जिस तरह समय-समय पर हर चीज में अपग्रेडेशन होता है, चोर भी अपनी टेक्नीक्स में अपग्रेड करते रहते हैं. चोर भी भिन्न-भिन्न टाइप के होते हैं. गांव-मोहल्ले वाले छोटे-मोटे चोर से लेकर हाईटेक चोर तक. इन्हीं चोर की एक प्रजाति है, जो वीआईपी ट्रेनों में चोरी करती है. इनकी एक्टिविटी पर कोई शक भी नहीं करता है. इस टाइप के चोर राजधारी, गरीब रथ व दूरंतो जैसी वीआईपी ट्रेनों में सफर करते हैं. एसी-1, एसी-2 और एसी-3 में सफर के दौरान ही ये बेडशीट, टॉवेल और ब्लैंकेट समेट कर उतर जाते हैं. इसे वो अपना हक समझते हैं.

सब रूट का एक ही हाल
वीआईपी चोरों का आतंक सभी रूटों पर है. इंद्रजीत सिंह ईस्ट रेलवे में पिछले 28 साल से कोच अटेंडेंट का काम कर रहे हैं. फिलहाल इंद्रजीत पूर्वा एक्सप्रेस में काम कर रहे हैं. शनिवार की शाम पूर्वा एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर चार पर आकर रुकी. इस दौरान उन्होंने बताया कि हर राउंड में औसतन छह बेडशीट और आठ-दस टॉवेल गायब हो जाते हैं. इस बारे में किसी से पूछिए, तो वे भड़क जाते हैं.

सतर्कता भी काम नहीं आती
झांसी-हावड़ा प्रथम स्वतंत्रता एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म नंबर दो पर आकर रुकी थी. कोच अटेंडेंट आर के पटेरिया अपने बेड रोल की काउंटिंग मिला रहे हैं. पटेरिया कहते हैं कि इतनी सतर्कता के बाद भी टॉवेल और बेडशीट गायब हो जाते हैं. हमलोगों की सैलरी से एक टॉवेल के ऐवज में 56 रुपए, बेडशीट के ऐवज में 75 रुपए और ब्लैंकेट के ऐवज में 750 रुपए कट जाते हैं. उन्होंने बताया कि पैसेंजर्स को लगता है कि वे टिकट के पैसे दिए हैं, तो चोरी करना उनका राइट है.