आगरा. जिला पंचायत अध्यक्ष के तख्ता पलट के लिए विरोधी खेमा एक महीने से ज्यादा समय से जुटा था. इसके बाद भी सदस्यों की संख्या 24 पार नहीं कर पा रही थी. वहीं जब शक्ति प्रदर्शन का नंबर आया तो ये घटकर 23 रह गई. अहम भूमिका निभा रहे दिग्गज जानते थे कि अविश्वास गिर जाएगा तो मुश्किल होगी. इसलिए बैठक में एक ही खेमे के सदस्य आपस में भिड़कर माहौल बिगाड़ते में जुट गए. वहीं, कह दिया कि अध्यक्ष के पक्ष के लोग माहौल बिगाड़ने आ गए थे.

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पंचायत सभागार में पहुंचते ही नाटकीय अंदाज में सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. वे अपशब्द बोलने लगे और कुर्सियों को पटकने लगे. पीछे के कुछ सदस्यों ने कुर्सियां तोड़ना शुरू किया तो आगे तक जोश आ गया. अधिकारियों को जब तक कुछ समझा आता तो हंगामा बढ़ गया. बैठक के अध्यक्ष उठकर दूसरे कमरे में चले गए. पुलिस ने अंदर घुस रोकने का प्रयास किया. हंगामा नियोजित सा लग रहा था. अध्यक्ष की कुर्सी पलट दी गई और आधा दर्जन से अधिक प्लास्टिक की कुर्सियां जोड़ दी गई. बैठक अध्यक्ष सिविल जज शैलेंद्र कुमार वर्मा गाड़ी में बैठ रवाना हुए तो मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने मिलकर मीडिया के पहुंचने से पहले टूटी कुर्सियों को कार्यालय परिसर के पिछले हिस्से में फिंकवा दिया. कमरा व्यवस्थित करवा दिया गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं. स्थगन आदेश चस्पा होने के साथ ही सदस्य भी रवाना हो गए थे.

नहीं पहुंचे अध्यक्ष के खेमे के सदस्य

अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल खुद को मजबूत होने का शुरू से दावा कर रहे थे. पंचायत में कुल 51 सदस्य हैं, जबकि विरोधी पक्ष के साथ सिर्फ 23 ही अविश्वास प्रस्ताव की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे थे. 28 सदस्य अध्यक्ष अपने पक्ष में होने का दावा कर रहे हैं. सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष ने अपने खेमे के सदस्यों को गोपनीय स्थान पर ठहरा रखा है.

बाउंसर आए थे बस के साथ

अविश्वास प्रस्ताव लाने वाला खेमा अपने सदस्यों को लग्जरी बस में लाया था. इसमें दर्जनभर बाउंसर भी थे. जब तक सदस्य अंदर रहे ये और अन्य समर्थक बाहर नारेबाजी करते रहे.

माननीय के विरुद्ध कई बार लगे नारे

अध्यक्ष को कायम रखने में सहयोग कर रहे माननीय और पुलिस प्रशासन के विरुद्ध कई बार हाय-हाय के नारे लगे. कुछ सदस्य तो सिर्फ उक्त माननीय के विरुद्ध ही नारे लगाते रहे.

न्यायालय का निर्णय भी रहा चर्चा में

अविश्वास प्रस्ताव की बैठक से पहले नौ जुलाई को उच्च न्यायालय का एक निर्णय इसी प्रकरण पर आया था. अध्यक्ष प्रबल प्रताप सिंह उर्फ राकेश बघेल सहित आठ ने न्यायालय की शरण लेकर प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किए थे. न्यायालय ने बैठक तो कराने की अनुमति दी थी, लेकिन उसका परिणाम अग्रिम आदेशों तक प्रभावी नहीं होने की बात कही थी.

पूर्व अध्यक्ष के पति लेकर घूमते रहे अधिनियम की किताब

सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही सपा की कुशल यादव से भाजपाइयों ने कुर्सी छीन ली थी. उनके पति राजपाल यादव भी तख्त पलट में अहम भूमिका निभा रहे हैं. वे जिला पंचायत अधिनियम की किताब लेकर पूर समय मौजूद रहे. अधिकारियों को नियमों का हवाला देते रहे.