दूसरा केस : शिशुपाल शर्मा रोजगार डिपार्टमेंट के क्षेत्रीय सेवा समसपुर सहारनपुर मंडल में सहायक निदेशक हैं. 20 दिसंबर को वह अपनी बहन के घर गए हुए थे.विकास भवन में किसी अधिकारी से मिलने के बाद वह पैदल मोबाइल पर बात करते हुए जा रहे थे कि तभी पीछे से दो बाइक सवार आए और उनके हाथ से उनका महंगा स्मार्टफोन स्नैच कर लिया. अगर आपको अपने स्मार्टफोन पर टहल-टहल कर बात करने की आदत है तो अलर्ट हो जाइए. दरअसल सिटी में मोबाइल स्नैचर्स का गैंग एक्टिव हो गया है.ऊपर के दो केसेस बताते हैं कि सिटी में मोबाइल स्नैचर्स किस तरह से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं. चेन स्नैचिंग की तर्ज पर हो रही मोबाइल स्नैचिंग में भी स्नैचर्स बाइक के जरिए ही पलक झपकते ही मोबाइल छीन ले जाते हैं. इनका टार्गेट मंहगे स्मार्टफोन यूजर ही बन रहे हैं. रोड पर बात करते जा रहे ऐसे लोगों को ट्रैक करके ये उनका मोबाइल छीन फरार हो जाते हैं. पुलिस भी सिटी में आए इस नए क्राइम से खासा परेशान है. उन्हें ऐसे केसेस में एफआईआर जो दर्ज करनी पड़ रही है.

चैन स्नैचर ने छीना था 'चैन'
कुछ महीने पहले बरेली में चेन स्नैचर्स के गैंग ने दहशत मचा रखी थी. मार्केट से लेकर गली मोहल्ले तक में ये स्नैचर्स पलक झपकते ही चेन छीनकर फरार हो जाते थे. ज्यादातर स्नैचर पैदल या रिक्शे पर जाने वाली महिलाओं को ही टारगेट करते थे. कई बार बाइक पर पीछे बैठकर जा रही लेडीज को भी अपना निशाना बना लेते थे. इसके चलते कई महिलाएं गिरने से घायल भी हुई थीं. इस सब को देखते हुए पुलिस ने स्पेशली स्नैचर्स के खिलाफ ऑपरेशन चलाया. सादी वर्दी में महिला लेडी कांस्टेबल्स को चेन पहनकर घुमाया. कुछ गैंग पकड़े जाने के बाद सिटी में चैन स्नैचिंग बंद हो गई थी.

पलक झपकते गायब मोबाइल
पुलिस के एफट्र्स से चैन स्नैचिंग के इंसीडेंट तो रुक गए. लेकिन अब सिटी में एक और स्नैचिंग गैंग एक्टिव हो गया है और वह है मोबाइल स्नैचर्स. इस गैंग के निशाने पर मंहगे स्मार्टफोंस हैं. फोन पर बात करते हुए पैदल चल रहे लोगों को ये टार्गेट करते हैं और पलक झपकते ही उनका फोन छीन फरार हो जाते हैं. जब तक वह पर्सन कुछ समझ पाता है तब तक उसका मोबाइल फुर्र हो चुका होता है. ये स्नैचर्स बाइक पर ही अपने काम को अंजाम देते हैं.

पहचान लेते हैं Mobile
आजकल हर कोई स्टेटस मेंटेन करने के लिए स्मार्टफोन रखता है. एक से एक फीचर्स से लैस ये स्मार्टफोन काफी कॉस्टली होते हैं, इसलिए स्नैचर्स ने इन्हीं मोबाइल्स को छीनना शुरू कर दिया है. स्नैचर बात करते जा रहे लोगों पर नजर रखते हैं. दूर से ही पहचान लेते हैं कि उस पर्सन के पास कौन सा फोन है. टेबलेट और आईफोन तो दूर से ही रिकॉगनाइज कर लिए जाते हैं. वहीं कुछ फोंस के फेमस लुक से भी वह ईजिली नजर में आ जाते हैं और स्नैचर्स उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं.

Main Road पर ज्यादा वारदातें
पिछले दिनों घटनाओं में सबसे खास बात यह है कि स्नैचर्स ने मेन रोड पर वारदात को अंजाम दिया है. इसके पीछे की वजह उन्हें भागने में आसानी हो सकती है. मेन रोड पर बाइक तेजी से भागती है. उसके बाद वह मौका पाकर गलियों में गुम हो जाते हैं. दो दिन पहले कोतवाली में ही एक स्टूडेंट को मोबाइल छीनने के आरोप में पकड़कर लाया गया था .

ठंड का उठा रहे फायदा
मोबाइल छीनने के बाद स्नैचर्स को कोई पकड़ न सके इसलिए उन्होंने शाम का वक्त चुना है. सर्दियों में शाम के समय अंधेरा ज्यादा रहता है. कोहरे की वजह से बाइक का नंबर व बाइक सवार भी पहचानना मुश्किल होता है. इसके अलावा ठंड में ज्यादातर लोग जैकेट व वूलेन कैप लगाकर रखते हैं, जिससे चेहरा नहीं दिखता.

Youngsters बन रहे criminals

अभी तक के केसेस से साफ हो गया है कि मोबाइल स्नैचिंग की वारदातों को यंगस्टर्स ही अंजाम दे रहे हैं. सिटी में यंगस्टर्स ज्यादातर क्राइम में शामिल पाए जा रहे हैं. पिछले एक माह में चोरी की वारदातों में पकड़े गए गैंग में 20 से ज्यादा चोर कम उम्र के ही हैं. इसमें से कुछ पढ़े लिखे और कुछ अनपढ़ हैं. सुभाषनगर में एक स्टूडेंट भी बाइक चोरी में पकड़ा गया था. कुछ यंगस्टर्स अपने शौक पूरे करने तो कुछ मजबूरी में वारदातों को अंजाम दे रहे हैं.

Police के लिए सिरदर्द
एक नए तरह का क्राइम स्टार्ट होने से पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं. मोबाइल स्नैचिंग की वारदातें उनके लिए सिरदर्द बन रही हैं क्योंकि उन्हें इसकी एफआईआर भी दर्ज करनी पड़ रही है. इससे उनका क्राइम ग्राफ बढ़ता जा रहा है. इससे पहले सिर्फ मोबाइल चोरी की वारदातें होती थीं. इन केसेस को पुलिस सिर्फ एक एप्लीकेशन पर मोहर लगाकर ही निपटा देती थी, इसमें वह सिर्फ सिम खोना ही लिखवाती थी. यही नहीं इसका रिकॉर्ड भी उन्हें नहीं रखना पड़ता था. यही नहीं स्नैचिंग की वारदातों में पुलिस को मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाना पड़ता है, जबकि सर्विलांस पर पहले ही कई बड़े केसेस की कॉल डिटेल निकालने का लोड है.