कानपुर। नर्इ दिल्ली से पहले भारत की राजधानी कोलकाता हुआ करती थी लेकिन 1911 में दिल्ली शहर को भारत की राजधानी बनाने का एेलान हुआ था। दिल्ली शहर के भारत की राजधानी बनने का सफर काफी दिलचस्प है। एक आधिकारिक वेबसाइट ब्रिटानिका डाॅट काॅम के अनुसार 11 दिसंबर 1911 को राजधानी के रूप में भारत के तत्कालीन सम्राट जॉर्ज पंचम ने इसकी नींव रखी थी।

इन दो फेमस ब्रिटिश आर्किटेक्ट ने तैयार की थी नर्इ दिल्ली की वास्तुकला

वहीं नर्इ दिल्ली की वास्तुकला को दो फेमस ब्रिटिश आर्किटेक्ट सर हर्बर्ट बेकर और सर एडविन लुटियन ने तैयार किया था। इस दाैरान कोशिश थी कि इसे चार साल में तैयार कर लिया जाए लेकिन फिर इसमें काफी समय लग गया था। एेसे में भारत के वायसराय लॉर्ड इरविन ने आैपचारिक रूप से 13 फरवरी, 1931 को देश की नई राजधानी के रूप में नर्इ दिल्ली का उद्घाटन किया था।

इसलिए ब्रिटिश सरकार ने नर्इ दिल्ली को राजधानी बनाने का लिया था फैसला

कोलकाता की जगह नर्इ दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने की एक बड़ी वजह यह थी कि दिल्ली कई साम्राज्यों की वित्तीय और राजनीतिक केंद्र थी। दिल्ली सल्तनत के साथ-साथ यहां 1649-1857 तक मुगलों का शासन भी रहा। भारत में अंग्रेजों के आने के बाद काफी बदलाव हुए थे। 1900 के शुरुआती दौर में ब्रिटिश प्रशासन ने नर्इ दिल्ली को राजधानी का प्लान किया था।

दिसंबर 1911 में दिल्ली को राजधानी बनाने की आधारशिला रखी गर्इ थी

ब्रिटिश सरकार ने दिल्ली शहर को राजधानी बनाने के पीछे हवाला दिया था कि कोलकाता देश के पूर्वी तटीय भाग में आैर दिल्ली शहर उत्तरी भाग में है। इससे देश पर शासन करना आसान और अधिक सुविधाजनक होगा। एेसे में दिसंबर 1911 को  दिल्ली दरबार में एेलान किया गया कि बहुत जल्द दिल्ली शहर भारत की राजधानी होगा। इस दाैरान ही इसकी आधारशिला भी रखी गर्इ थी।

राजधानी नर्इ दिल्ली आज भारत के खूबसूरत शहरों में भी गिनी जाती है

इतिहासकारों की मानें तो प्रथम विश्व युद्ध के बाद इसका निर्माण कार्य शुरू हुआ और 1931 तक पूरा निर्माण समाप्त हो गया। राजधानी के कोलकाता से नर्इ दिल्ली स्थानांतरण में सरकारी काम में कोर्इ  परेशानी न हो इसका विशेष ध्यान भी रखा गया था। आज राजधानी नर्इ दिल्ली भारत के खूबसूरत शहरों में भी गिनी जाती है। इसके साथ ही नर्इ दिल्ली दिल वालों की नगरी कही जाती है।

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