-मेनटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति, पॉश इलाकों के वायर में जगह-जगह है जोड़

-खेमनीचक में बांस, बल्ली और जोड़ वाले वायर से हो रही बिजली सप्लाई

-बेहद कम ऊंचाई पर लगे ट्रांसफॉर्मर दे रहे हादसे को न्योता

patna@inext.co.ion

PATNA: बिजली में निजी भागीदारी के बावजूद राजधानी में जबरदस्त लापरवाही है. खेमनीचक ही नहीं, पटना के कई सघन पॉश इलाकों में हमेशा हादसे का डर बना रहता है. कारण है जर्जर वायर, लूज कनेक्शन और सेफ्टी के नियमों को ताक पर रखकर मेनटेनेंस. भले ही बिजली की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है, लेकिन सेफ्टी का इश्यू हाशिये पर चला गया है. यही वजह है कि मेनटेनेंस के दौरान कभी स्टाफ तो कभी आम कंज्यूमर की मौत करेंट लगने से हो रही है. आई नेक्स्ट ने कंकड़बाग डिवीजन अंतर्गत इलाकों और ईस्ट बोरिंग केनाल रोड में सेफ्टी को लेकर रियलिटी चेक किया, जिसमें स्थिति कहीं भी संतोषजनक नहीं दिखी. ईस्ट जोन के कंकड़बाग डिवीजन में खेमनीचक के अलावा रामनगर, पोस्टल पार्क, संजय नगर, बिग्रहपुर, पृथ्वीपुर, इंदिरा नगर, अशोक नगर और खास महल में जगह-जगह वायर को इंसुलेट कर काम चलाया जा रहा है.

कहां है आठ फीट की हाइट

इलेक्ट्रिक सेफ्टी पर गौर करें, तो सड़कों के किनारे लगे ट्रांसफॉर्मर की हाइट बॉटम से कम से कम आठ फीट ऊंची होनी चाहिए, लेकिन ईस्ट जोन के विभिन्न इलाकों रामनगर, पोस्टल पार्क, संजय नगर, बिग्रहपुर, पृथ्वीपुर, इंदिरा नगर, अशोक नगर और खास महल में ट्रांसफॉरमर की ऊंचाई चार फीट से ज्यादा नहीं है. पोस्टल पार्क के रामनगर स्थित रोड नंबर चार (फोटो में भी देख सकते हैं) में लगा ट्रांसफारमर बमुश्किल चार फीट भी नहीं है. इससे हाई वोल्टेज वायर रोड से एक फीट भी ऊंची नहीं है. यही स्थिति अन्य इलाकों में भी है.

हादसा और गैर जिम्मेवारी

26 मार्च को खेमनीचक में हाई वोल्टेज वायर गिरने से मासूम सहित तीन लोगों की मौत के बाद भी बिजली विभाग नहीं जागा है. हादसे से चंद मीटर दूर मंगल चौक पर एक ट्रांसफॉर्मर काफी दिनों से ईट पर रखा है. इसकी ऊंचाई बेहद कम है और यहां बड़े-बड़े घास उग आई है. आलम यह है कि बिजली विभाग के कर्मी रोज यहां से गुजरते हैं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दे पाते. कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है.

किसी ने नहीं की बात

आई नेक्स्ट ने इसमें जिम्मेवारी तय करने और जबाव-तलब करने के लिहाज से ईस्ट जोन के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर रंजीत कुमार से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन डिपार्टमेंट के अधिकारी खेमनीचक वाले हादसे के बाद चुप्पी साध चुके हैं.

डराते हैं लटकते वायर

बांकीपुर, ईस्ट बोरिंग कैनाल रोड, अशोक राजपथ, गोविंद मित्रा रोड, खेतान मार्केट, मुसल्लहपुर हाट आदि बेहद पॉश इलाके हैं, लेकिन यहां सड़क पर चलने से लोगों को डर लगता है. इन इलाकों में जर्जर वायर को नहीं बदला गया है. कई जगह वायर झूलते-लटकते पाये गए.

आखिर 31 मार्च कैसा डेडलाइन

जहां एक ओर एनर्जी सेक्रेटरी अमृत प्रत्यय ने कहा कि जहां भी मेनटेनेंस पूरा नहीं हुआ है वहां 31 मार्च तक पूरा कर लें, लेकिन आलम यह है कि अब तक ईस्ट जोन में ही बंच केबल लगाने, सेपरेटर, एबी स्विच और अंडरग्राउंड वायरिंग जैसे कई काम बाकी है.

संबंधित इलाके के जेई लें जिम्मा

बिहार राज्य नागरिक परिषद के महासचिव छोटू सिंह ने कहा कि खेमनीचक जैसी घटना पहले भी अन्य इलाकों में हो चुकी है, जो बेहद दुखद है, लेकिन बिजली विभाग के अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं. अधिकारी जिम्मेवारी तय करें और संबंधित इलाके के जेई को जिम्मेवार बनाकर सेफ्टी के लिए जरूरी काम दुरुस्त कर लें.

बांस-बल्ली और ढीले वायर डेंजर

खेमनीचक हादसा दर्दनाक है. मेरे सामने बमबम का दोनों पैर जल गया. ढीले और लटकते वायर की समस्या पहले से है. बावजूद बिजली कर्मी इसे ठीक करने का प्रयास नहीं करते. घटनास्थल से थोड़ा आगे मंगल चौक के पास एक अन्य ट्रांसफॉर्मर जलकर खाक हो गया. स्थानीय लोगों के बार-बार कहने के बाद ही यहां ट्रांसफॉर्मर लगाया गया. दरअसल, भीड़-भाड़ वाले रास्तों पर भी ट्रांसफॉर्मर बेहद नीचे है और वायर में कई जगह जोड़ है. कई इलाकों में बांस-बल्ली पर वायर जोड़ा गया है. इस कारण हमेशा हादसे का डर बना रहता है.

-सुरेंद्र सिंह, खेमनीचक हादसे में प्रत्यक्षदर्शी

जब तक मेनटेनेंस के नाम पर खानापूर्ति की जाती रहेगी, बिजली से होने वाले हादसे को रोकना बेहद मुश्किल होगा.

-राजकुमार सिंह, रामनगर रोड

इंदिरा भवन के सामने वाली इलेक्ट्रिक पोल से कुछ महीने पहले स्पार्क हुआ और हादसा होते-होते बचा. इसके बाद भी यहां जर्जर वायर को नहीं बदला गया. कब क्या हो जाए, कोई नहीं जानता.

-आलोक कुमार, ईस्ट बोरिंग केनाल रोड

बिजली बिल समय पर जमा करने के लिए प्रेशर बनाया जाता है, लेकिन बात सेफ्टी की हो तो डिपार्टमेंट में कोई नहीं सुनता है.

-विश्वजीत, बंगाली टोला

Official Stand

ख्म् मार्च को खेमनीचक में वायर गिरने के हादसे की जांच एक हाई लेबल कमेटी कर रही है. कारणों का पता चलेगा, साथ ही इसमें प्रभावितों को कंपनी नियम के मुताबिक मुआवजा दिया जाएगा.

-हरेराम पांडेय, पीआरओ, बिजली विभाग