- बीएस-3 और 4 वाहनों की उलझन से बिगड़ती रहेगी शहर की हवा

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LUCKNOW(19 Sept):

प्रदूषण जांच केंद्र पर वाहन मालिकों और वाहनों की जांच करने वालों के बीच नोंक-झोंक हो रही है. जिनका पीयूसी (पाल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट) एक साल के लिए जारी होना चाहिए, उन्हें छह माह का पीयूसी दिया जा रहा है. वहीं जिनको छह माल का पीयूसी दिया जाना चाहिए, उन्हें इसकी वैधता एक साल तक मिल रही है. यह सब बीएस-3 और बीएस-4 वाहनों के चलते हो रहा है. प्रदूषण जांच केंद्र पर मौजूद लोगों का कहना है कि पीयूसी मशीन खुद जारी करती है, इसमें उनका कोई रोल नहीं है.

छह माह तक घोलेंगे हवा में जहर

विभागीय अधिकारियों के अनुसार यदि बीएस-3 में शामिल वाहन को एक साल का पीयूसी दे दिया जाता है तो इसके मालिक एक साल बाद ही वाहन के प्रदूषण की जांच कराएंगे. ऐसे वाहन छह माह तक हवा में जहर फैलाते रहेंगे और इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं की जा सकेगी.

होता था मैनुअल रजिस्ट्रेशन

परिवहन विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले वाहनों का डेटा ऑनलाइन नहीं था. ऐसे में लोग मैनुअल रजिस्ट्रेशन कराते रहे हैं. इसके चलते बीएस-4 के कई वाहन बीएस-3 में और बीएस-3 के वाहन बीएस-4 में रजिस्टर्ड हो गए हैं. इसी कारण जांच केंद्रों पर विवाद हो रहा है. 2017 के बाद आने वाले सभी वाहन बीएस-4 में शामिल हैं. इन वाहनों की पीयूसी एक साल के लिए जारी हो रही है.

कोट

वाहनों का डाटा तैयार कर जल्द उन्हें बीएस-3 और 4 के अनुरूप सॉफ्टवेयर में अपडेट किया जाएगा. जिससे यह दिक्कत दूर हो जाएगी.

वीके सिंह, अपर परिहवन आयुक्त

आईटी सेल, परिवहन विभाग

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सही कराएं रजिस्ट्रेशन

जो वाहन अप्रैल 2017 के बाद के हैं और उनका रजिस्ट्रेशन बीएस-3 में है, उन्हें बीएस-4 में शामिल कराने के लिए आरटीओ ऑफिस से संपर्क कर सकते हैं.

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इसे भी जानें

बीएस-3 : वाहनों को प्रदूषण सर्टिफिकेट 6 माह के लिए दिया जाता है.

बीएस-4: एक साल के लिए प्रदूषण सर्टिफिकेट दिया जाता है.

नोट- बीएस-3 वाहनों से निकलने वाले धुआं में विषैली गैसे बीएस-4 की तुलना में अधिक होती हैं.