- पुलिस बताती रही हादसा, रि-क्रिएशन में बयां कर रहा हत्या की कहानी

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LUCKNOW :

गोमतीनगर के विश्वासखंड 3 में रहने वाले मिडलैंड अस्पताल के मैनेजर की घर में 16 जुलाई की देर रात हुई मौत के मामले में रविवार को फॉरेंसिक टीम की ओर से किए गए रि-क्रिएशन पर भाई इंद्रजीत को भरोसा नहीं है. उनका कहना है कि जांच खानापूर्ति के लिए की गई है. भाई का आरोप है कि विश्वजीत पर किसी ने हमला किया था. वहीं फॉरेंसिक टीम का कहना है कि रि-क्रिएशन में कोई ठोस सबूत नहीं मिलते हैं तो कुछ संदिग्धों का नारको टेस्ट भी कराया जा सकता है.

रि-क्रिएशन कर रहा हत्या का इशारा

फॉरेंसिक टीम ने रविवार शाम विश्वजीत के मकान में रि-क्रिएशन किया. फ‌र्स्ड फ्लोर की बालकनी से पुतले को नीचे फेंका गया. दो बार नीचे फेंके गए पुतला जिन जगहों पर गिरा उससे भी साफ हो गया कि विश्वजीत अगर वहां गिरता तो चोट उसकी गर्दन या पैर में लगती ना कि उसके पेट और पीठ में. इसके अलावा फॉरेंसिक टीम ने पेड़ की डाल को पूरी तरह साफ कर दिया जबकि घटना के समय भालों के ऊपर पेड़ की डाल मौजूद थी.

किसी और का खून तो नहीं

भाई इंद्रजीत का कहना है कि फ‌र्स्ट फ्लोर और सीढि़यों पर खून के निशान तो विश्वजीत के हैं लेकिन बाउंड्रीवॉल (छोटे गेट) के पास जो खून के निशान हैं वह विश्वजीत के नहीं है. अगर विश्वजीत भालों पर गिरता तो खून के निशान भालों और दीवार पर मिलते लेकिन ऐसा नहीं था. फर्श पर कुछ खून के निशान मिले हैं जिससे इस बात भी संभावना से इंकार नहीं किया जाता सकता कि यह खून किसी और या फिर हमलावर का भी हो सकता है.फॉरेसिंक टीम ने बेडरूम और बाहर फर्श में मिले खून के धब्बों को जांच के लिए सुरक्षित किया है.

संघर्ष का दावा कर रहा भाई

इंद्रजीत का कहना है कि पुलिस की विश्वजीत के चंद्रग्रहण देखने कहानी भी फर्जी है. इसके अलावा घटना वाले दिन लिविंग रूम में टीवी का रिमोट और उसका चश्मा भी फर्श पड़ा था. जैसे किसी के साथ उसका संघर्ष हुआ हो.

रि-क्रिएशन और सच्चाई में काफी अंतर

ंतर नंबर 1

इंद्रजीत के अनुसार विश्वजीत का वजन 70 से 75 किलो के बीच था. वहीं फॉरेंसिक टीम ने रि-क्रिएशन के लिए जिस डमी का प्रयोग किया. उसका वजन 15 से 20 किलो के बीच में था.

ंतर नंबर 2

भाई के अनुसार इस स्थिति में विश्वजीत के गिरने की स्पीड और दिशा अलग होगी. कम वजन वाली डमी के गिरने की स्पीड और दिशा अलग होगी.

ंतर नंबर 3

फॉरेंसिक टीम ने डमी को बालकनी की रेलिंग के पास से फेंका. टीम यह जानना चाहती थी कि विश्वजीत बालकनी से रेलिंग के बाहर खड़ा होकर कूदेगा तो कैसे गिरेगा. इंद्रजीत का कहना है कि कूदने की बात गले ही नहीं उतर रही है.

अंतर नंबर 4

विश्वजीत दरवाजे खोलकर कहीं भी जा सकते थे. भाई का यह कहना है कि बालकनी से गिरने की थ्योरी हजम नहीं हो रही है. विश्वजीत बालकनी से गिरते तो उन्हें सिर या पीठ के बल गिरना चाहिए था. गिरने की स्थिति में बाईं तरफ सीने और उसके नीचे मौजूद गहरा घाव कहीं ओर होना चाहिए था.

अंतर नंबर 5

भाई ने सवाल खड़ा किया कि इतनी ऊंचाई से रेलिंग के भालों पर गिरने के बाद कोई खुद से उसमें से कैसे निकल सकता है. भाई का कहना है कि रेलिंग के भालों से घाव होने पर दीवार पर काफी खून होना चाहिए था जोकि नहीं था.

अंतर नंबर 6

रि-क्रिएशन के दौरान बालकनी से डमी फेंके जाने पर भी भाई ने कई सवाल किए हैं. भाई के मुताबिक बालकनी से फेंके जाने पर रेलिंग के भालों पर गिरने की स्थिति में विश्वजीत को कई अन्य गहरे घाव होने चाहिए थे. भाई के मुताबिक रेलिंग पर मौजूद भालों की दूरी भी 10 सेमी से कम हैं.