असल जिदंगी से प्रेरित है अक्षय का रोल

अक्षय कुमार पिछले कुछ समय से सोशल इश्यू से जुड़ी फिल्में कर रहे हैं। टॉयलेट एक प्रेम कथा के बाद अक्षय 'पैड मैन' लेकर आ रहे हैं। जैसा कि नाम से ज्ञात है, यह फिल्म सेनेटरी पैड से जुड़ी है। अक्षय का किरदार कोई फिल्मी नहीं बल्िक असल जिंदगी से प्रेरित है। फिल्म में वह उस शख्स की भूमिका निभाएंगे जिसने असली में गांव की महिलाओं को सेनेटरी यूज करना सिखाया।

अक्षय कुमार तो फिल्‍मी,असली पैडमैन तो ये हैं जिन्‍होंने आदमी होकर इस्‍तेमाल किया था सेनेटरी पैड

कौन है असली 'पैड मैन'

हीरो सिर्फ पर्दे पर नहीं उसके पीछे भी होते हैं, ऐसे ही एक शख्स हैं मुरुगनंथम। कोयंबटूर के स्कूल से निकाले गए मुरुगनंथम जिंदगी में कुछ बड़ा कर देंगे किसी ने सोचा नहीं था। आज अक्षय कुमार अगर उनका रोल निभा रहे हैं, तो इसका मतलब साफ है मुरुगनंथम ने कुछ क्रांतिकारी काम किया होगा। मुरुगनंथम का मिशन था कि, देश की सभी गरीब महिलाओं तक सेनेटरी नैपकिन पहुंचाना। यह आइडिया उन्हें तब आया, जब उनकी पत्नी खुद 'महावारी' के दौरान काफी दिक्कत महसूस करती थीं। मुरुगनंथम ने सोचा क्यों न एक ऐसा प्रोड्क्ट बनाया जाए, जो गरीब महिलाओं तक आसानी तक पहुंच सके और उन्होंने कॉटन के सेनेटरी पैड बनाने की मुहिम शुरु कर दी।

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ऐसे की थी शुरुआत

मुरुगनंथम के पिता जोकि एक हैंडलूम कारीगर थे, उन्हें पता था कि कॉटन के पैड किस तरह बनाए जाते हैं और इसमें किस तरह की मशीनें लगती हैं। पिता से सारी जानकारी इकठ्ठा कर मुरुगनंथम ने अपने मिशन का आगाज कर दिया था। सबसे पहले उन्होंने अपने आसपास के गांव की महिलाओं से एक सर्वे किया। उन्हें पता चला कि 10 में से सिर्फ 1 महिला पैड यूज कर रहीं जबकि अन्य महिलाएं वही पुराने तौर-तरीकों में उलझी थीं। मुरुगनंथम ने कॉटन वाले पैड बनाने की मशीनें मंगवाईं और काम शुरु हो गया। सबसे पहला पैड उन्होंने अपनी पत्नी को दिया।

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क्वॉलिटी जांचने के लिए खुद पहन लिया था पैड

मुरुगनंथम ने जो पैड बनाया था, वो सही है कि नहीं इसका फीडबैक जानना चाहते थे। उन्होंने आस-पड़ोस और घर की महिलाओं को वो पैड यूज करने के लिए दिए, लेकिन पत्नी के अलावा अन्य किसी महिला ने पैड इस्तेमाल नहीं किया। मुरुगनंथम ने सोचा क्यों न, वह खुद इसका इस्तेमाल कर इसकी क्वॉलिटी चेक कर लें। मुरुगनंथम ने एक अपने इनर वियर के अंदर काल्पनिक 'यूटरस' का निर्माण किया। इसके लिए उन्होंने गुब्बारे में बकरी का खून भरकर उसमें एक छेद कर दिया और उसके ऊपर सेनेटरी पैड लगा लिया। मुरुगनंथम यह देखना चाहते थे कि, उनके द्वारा बनाया पैड खून सोख रहा है कि नहीं।

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आज हैं 2000 से ज्यादा ब्रांच

करीब 4 साल तक रिसर्च के बाद मुरुगनंथम ने सेनेटरी पैड बनाने वाली सस्ती मशीनों को ढूंढ निकाला। आज उनकी जयश्री इंडस्ट्रीज नाम की कंपनी है। जिसमें 21,000 महिला कर्मचारी काम करती हैं। देश में करीब 2000 से ज्यादा कंपनी की यूनिटें हैं। मुरुगनंथम के इस नेक काम के लिए उन्हें साल 2016 में पद्म श्री अवार्ड से भी सम्मानित किया गया था।

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Posted By: Abhishek Kumar Tiwari

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