क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : राजधानी के बाशिंदों को बिजली की मार से फिलहाल निजात नहीं मिलने वाली है. जून तक कमोबेश हर दिन पावर कट का सिलसिला जारी रहेगा. इलाका वाइज बिजली की लोड शेडिंग चलती रहेगी. इसकी बड़ी वजह बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने को लेकर चल रहा एपीडीआरएपी का काम है. इसके तहत पोलों की शिफ्टिंग के साथ केबुल भी बदला जा रहा है. इस वजह से चार से छह-आठ घंटे तक बिजली की कटौती जारी रहेगी.

सामान्य रही सप्लाई

पिछले कुछ दिनों से चल रही पावर क्राइसिस के बीच सोमवार को स्थिति थोड़ी सामान्य रही. अन्य दिनों की तुलना में पावर कट ने लोगों को थोड़ा कम रुलाया. बिजली विभाग के मुताबिक, मंडे को राजधानी समेत पूरे राज्य को फुल लोड बिजली मिली. काफी दिनों से ठप चल रहे आधुनिक पावर प्लांट से 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ. इसके अलावा अन्य श्रोतों से राज्य को कुल 900 मेगावाट बिजली मिली, जबकि जरूरत मात्र 928 मेगावाट की ही थी.

सालों भर मेंटनेंस का खेल

ऐसा नहीं है कि पावर सिस्टम दुरुस्त करने के लिए इन दिनों मेंटनेंस का काम चल रहा है. दरअसल यह सिलसिला सालों भर चलता रहता है. कभी ट्रांसमिशन लाइन को दुरुस्त करने तो कभी केबुल बिछाने, पोल शिफ्ट करने, तारों को बदलने या ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के नाम पर हर दिन घंटों बिजली काटी जाती है. खास बात है कि दिन हो या रात, कब बिजली काट दी जाएगी, लोगों को यह पता भी नहीं चल पाता है. पावर कट से सबस ज्यादा परेशानी गर्मी के मौसम में लोगों को हो रही है.

ट्रांसमिशन लाइन भी रोक रही बिजली

राजधानी में बिजली व्यवस्था दुरुस्त करने की कोई ठोस योजना नहीं है, जिस वजह से हर दिन लोड शेडिंग का सामना लोगों को करना पड़ रहा है. अगर दूसरे राज्यों व श्रोतों से सरकार बिजली खरीदती भी है तो उसके प्रॉपर सप्लाई के लिए यहां ट्रांसमिशन लाइन नहीं हैं. ऐसे में बिजली की आपूर्ति पर इसका सीधा असर पड़ता है.

पावर प्रोडक्शन में गिरावट

झारखंड में जरूरत के हिसाब से पावर प्रोडक्शन नहीं हो रहा है. यहां के कई पावर प्लांट से कैपासिटी के कम पावर प्रोडक्शन हो रहा है. टीवीएनएल की एक यूनिट से इन दिनों पावर प्रोडक्शन हो रहा है, जबकि बाकी यूनिट ठप है, जिस वजह से राजधानी समेत कई शहरों में बिजली की आपूर्ति चरमरा गई है.

22 माह में 11 किमी अंडर ग्राउंड केबलिंग

राज्य में अंडर ग्राउंड केबलिंग का काम कछुए की चाल से चल रहा है. पिछले 22 महीने में महज 11 किमी ही अंडर केबलिंग का काम पूरा हो चुका है, जबकि 41.5 किमी अंडर ग्राउंड केबलिंग होना है. गौरतलब है कि 2016 के अप्रैल में मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इस योजना का शुभारंभ राजभवन सब स्टेशन में किया था. इसका ठेका पॉलीकैब एजेंसी को मिला है, लेकिन वह काम में काफी ढिलाई बरत रही है.