निजी एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी एयर फेयर के निर्धारण में तो थी ही, अब ये पैसेंजर्स के साथ मिसबिहेव पर भी उतर आई हैं. यह ना तो पैसेंजर्स के लिए नई बात है और ना ही एयरपोर्ट प्रशासन के लिए. बात जब कॉमनमैन की होती है, तो सीआईएसएफ के जवान उलटे अपनी धौंस दिखाकर मामले को रफा-दफा कर देते हैं. आखिरकार इन जवानों से कौन जेंटलमैन पंगा लेना चाहेगा. पर, यह मामला थोड़ा वीआईपी है. हालांकि मिसबिहेव तो कॉमन मैन समझ कर ही किया गया था, पर गलती से वे जज साहब निकल गए. वह भी पटना हाईकोर्ट के.

'ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे'
बुधवार की शाम 5.50 बजे इंडिगो की फ्लाइट पटना एयरपोर्ट पर लैंड करती है. पैसेंजर्स फ्लाइट से बाहर निकल रहे थे. इसी बीच, जज साहब के साथ इंडिगो के ऑपरेशनल स्टाफ हॉट टॉक शुरू कर देता है. यहां तक तो बात ठीक थी, पर जब उस स्टाफ ने अपशब्द का सहारा लेना शुरू किया, तब जज साहब बिफर पड़े. पैसेंजर्स लांज में ही धरने पर बैठ गए. अपने रजिस्ट्रार का फोन लगाया. कहा-स्टेट पुलिस को इनफॉर्म करो. ये लोग ऐसे नहीं मानेंगे. जब इंडिगो के ऑपरेशनल स्टाफ्स को इसकी भनक मिली, तो उनके हाथ-पांव ही फूल गए. इंडिगो एयरलाइंस के स्टाफ्स के माफीनामे का खेल शुरू हुआ, लेकिन बात जुबान से निकलने के बाद तो वापस नहीं लौटती. स्टेट पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, तब तक सीआईएसएफ के कमांडेंट भी पहुंच चुके थे. सबने जज साहब को संयुक्त रूप से आश्वासन दिलाया कि  इंडिगो के उक्त दोषी स्टाफ्स को दंडित किया जाएगा. जाते-जाते जज साहब ने अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह स्टाफ सुबह तक सलाखों के पीछे होना चाहिए.

कमांडेंट से डायरेक्टर तक मौन
इस इश्यू पर जब कमांडेंट और एयरपोर्ट डायरेक्टर से बात करने की कोशिश की गई, तो दोनों ने मौन रहना ही उचित समझा. कमांडेंट ने तो पूरा इश्यू सुन लेने के बाद बात करने से भी इनकार कर दिया. वहीं, एयरपोर्ट के डायरेक्टर अरविंद दूबे के फोन पर लगातार रिंग जाता रहा, पर उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया.