमयू को 7 जुलाई को अपना पक्ष रखने को कहा गया था. लेकिन, तय समय पर केजीएमयू का कोई प्रतिनिधि एमसीआई के समक्ष हाजिर नहीं हुआ. इस कारण एमसीआई की बैठक में केजीएमयू की म्भ् सीटें कम करने पर मुहर लग गई. इसकी जानकारी केजीएमयू प्रशासन को सीटें कम होने के बाद मिली. इसके बाद केजीएमयू ने एमसीआई पर फैसला लेने से पहले कोई जानकारी न देने का आरोप लगाया और लखनऊ हाईकोर्ट में केस दायर किया. जहां से लखनऊ हाईकोर्ट ने सभी सीटों पर प्रवेश का आदेश दे दिया. सीटों पर स्टे लगाने के बाद एमसीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. सुप्रीम कोर्ट में एमसीआई ने जो एनेक्जर लगाया है उसके मुताबिक कि केजीएमयू को अपनी कमियों पर जवाब देने का पूरा मौका दिया गया. लेकिन केजीएमयू का कोई प्रतिनिधि तय समय पर नहीं पहुंचा. जिसके कारण एमसीआई की बैठक में केजीएमयू की म्भ् सीटों पर इस बार प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई.

केजीएमयू से भ् की टीम रवाना

केजीएमयू प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में हियरिंग के चलते अपनी भ् सदस्यीय टीम को रवाना कर दिया है. ताकि अपना पक्ष मजबूती से रखा जा सके. केजीएमयू ने न्यूरोलॉजी के एचओडी डॉ. आरके गर्ग, डीन डॉ. राज मल्होत्रा सहित भ् अधिकारियों की टीम को दिल्ली भेजा है.

कमी मिली तो होंगे जिम्मेदार

उधर, केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत ने सभी विभागों, सभी सेल, ट्रॉमा व कमेटियों को पत्र लिखकर सभी कमियों को दूर करने का आदेश दिया है. इसके लिए इन सभी विभागों या दो स्टाफ को इसकी जिम्मेदारी के लिए नामिनेट कर दिया गया है. अगर कोई कमी मिली तो उसके लिए ये जिम्मेदार होंगे. केजीएमयू प्रशासन पूरी तैयारी में ताकि एमसीआई ने अगर दुबारा इंस्पेक्शन किया तो उसे कोई कमी न मिले.