उनको नहीं हिप्नोटाइज किया जा सकता है। सच तो यह है कि वह कोरिस्पॉन्डेंट को हिप्नोटाइज कराने के लिए पहले दस लाख लोगों को हिप्नोटाइज करना जरूरी है। वह उनके हिप्नोटाइज करने का ही हिस्सा है। आप मुझसे प्रभावित होंगे, जब दस लाख आदमी मुझसे प्रभावित दिखेंगे ...तब कोरिस्पॉन्डेंट प्रभावित होता है। कोरिस्पॉन्डेंट तो प्रभावित होता है दस लाख के हिप्नोसिस को देखकर।

मास को हिप्नोटाइज करना है आसान

तब वह सोचता है कि यह आदमी अर्थ का है, इसकी बात अर्थ की है। अगर मेरे पास एक आदमी भी नहीं हो, तो आप मुझसे पूछने नहीं आएंगे कि मैं क्या कर रहा हूं। मेरा मतलब इंडीवीजुअल नहीं है, मास हिप्नोटिज्म की संभावना पूरी है और इंडीवीजुअली हिप्नोटाइज करने में तो देर लगती है, मास हिप्नोटिज्म बहुत आसान है। एक-एक आदमी को हिप्नोटाइज करने में एक-एक आदमी रेजिस्ट करता है। मास हिप्नोटिज्म में तो रेजिस्टेंस नहीं है किसी का और आपके आसपास के लोग हिप्नोटाइज हो गए, तो आपको पता नहीं चलता कि आप कब हिप्नोटाइज हो गए हैं। तो एक इंडीवीजुअल को हिप्नोटाइज करना कठिन है हमेशा, क्राउड को हिप्नोटाइज करना हमेशा आसान है क्योंकि क्राउड के पास

रेजिस्टेंस नहीं रह जाता। इसलिए जितने लीडर हैं, वे सब क्राउड लीडर हैं।

विचार रख कर आपको ओपन छोड़ दूं, तो हिप्नोटाइज नहीं है

पर्सनल रिलेशनशिप में हिप्नोटाइज करना कठिन बात है, क्योंकि आप पूरे ही इंप्रेस्ड हैं। तो चाहे कोई जानता हो, चाहे कोई न जानता हो, आदमी को हिप्नोटाइज किया जा रहा है। और अगर हम मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से सफल बनाना चाहते हैं तो उसे सचेत करना जरूरी है कि वह हिप्नोटाइज न हो। उसको इतना सचेत करना जरूरी है। उसको इतना सचेत करना जरूरी है कि वह सम्मोहित होकर प्रभावित न हो। प्रभावित हो वह बिल्कुल दूसरी बात है, वह रेशनल बात है। आपको मैं समझाऊं, तर्क करूं, विचार करूं और ओपन छोड़ दूं कि आपकी मर्जी, तो मैं आपको हिप्नोटाइज नहीं कर रहा हूं, लेकिन हिप्नोसिस एक तरह की ट्रिक है।

इस तरह लीडर करते हैं हिप्नोटाइज

न मैं आपको समझाता हूं, न आरग्यु करता हूं, लेकिन आपको बेहोशी के रास्ते से आपको पकड़ने की कोशिश करता हूं। अब यह एक बल्ब लगा हुआ रास्ते पर पूरे वक्त जल रहा है और बुझ रहा है और आप को एडवरटाइज किया जा रहा है। पहले उनको पता था कि आप देखते थे कि एडवरटाइजमेंट स्थिर था, वह जलता-बुझता नहीं था। अभी वह हिप्नोटिस्ट ने बताया कि बुझाने से हिप्नोसिस आता है और रिपीट होता है। वैसे रिपीट नहीं होता है। लिखा है हमाम, तो आपने पढ़ लिया कई दफा, खत्म हो गई बात, लेकिन वह फिर जला, फिर बुझा। जितनी बार वह जला बुझा, उतनी बार आपको पढ़ना पड़ा, हमाम, तो मजबूरी हो गई। वह तो हिप्नोटिस्ट बता रहे हैं कि इसे जलाओ बुझाओ जल्दी जल्दी, ताकि वह आदमी निकलते-निकलते बीस दफे पढे़ कि हमाम, हमाम। बीस दफे पढ़ने से रिपीट होगा तो उसके भीतर घुस जाएगा।

-ओशो

मूर्तिभंजन के नाम पर बुतपरस्ती कर रहे लोग: ओशो

Posted By: Vandana Sharma

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