दिव्यांगों की दृष्टि से संवेदनहीन हैं शहर के मॉल

लिमिटेड ने ही सोचा दिव्यांगों की सुविधा के बारे में, ह्वीलचेयर से जाना नामुमकिन

PRAYAGRAJ: इरफान दिव्यांग हैं. वह सिटी के मॉल्स में शॉपिंग करने नहीं जाते. ऐसा क्यों? के जवाब में कहते हैं कि यहां हेल्पिंग हैंड नहीं मिलता. गिनती के मॉल हैं जहां रैंप बने हैं. बाकी जगह लिफ्ट का ऑप्शन ही उपलब्ध है. इसमें भी ह्वीलचेयर के साथ इंट्री नहीं है.

रैंप पर जवाब देने को तैयार नही

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर ने बुधवार को सिविल लाइंस के मॉल्स में दिव्यांगों के लिए फेसेलिटी का रियलिटी चेक किया. चार मॉल ऐसे मिले जहां दिव्यांगों के लिए रैंप तक नही मिला. सिटी कार्ट, एफबीबी, वन इंडिया, वी मार्ट और जालान्स में रैंप नहीं दिखा. इनके प्रबंधन से पूछने की कोशिश की गई तो उन्होंने बात करने से इंकार कर दिया. उनका कहना था कि वह इसके लिए अॅथराइज नही हैं. किसी भी मॉल में ह्वीलचेयर या वॉकर नहीं मिला. विनायक सिटी सेंटर और बिग बाजार में स्वचालित सीढि़यां और लिफ् नजर आई. बाकी मॉल में इसका दूर-दूर तक नामोनिशान नही था.

लिफ्ट ही है दिव्यांगों का सहारा

शहर के ज्यादातर मॉल में लिफ्ट लगी हैं. इनके जरिए पहली से दूसरी या तीसरी मंजिल तक पहुंचा जा सकता है. प्राब्लम यह है कि ह्वीलचेयर के साथ किसी भी फ्लोर पर मूव करना चैलेंजिंग है. किसी शॉप में इंट्री करना या फूडिंग के लिए रेस्टोरेंट में जाना एलॉऊ नहीं है. इसके चलते मॉल उनके लिए यूजलेस साबित होते हैं. अधिकतर समय यह लिफ्ट काम भी नही करती हैं. इसी तरह शहर के कई काम्प्लेक्स में भी रैंप नजर नही आते. इनकी सीढि़यों की बनावट ऐसी होती है कि दिव्यांग इन पर चढ़ने से भी बचते हैं.

डिसेबल फ्रेंडली होने चाहिए मॉल

एक्सपर्ट कहते हैं कि मॉल्स या काम्प्लेक्स को डिसेबल फ्रेंडली होना चाहिए. नियमानुसार यहां पर रैंप के साथ वाकर, ह्वीलचेयर और बैसाखी का अरेंजमेंट होना चाहिए. केवल एंट्री प्वाइंट पर ही नहीं प्रत्येक मंजिल पर जाने के लिए रैंप होना चाहिए. लिफ्ट लगी है तो उस तक दिव्यांग की पहुंच आसान हो. लेकिन शहर के मॉल में ऐसी कोई व्यवस्था नही है. कुछ मॉल हैं जहां एंट्री प्वाइंट पर रैंप बने हैं लेकिन अंदर की ओर नदारद हैं.

बॉक्स..

डीएम से कर सकते हैं लिखित शिकायत

बहुत कम लोगों को ही मालूम है कि डीएम को पदेन अपर आयुक्त दिव्यांग बनाया गया है. उनके पाए अगर दिव्यांग लिखित शिकायत करें तो सरकारी और प्राइवेट बिल्डिंग्स में मानकों की जांच हो सकती है. फिर चाहे वह कार्यालय हो या माल या शापिंग काम्प्लेक्स. पूर्व में ऐसी शिकायतों पर अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की गई है.

हमने पूर्व में ही इसको लेकर आवाज उठाई थी. माल्स में दिव्यांगों के लिए जबरदस्त संवेदनहीनता है. अगर आप अंदर पहुंच गए तो फिर आगे जाने का कोई हेल्पिंग हैंड नही मिलेगा.

श्रीनारायण यादव,

स्वराज विकलांग सेवा समिति

आपने कभी भी दिव्यांगों को मॉल्स में जाते नही देखा होगा. कारण साफ है कि वहां पर मानकों को कभी पूरा नही किया जाता. जब सरकारी विभागों में हमारे लिए सुविधा नही है तो प्राइवेट वालों को कैसे बताय जा सकता है.

लवलेश सिंह, दिव्यांग

शिकायत के आधार पर मानकों को पूरा नही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. लोग चाहे तो डीएम के पास अपनी बात रख सकती हैं.

विपिन उपाध्याय,

दिव्यांजन सशक्तिकरण विभाग