नई दिल्ली (पीटीआई) दिल्ली की अदालत ने गुरुवार को निर्भया मामले में मौत की सजा पाने वाले चार दोषियों में से एक पवन गुप्ता का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक वकील को नियुक्त किया है। वहीं, अदालत ने डेथ वारंट जारी करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई 17 फरवरी तक टाल दी है। कोर्ट का मानना है कि दोषी हर तरह का कानूनी सहायता लेने के हकदार हैं और वह उनके मौलिक अधिकारों को अनदेखा नहीं कर सकता है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने कहा, 'अनुच्छेद 21 आखिरी सांस तक दोषियों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करता है। दोषी कानूनी सहायता लेने के हकदार हैं और अदालत उनके मौलिक अधिकारों को देने से इनकार नहीं कर सकती है।'

पहले वकील ने इस मामले को देखने से कर दिया था इनकार

इसके अलावा, अदालत ने पवन के नए वकील को मामले का स्टडी करने के लिए भी कहा है। बता दें कि पवन के पहले वकील एपी सिंह ने इस मामले में उसका प्रतिनिधित्व करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद अदालत ने बुधवार को उसको अपना नया वकील चुनने की स्वतंत्रता दे दी। अदालत ने दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के अनुभवहीन अधिवक्ताओं की सूची से पवन को अपने वकील का चयन करने का निर्देश दिया लेकिन उसके पिता ने सरकारी वकील रखने से साफ इनकार कर दिया। बता दें कि यह मामला दिसंबर 2012 में दिल्ली में 23 वर्षीय एक लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या से संबंधित है। चार दोषियों में से पवन एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जिसने अभी तक या तो क्यूरेटिव या दया याचिकाओं के उपाय का लाभ नहीं उठाया है, जो उसके लिए उपलब्ध अंतिम न्यायिक और संवैधानिक सहारा होगा।

Posted By: Mukul Kumar

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