शो का नाम : स्पेशल ऑप्स

कलाकार : के के मेनन, विनय पाठक, दिव्या दत्ता, करण टैकर, गौतमी कपूर, परमीत शेट्टी

शो क्रिएटर : नीरज पांडे

निर्देशक : शिवम् नायर

चैनल : हॉट स्टार

रेटिंग : तीन स्टार

रिलीज : 17 मार्च

Special Ops Review : कोरोना का कहर जारी है। पूरे भारत में फिल्में प्रदर्शित नहीं हो रही हैं। ऐसे में आपका अधिक समय परिवार के साथ घर पर ही बीत रहा है। मनोरंजन के साधन के रूप में वेब वर्ल्ड ने आपके लिविंग रूम में जगह हथिया ही ली है। सो, फिल्मों के प्रदर्शन के अभाव में हम आपके लिए एक ऐसे शो का रिव्यू लेकर आये हैं, जो फिलवक्त आप जरूर देख सकते हैं।

क्या है कहानी

देश में नोट्बंदी का ऐलान हुआ है और कैमरा सीधा ऑफिसर हिम्मत सिंह पर फोकस करता है। कहानी हिम्मत सिंह की बहादुरी के इर्द- गिर्द घूमती है। रिसर्च एंड अनालिसिस विंग का ऑफिसर है हिम्मत। अच्छा ऑफिसर है। काबिल है और निडर भी लेकिन उसके ऊपर जरूरत से ज्यादा खर्च करने का आरोप है। वह कराची से जो लौट कर आया है। जैसा कि रियल लाइफ के ऑफिसर्स के साथ भी होता है, अपने काम में एक्स्ट्रा टैलेंटेड कमेटी का सामना करना ही पड़ता है। कमेटी के सामने जैसे- जैसे हिम्मत अपने सारे मिशन के बारे में बताता जाता है, कहानी नया मोड़ लेती जाती है। नए किरदार जुड़ते जाते हैं और कहानी की नयी परत खुलती जाती है। इस क्रम में हिम्मत सिंह को हुए आतंकी हमले में अब भी एक शक्स की तलाश है, जिसे वह नहीं ढूंढ पाया है।इस काम में उसे 14 साल के वनवास से भी अधिक समय लग चुका है लेकिन उसने हार नहीं मानी है तो किस तरह हिम्मत अपने मकसद और मिशन को पूरा करता है। किस तरह हर एपिसोड में नए तार जुड़ते जाते हैं। शो में इसे दिलचस्प रूप से पूरे रिसर्च के साथ गढ़ा गया है। कहानी की खूबी है कि कई दृश्यों को बहुत ही बारीकी से वास्तविक घटना के आधार पर रूपान्तर रूप दिया गया है। हिम्मत सिंह के किरदार को देखते हुए आपको कभी- कभी राष्ट्रीय सलाहकार अजीत डोभाल की छवि भी नजर आ जाएगी। यह देखना शो में दिलचस्प है। अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें नया क्या है। आतंकवाद के मुद्दे पर अबतक ऐसे कई शोज पहले भी आये हैं तो फिर इसमें नया क्या है तो जवाब है शो का सुपर्ब ट्रीटमेंट। निर्देशन और आगे क्या होने वाला है। यह थ्रिल बनाये रखने का हुनर शो के एपिसोड दर एपिसोड देखते हुए भले ही आपको लगे कि क्लाइमेक्स लाजिमी है लेकिन आपको अंत में एक झटका लगेगा और वहीं शॉक करने में निर्देशक कामयाब रहे हैं।

क्या है अच्छा

कहानी का शानदार ट्रीटमेंट और कलाकारों का अभिनय। आतंकवाद का स्टीरियो टाॅपिक होने के बावजूद दिलचस्प ट्विस्ट एंड टर्न । एक्शन भी लाजवाब तरीके से शूट किये गये हैं। लोकेशन कहानी के मन मुताबिक हैं।

क्या है बुरा

कहीं- कहीं शो द फैमिली मैन, बेबी और अ वेडनेसडे से इंस्पायर लगती है। कुछ दृश्य विदेशी फिल्मों से भी लिए गए हैं।

अभिनय

थैंक गॉड, के के मेनन अपने बने बनाये ढर्रे से वापस आये हैं। अच्छी बात है कि उनको आत्म ज्ञान हुआ है और वह इस बार फॉर्म में नजर आये हैं। अपने किरदार में जंचे हैं। लम्बे समय के बाद विनय पाठक ने ही छोटा लेकिन अहम किरदार निभाया है। करण टैकर को अभी टीवी मोड से बाहर आने की जरूरत है। दिव्या ने अपना बेस्ट दिया है। गौतमी कपूर और परमीत शेट्टी के लिए कुछ खास करने को नहीं था।

वर्डिक्ट : दर्शकों को लम्बे समय बाद एक दिलचस्प थ्रिलर देखने को मिलेगी।

Reviewed By : Anu Verma

Posted By: Vandana Sharma

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