सियोल (एपी)। उत्तर कोरिया ने मंगलवार को एक बार फिर समुद्र से दो छोटी रेंज की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं हैं। दक्षिण कोरिया की सेना ने इस बात की जानकारी दी है। उसने बताया है कि उत्तर कोरिया ने पूर्वी सागर के प्योंगान प्रांत से प्रोजेक्टाइल का परीक्षण किया है। दिलचस्प बात यह है कि उत्तर कोरिया ने इस मिसाइल का परिक्षण करने से कुछ ही घंटों पहले अमेरिका से परमाणु मसले पर बातचीत की इच्छा जताई थी। दक्षिण कोरया के ज्वाइंट चीफ ऑफ स्टाफ ने इस परीक्षण के बाद अपने बयान में कहा कि उनकी सेना, उत्तर कोरिया की हर एक गतिविधियों पर नजर रख रही है।

अमेरिका से बातचीत के लिए तैयार उत्तर कोरिया

दूसरी ओर, उत्तर कोरियाई विदेश मंत्री सोन हुई ने सोमवार शाम को कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ परमाणु को लेकर नई वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, इसके साथ उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि अमेरिका को नए प्रस्ताव के साथ वार्ता का पहल करना होगा। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका का प्रस्ताव उत्तर कोरिया को संतुष्ट नहीं करता है, तो दोनों देशों के बीच कोई भी समझौता नहीं होगा। हुई ने कहा कि हम सभी मुददों पर व्यापाक चर्चा के लिए अमेरिका के साथ बैठक की इच्छा रखते हैं। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के बयान को 'दिलचस्प' बताया। उन्होंने कहा, 'हम देखेंगे, क्या होता है। उत्तर कोरिया की तरफ से हमें सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।'

उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दागीं दो मिसाइलें, एक महीने के भीतर किम ने किया सातवां परिक्षण

एक महीने के भीतर यह आठवां मिसाइल परीक्षण

बता दें कि अमेरिका के साथ असफल वार्ता के बाद उत्तर कोरिया का यह आठवां मिसाइल परीक्षण है। इन मिसाइल परीक्षणों को रोकने के लिए पिछले एक महीनें में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच कई बार बातचीत हो चुकी हैं लेकिन दोनों देशों के बीच कोई भी बात नहीं बन पाई। पिछले साल जून में ट्रंप और किम ने सिंगापुर में अपना पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया था, जहां दोनों ने कोरियाई प्रायद्वीप पर परमाणु नष्ट करने पर सहमति जताई थी। इसके बाद दूसरा शिखर सम्मेलन फरवरी में हनोई में आयोजित किया गया लेकिन बैठक विफल रही क्योंकि दोनों नेता अपनी परेशानियों का हल ढूंढ़ने में असमर्थ रहे। दरअसल, अमेरिका चाहता था कि उत्तर कोरिया तत्काल प्रभाव पर अपने परमाणु हथियारों नष्ट करे लेकिन किम जोंग ने इसके बदले में ट्रंप के सामने प्योंयांग में लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को तुरंत हटाने की शर्त रख दी थी। यही कारण रहा कि दोनों नेताओं के बीच किसी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।

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