JAMSHEDPUR: प्रदेश के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने नेशनल हाइवे अथारिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआइ) से रांची-टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 33) के फोरलेन निर्माण की डिजाइन मांगी है. लोगों को आरोप है कि कार्यदाई संस्था आयरन ट्रायंगल एनएच 33 के किनारे बनाये जा रहे नालों में का निर्माण दो दर्जे के सामान से किया जा रहा है. जिसके चलते शनिवार को खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने नाला निर्माण का निरीक्षण कर प्रभारी अभियंता से फोन पर बात कर डिजाइन की मांग की. निरीक्षण के बाद मंत्री सरयू राय ने बताया कि निरीक्षण में नाला निर्माण कार्य में लगने वाले लोहे की छड़ों की मोटाई अपेक्षा से कम है. जाली बनाने की बजाए एक छड़ पर ही ढलाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि नाली के तल में और ऊपर की जा रही ढलाई की मोटाई भी कम है. मंत्री ने बताया कि निरीक्षण में स्थानीय निवासियों की शिकायत सही पाई गई. इसकी डिजाइन को मंगाने के बाद ही इसके निर्माण की खामियों की जानकारी हो सकेगी. फिलहाल मंत्री के आदेश के बाद काम रोक दिया गया है.

तो सुधारनी होगी नाले की डिजाइन

नाली का डिजाइन बनाते समय छड़ों की मोटाई तथा ढलाई की मोटाई कितनी रखी गयी है. इसकी जानकारी नहीं होने के कारण यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल है कि ठेकेदार द्वारा किया जा रहा काम कितना सही है और कितना गलत है. उन्होंने स्थल से ही एनएचएआई के प्रभारी अभियंता से दूरभाष पर बात किया और कहा कि इसकी डिजाइन दें. यदि ठेकेदार का काम डिजाइन के अनुसार हो रहा है और इस काम से नाली की मजबूती पर्याप्त नहीं होगी तो एनएचएआई को डिजाइन में सुधार कराना होगा.

नाले से गुजरेंगे भारी व्यवसायिक वाहन

एनएच 33 बन जाने के बाद उसपर भारी वाहनों का आवागमन होगा. सड़क के किनारे गैराज एवं अन्य आर्थिक एवं आवासीय गतिविधियां शुरू होंगी. इसके कारण नाली के ऊपर से भारी वाहन गुजरेंगे. यदि नाली की मजबूती पर्याप्त नहीं होगी तो उसके टूटने का खतरा रहेगा. इसलिए जरूरी है कि यदि डिजाइन में कमी है तो एनएचएआई इसे दूरुस्त करे. अगर ठेकेदार का काम डिजाईन के अनुरूप नहीं है तो उसे काम में सुधार लाने का निर्देश दिया जाए. जनता यही चाहती है कि सड़क और सड़क के दोनों किनारे की नालियां काफी मजबूत हों. ताकि दलमा पहाड़ से बरसात के दिनों में आने वाली पानी के प्रवाह को झेल सकें.