वाराणसी (ब्यूरो)। रेलवे ग्रुप सी व डी के पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले शातिर को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की टीम ने रविवार को शिवपुर में सेंट्रल जेल रोड से गिरफ्तार कर लिया। गाजीपुर के दिलदारनगर निवासी आरोपित रंजीत मौर्य बीते नौ साल से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ शिवपुर थाने में वर्ष 2011 में ठगी के शिकार युवकों ने मुकदमा दर्ज कराया था। गैंग से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

चेन्नई में बनाया था गैंग

आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन के एसपी सतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि रंजीत सिंह मौर्य ने वर्ष 2008 में बीटेक कंप्यूटर सांइस में अन्ना मलाई विश्वविद्यालय चेन्नई में प्रवेश लिया था। पढ़ाई के दौरान यूपी के वाराणसी, प्रयागराज, सहारनपुर, गाजीपुर, बरेली और बिहार के लड़कों से मित्रता हुई। वहां रंजीत ने यूपी-बिहार के लड़कों की गैंग बनाई और बेरोजगार युवकों को रेलवे में नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देकर लाखों ऐंठे।

शिकायत पर हुआ फरार

रंजीत व उसके साथियों ने बेरोजगार युवकों से रकम वसूलने के बाद उन्हें फर्जी ज्वाइनिंग लेटर थमा दिया। युवक उसे लेकर जब नौकरी के लिए रेलवे पहुंचे तब ठगी का अहसास हुआ। पकड़े जाने के डर से रंजीत व उसके साथियों ने अपने घर छोड़ दिए और पता बदल-बदलकर रहने लगे। वर्ष 2011 में शिवपुर थाने में भी रंजीत की गैंग के शिकार तीस युवकों ने मुकदमा कायम कराया था।

गोमती नगर था ठिकाना

रंजीत ने बताया कि वह बीते आठ सालों से गोमती नगर लखनऊ में रह रहा था। इस दौरान उसने अपने परिजनों से भी फोन पर संपर्क करना बंद कर दिया था। रविवार को वह अपने एक रिश्तेदार से मिलने वाराणसी पहुंचा था लेकिन ईओडब्ल्यू की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी टीम में इंस्पेक्टर सुनील वर्मा, संजय सिंह, सुनील कुमार, दिलीप कुमार पांडेय, सुभाष सिंह यादव समेत अन्य थे।

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Posted By: Inextlive Desk

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