क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ:राजधानी की स्कूल बसों के ड्राइवर अब डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के रडार पर हैं. कई बार नोटिस और निर्देश जारी करने के बावजूद अब तक किसी स्कूल ने अपने बस ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया है. इसको देखते हुए जिला प्रशासन की टीम जल्द ही स्कूल बसों की जांच करने वाली है. कई महीनों से ट्रांसपोर्ट डिपार्टनमेंट ने स्कूल बसों की जांच नहीं की है. इन बस ड्राइवर्स का पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं कराया जाता. कई बार इन बस ड्राइवर्स के संबंध में शिकायतों का खुलासा हुआ है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल लीपापोती होती रही है.

नशे में धराए बस ड्राइवर

स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जान पिछले कई सालों से लगातार दांव पर लग रही है. इस मामले में स्कूल मैनेजमेंट से लेकर तमाम अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं. जिस बस में बच्चे बैठकर स्कूल तक जाते हैं और स्कूल से वापस घर लौटते हैं उस बस को चलाने वाले ड्राइवर के बैकग्राउंड की कोई जानकारी न तो स्कूल मैनेजमेंट के पास होती है न ही पैरेंट्स के पास. इतना ही नहीं, बसों के चालकों और कंडक्टर्स को कई बार जांच में नशे में पाया गया है. उन्हें जेल तक भेजा जाता है लेकिन वे लोग छूटकर फिर वापस आ जाते हैं और दूसरे स्कूल में नौकरी पकड़ लेते हैं.

एसडीओ ने की थी जांच

पूर्व एसडीओ अंजलि यादव ने मामले की गंभीरता से जांच की थी. इसमें यह बात साफ हो गई है कि राजधानी के विभिन्न स्कूलों की बसों को चलाने वाले ड्राइवर्स का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया जाता है. अब तक एक भी स्कूल ने पुलिस वेरिफिकेशन की रिपोर्ट जमा नहीं की है. उल्लेखनीय है कि आयुक्त के निर्देश पर गठित जिला प्रशासन की टीमों ने विभिन्न बिंदुओं पर स्कूलों की जांच की, जिसमें एक महत्वपूर्ण प्वाइंट बस ड्राइवर्स का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होना पाया गया.

बार-बार भेजा गया नोटिस

इस संबंध में जिला प्रशासन के अधिकारियों ने कई बार स्कूल प्रबंधन को नोटिस भेजा, लेकिन जवाब नहीं मिला. स्कूलों की जांच करने वाले अधिकारियों को किसी भी तरह का सपोर्ट नहीं मिला. कई जानकारियों को कई बार मांगे जाने के बावजूद उपलब्ध नहीं कराया गया.

ड्राइवर्स पर यौन शोषण के भी आरोप

कई बार बस ड्राइवर्स पर नेचुलर -अननेचुरल तरीके से बच्चों को छूने और उनका यौन शोषण किए जाने का भी आरोप लगा है. इसके बावजूद स्कूल मैनेजमेंट द्वारा बस ड्राइवर्स का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया जाना काफी गंभीर सवाल खड़ा करता है.

नियमों को तोड़ना हुआ आसान

उल्लेखनीय है कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन की टीम ने जब भी स्कूल बसों की जांच की है, हर बार गड़बड़ी पाई गई है. कभी ड्राइवर नशे में पाया गया, तो कभी संख्या से ज्यादा बच्चों को ठूंस-ठूंसकर ढोते हुए पकड़ा गया. कभी कंडक्टर नशे में मिला जैसी कई शिकायतें सामने आई, जो बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाली हैं.

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केस स्टडी-1

500 मीटर तक बस के साथ घिसटती रही बाइक

धुर्वा में स्कूल बस ने आदर्शनगर निवासी बाइक सवार उमेश प्रसाद को धक्का मार दिया. बाइक स्कूल बस के नीचे फंसकर रह गई और करीब 500 मीटर तक बस के साथ घिसटती चली गई. उमेश की जान तो बाल-बाल बची लेकिन उनकी गाड़ी चकनाचूर हो गई.

केस स्टडी-2

बस ड्राइवर ने ट्रक में मारी टक्कर, दर्जनों बच्चे घायल

चान्हो में मघवार एकेडमी की बस ट्रक से टकरा गई, जिसमें 30 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए. कुछ बच्चों को गंभीर चोटें भी आई. इस दुर्घटना के पीछे चालक का नशे में धुत होना बताया गया.

केस स्टडी-3

जब स्कूल बस ने तोड़ डाली एक घर की दीवार

सदर थाना क्षेत्र के कोकर से रिम्स जानेवाले मोड़ के पास डॉन बोस्को स्कूल की बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई. बस की चपेट में आने से एक गोलगप्पा ठेला पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया. वहीं दूसरी ओर एक घर की दीवार टूट गई. घटना के तत्काल बाद जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई. लोगों ने मुआवजा की मांग को लेकर बस को घेर लिया. घटना के दौरान स्कूल के बच्चे भी बस में सवार थे. इस कारण वे काफी देर तक बस में फंसे रहे.

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वर्जन

स्कूल प्रबंधन से कई जानकारियां मांगी गई, लेकिन उन्होंने पारदर्शिता के साथ जानकारियों को साझा नहीं किया. ड्राइवर के पुलिस वेरिफिकेशन के मामले में भी अब तक स्कूलों की रिपोर्ट नहीं आई है. जबकि उनसे बार-बार सख्ती के साथ रिपोर्ट मांगी गई है.

संजीव कुमार, डीटीओ, रांची

स्कूल बस चालकों का पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराना काफी बड़ी लापरवाही है. इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं. चालकों की क्या हिस्ट्री है और उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रमाणपत्र असली हैं या नकली, इसकी जांच जरूरी है.

अनीश गुप्ता, एसएसपी, रांची