बरेली मामले पर सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक छिड़ी है बहस

प्यार पर तकरार का मुद्दा बहुत पुराना है. कानून ने भी 18 वर्ष के बाद लड़का-लड़की को अपनी मर्जी से अपना लाइफ पार्टनर चुनने की आजादी दी है. पर कोई बेटी जब परिवार की इज्जत की परवाह किए बगैर किसी लड़के के साथ चली जाती है, और फिर अपने पिता को ही अपनी जान का दुश्मन बताती है तो फिर, सवाल उठना लाजमी है कि क्या प्यार ही सब कुछ है, पिता कुछ नहीं?

बरेली के विधायक पप्पू मिश्रा का राजनैतिक कॅरियर चाहे जो हो, उनकी पहुंच चाहे जितनी भी हो, लेकिन हैं तो वे भी एक बेटी के पिता ही. बरेली के विधायक पप्पू मिश्रा की बेटी साक्षी द्वारा दलित समुदाय के लड़के से शादी करने का मामला तूल पकड़ने के बाद सोशल साइट से लेकर न्यूज चैनल और सड़क पर भी इस मुद्दे की जबर्दस्त चर्चा है. अपनी पसंद के अनुसार शादी करने की कानूनी आजादी को सही बताने के साथ ही लोग अब एक पिता की भावना की कद्र करने की भी बात कर रहे हैं. बरेली विधायक पप्पू मिश्रा के समर्थन में लोग सोशल साइट पर आवाज उठा रहे हैं.

ट्वीटर पर रख रहे हैं अपनी बात

कड़वा सच ये भी है कि घर से बेटी भाग जाए तो परिवार मजाक का पात्र बन जाता है. विधायक पप्पू भरतौल को मैं नहीं जानता, लेकिन यूं ही मन में सवाल उठता है कि अगर हमारी बेटी होती, वो ऐसा वीडियो पोस्ट करती तो हमारा हाल क्या होता? क्या प्यार ही सब कुछ है, पिता कुछ नहीं.

नवल कांत सिन्हा

माना कि ये बालिग हैं. इनकी आजादी का पूरा सम्मान है. पर एक बाप बेचारा करे भी तो क्या करे, जिसके कलेजे का टुकड़ा, उसकी बेटी अचानक गायब हो जाए, बिना बताए शादी भी कर ले, वही बाप जिसने खुद गीले बिछौने पर सोकर इनको सूखे पर सुलाया. वहीं जिसने इनकी छोटी खुशी के लिए अपनी नींद चैन खोई.

शलभमणि त्रिपाठी

भाजपा नेता

कोई किसी से भी प्रेम करे, विवाह करे, उसका स्वतंत्र निर्णय है. उसे आजादी है. किंतु इसे अर्जित करने के लिए अपने जनक को लोक के सामने अपमानित करने की कवायद, गलत है. जीवन साथी चुनिये, किंतु एक पिता को इस तरह सर-ए-आम बेइज्जत करना उचित नहीं.

मालिनी अवस्थी

प्रसिद्ध गायिका

प्रगतिवाद, विकासमुखता और मिथ्या बड़प्पन की नकल वृत्ति हमें शुभ्र, शाश्वत और सर्वश्रेष्ठ पथ से विरत कर रही है. प्यार करना और उसे हासिल करना अपराध नहीं है. लेकिन प्यार के लिए अपने माता-पिता का अपमान, समाज का बहिष्कार उचित नहीं.

केशव कृपाल महाराज

कथा वाचक

साक्षी मिश्रा से शादी करने से पहले अजितेश ने किसी और लड़की से सगाई की थी, लेकिन अनबन होने पर शादी नहीं हो पाई. साक्षी मिश्रा ने अपने पिता से जान का खतरा बताया है. शायद, साक्षी भूल गई, जब उसको बचपन में बुखार और छींक भी आती रही होगी तो उसके माता-पिता पूरी रात करवट बदल कर जागते हुए उसकी देखभाल करते रहे होंगे.

हसीब अहमद

आईनेक्स्ट ने किया सवाल तो लोगों ने निकाली भड़ास

ये बहुत बुरा किया है साक्षी ने अपने पिता के मुंह पर कालिख पोत दी. मैं तो बस यही कहना चाहूंगा कि अगर पिता की पगड़ी सरे बाजार उछाल कर मोहब्बत होती है तो मैं थूकता हूं, ऐसी मोहब्बत पर.

विनीत मोहन लाल सक्सेना

साक्षी जैसी बेटियों की वजह से हजारों बेटियों पर पाबंदी की जाती है. क्योंकि हर मां-बाप यही चाहते हैं कि उनकी इज्जत सरे राह निलाम न हो.

शशांक पांडेय

कोई भी लड़की हो, लेकिन उसे इस तरह अपने ही घर वालों से खतरा है, बिल्कुल नहीं कहना चाहिए. ये उसने बहुत गलत किया है.

रोहित मिश्रा अंकित

साक्षी ने जो कदम उठाया, उसे सही नहीं कहा जा सकता है. लेकिन अगर उसे प्रेम विवाह करने की आजादी होती, अगर उसे यकीन होता कि उस के रिश्ते को फैमिली स्वीकार कर लेगी तो साक्षी ऐसा कदम कभी न उठाती.

ऋषि समीर