- गोरखपुर में रोडवेज ड्राइवरों की ड्यूटी से पहले नहीं होती जांच

- केवल चेकिंग टीम के पास हैं दो ब्रेथ एनलाइजर मशीन

GORAKHPUR: रोडवेज की बसों में सफर करने वाले अपनी सेफ्टी खुद करें तो बेहतर होगा. क्योंकि गोरखपुर परिवहन निगम के जिम्मेदारों को आपकी चिंता जरा भी नहीं है. इसका अंदाजा आप ड्राइवरों की ड्यूटी लगाते समय हो रही लापरवाही से लगा सकते हैं. गोरखपुर में दो बस अड्डे हैं. एक गोरखपुर डिपो और दूसरा राप्तीनगर डिपो है. यहां से हर दिन 100 से भी ज्यादा बसें दूसरे शहरों के लिए जाती हैं. इस दौरान हर बस में 50 से 60 पैसेंजर्स भी मौजूद रहते हैं. इतने पैसेंजर्स को ले जाने वाली रोडवेज बस के ड्राइवर को बिना कोई जांच के चाभी पकड़ा दी जाती है. जबकि ये गलत है. बस पर ड्राइवर की ड्यूटी लगाते समय ब्रेथ एनलाइजर मशीन से भी उसकी जांच करनी होती है ताकि ये पता चल सके कि ड्राइवर ने शराब तो नहीं पी रखी है. लेकिन इन दोनों डिपो में जांच मशीन ही नहीं है. जिसकी वजह से हर दिन इस तरह की लापरवाही हो रही है.

स्वास्थ्य परीक्षण का भी पता नहीं

सफर में ड्राइवर को कोई दिक्कत ना आए या फिर अनफिट ड्राइवर लगातार गाड़ी ना चलाए इसके लिए हेल्थ जांच भी कराई जाती है. यही नहीं समय-समय पर आई चेकअप से लगाए अन्य परेशानियों का पता करने के लिए रोडवेज में शिविर भी लगाना अनिवार्य है. जिसमें सभी इंप्लॉइज के साथ ही ड्राइवरों की भी बकायदा जांच होती है. लेकिन ये काम भी गोरखपुर रोडवेज में अब केवल फॉर्मेल्टी बनकर रह गया है.

ड्राइवर के भरोसे ही बस

किसी मंत्री का दौरा जब तक ना हो तब तक कभी परिवहन विभाग के जिम्मेदार खुद बसों की जांच नहीं करते हैं. रोडवेज की बसें ड्राइवर के भरोसे चलती है. जिससे जिम्मेदारों की ये लापरवाही अक्सर पैसेंजर्स पर भारी पड़ जाती है. अधिकारियों से पूछने पर पता चलता है कि सारी बसें नई और अच्छी कंडीशन में है. वहीं जब कोई मंत्री या फिर विभागीय अधिकारी रोडवेज बसों की जांच करता है तो तमाम परेशानियां खुलकर बाहर आ जाती हैं.

दो मशीन के भरोसे परिवहन निगम

बस स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारी ने बताया कि ड्रंक एंड ड्राइव रोकने के लिए परिवहन निगम के पास दो बे्रथ एनलाइजर मशीन हैं. जो चेकिंग वाली गाडि़यों में रहते हैं. इस कारण ड्राइवरों की प्रॉपर चेकिंग बस स्टेशन पर नहीं हो पाती है.

नहीं होती रास्ते में प्रॉपर चेकिंग

परिवहन निगम का चेकिंग टीम भी काफी सुस्त है. ये कभी कभार ही सड़क पर निकलती है. जिस दिन सड़क पर टीम निकलती भी है तो केवल टिकट की जांच पड़ताल कर फॉर्मेल्टी पूरी करती है. ये टीम भी कभी ब्रेथ एनलाइजर का प्रयोग नहीं करती.

शराब पीकर आया तो गाड़ी से उतारा

गोरखपुर डिपो के एआरएम ने बताया कि अभी कुछ दिन पहले दिल्ली की बस में दो ड्राइवरों की ड्यूटी लगी थी. जिसमें से एक ड्राइवर काफी बहकी-बहकी बातें कर रहा था. नजदीक गया तो पता चला कि ड्राइवर ने शराब पी रखी थी. मैने तुरंत उसे गाड़ी से उतार दिया.

वर्जन

ड्राइवर की जांच करने के लिए कोई मशीन तो नहीं है. हां हाव-भाव से नशे का पता चलने पर उसे गाड़ी से उतार दिया जाता है. सफर के दौरान कोई नशा करते मिला तो उसपर कार्रवाई की जाएगी.

केके तिवारी, एआरएम, गोरखपुर डिपो