- अक्टूबर 2016 के बाद यश भारती पुरस्कृत लोगों को नहीं मिलेगी पेंशन

- जिन्हें केंद्र व राज्य से मिल रही है पेंशन वे भी अब दायरे से बाहर

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LUCKNOW :

सपा सरकार में दिए जाने वाले प्रदेश के सर्वोच्च सम्मान यश भारती से सम्मानित लोगों की पेंशन योगी सरकार के आने बाद बंद कर दी गई थी. कलाकारों की अपील के बाद इसे दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है. नई पेंशन नियमावली 2018 के तहत अब सम्मानित लोगों को पेंशन दी जाएगी जो अब पचास हजार से घटाकर 25 हजार कर दी गई है. संस्कृति विभाग ने इस सम्मान के लिए आवेदन मांगे हैं. प्रदेश सरकार की नई पेंशन योजना के तहत लगभग 168 विभूतियों से 31 जुलाई तक विवरण मांगा गया है.

ये नहीं कर सकेंगे आवेदन

यश भारती सम्मान से जो अक्टूबर 2016 के बाद सम्मानित हुए हैं उनसे आवेदन नहीं मांगा गया है. वहीं इससे पहले के वर्षो में सम्मानित लोगों की आर्थिक स्थिति को जांच कर ही पेंशन दी जाएगी. वित्तीय वर्ष 2016-17 फरवरी तक 172 लोगों को यशभारती पेंशन दी जा रही थी. जिसमें 4 लोगों का निधन होने पर कुल 168 लोग पेंशन पा रहे थे. लेकिन वित्तीय वर्ष 2016-17 के अंत में यशभारती के लगभग 60 लोगों को पेंशन नहीं मिली थी, जिन्हें इस योजना में पेंशन देने का आदेश नहीं हुआ है.

नई पेशन नियमावली 2018 घोषित

11 लाख रुपये नकद पुरस्कार और 50 हजार रुपये मासिक पेंशन वाले यशभारती सम्मान से सम्मानित विभूतियों के लिए नई पेंशन नियमावली 2018 घोषित कर दी गई है. इसके तहत 50 हजार पेंशन की जगह अब इसको 25 हजार कर दिया गया है. नई नियमावली की शर्तो से आधे से भी ज्यादा यशभारती सम्मानित लोगों की पेंशन बंद हो जाएगी. अमिताभ बच्चन के परिवार और डॉ. नरेश त्रेहन जैसे कुछ नामों को छोड़ दिया जाए तो बाकी लगभग सभी लोग पेंशन प्राप्त कर रहे थे. वहीं मुंबई से लेकर देश के अन्य हिस्सों की विभूतियों तक को भी अब यह सम्मान मिलना आसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए जन्मभूमि या कर्मभूमि उत्तर प्रदेश ही होनी चाहिए.

सरकारी नौकरी वालों को नहीं मिलेगी पेंशन

सपा सरकार में शुरू हुई यशभारती सम्मान सेवा में कई ऐसे लोगों को सम्मानित किया गया जो सरकारी सेवा में थे, अब नई नई नियमावली में सरकारी सेवा या सरकारी पेंशन वालों को सम्मान का पात्र नहीं माना जायेगा. ऐसे में बहुत से सम्मानित लोगों की पेंशन बंद कर दी जाएगी. यशभारती सम्मान अब उन्हीं को मिलेगा जो सरकारी सेवा में न हों, सरकारी पेंशन न पा रहे हों और आयकरदाता भी न हों.

1994 में शुरू हुई थी योजना

प्रदेश की विभूतियों को विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट काम करने के लिए यशभारती सम्मान देने की घोषणा 1994 में तत्कालीन सपा सरकार में सीएम मुलायम सिंह यादव ने शुरू की थी. एक लाख रुपये से शुरू हुए पुरस्कार की राशि बाद में बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई थी. इसके बाद बसपा सरकार आने के बाद सीएम बनी मायावती ने इस योजना को पारिवारिक सम्मान बताकर बंद कर दिया था. वहीं 2012 में सपा सरकार बनने के बाद अखिलेश यादव ने इस सम्मान को फिर से शुरू किया और साथ ही इसकी धनराशि को बढ़ाकर 11 लाख रुपये कर दी थी.

जिसको चाहा दे दिया सम्मान

यशभारती सम्मान को लेकर समय समय पर विवाद होता रहा है, जिससे इस सम्मान की प्रतिष्ठा और मान पर सवाल उठता रहा है. विवादों में रहे यशभारती सम्मान समारोह 2016 में सम्मान के मानकों को दरकिनार कर एंकरिंग कर रही महिला को सम्मान दे दिया गया था. यहीं नहीं जिनका सामाजिक तौर पर कोई योगदान नहीं था उनको भी पुरुस्कृत किया गया था, जिसमें तत्कालीन मुख्य सचिव की पत्नी, सैफई के ग्राम प्रधान, मुलायम सिंह पर प्रशस्ति पुस्तक लिखने वाले और सपा दफ्तर में काम करने वालों को भी यशभारती सम्मान दे दिया गया था.