फ्लैग : जिला अस्पताल में एडमिट मरीज की मौत के बाद हंगामा, डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप

- पीठ और सीने में दर्द होने पर संडे रात एडमिट हुआ था कफील

- पूरी रात डॉक्टरों द्वारा कोई इलाज ने देने का भी परिजनों ने लगाया आरोप

बरेली. डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल में ट्यूजडे को एक मरीज की मौत से हंगामा हो गया. पीठ और सीने में दर्द होने पर कफील संडे रात इमरजेंसी में आया था. जांच के बाद उसे एडमिट तो कर लिया गया, लेकिन पूरी रात दर्द से तड़पते कफील को देखने कोई डॉक्टर नहीं आया. आरोप है कि ट्यूजडे सुबह ड्यूटी पर आए डॉक्टर के इंजेक्शन लगाते ही हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई. इससे गुस्साए तीमारदारों ने डॉक्टरों को घेर लिया और इमरजेंसी में हंगामा कर दिया. तीमारदारों ने एडीएसआईसी के कार्यालय में भी हंगामा किया और तत्काल डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की.

दर्द से तड़पता रहा रातभर

मूल रूप से बिजनौर का रहने वाला कफील अहमद पत्नी नसीन जहां और पांच बच्चों के साथ पांच साल से पुराने शहर के कांकरटोला में रह रहा था. संडे रात वह भांजे शानू के साथ रात करीब आठ बजे जिला अस्पताल आया था. उसकी हालत देखकर उसे एडमिट कर लिया गया. कफील पूरी रात दर्द में तड़पता रहा, लेकिन कोई डॉक्टर उसे देखने नहीं आया. मनडे को जब दर्द बर्दाश्त से बाहर को गया तो भांजे शानू ने कई बार ड्यूटी पर मौजूद नर्स को उसे रेफर करने के लिए कहा. नर्स टालमटोल करती रही. ऐसे में कफील की हालत और बिगड़ गई.

इंजेक्शन के दस मिनट बाद मौत

शानू के मुताबिक, इमरजेंसी वार्ड में ट्यूजडे को डॉ. एमएल शर्मा की ड्यूटी थी. जब वह राउंड लेने वार्ड में आए तो कफील ने हार्ट में दर्द होने की बात कही. इस पर डॉ. शर्मा उस पर भड़क उठे और कम बोलने की सलाह देते हुए उन्हें उनका काम करने देने को कहा. कफील को इंजेक्शन देने के बाद डॉक्टर वार्ड से निकल गए और इसके दस मिनट बाद ही कफील ने दम तोड़ दिया.

डॉक्टर को घेर हंगामा

इस पर शानू ने इमरजेंसी में हंगामा कर दिया. सूचना मिलने पर अन्य रिश्तेदार भी जिला अस्पताल आकर इजेंक्शन लगाने वाले डॉक्टर एमएल शर्मा से भिड़ गए. इस पर डॉ. शर्मा ने स्टाफ से पुलिस बुलाकर कफील की बॉडी और उसके परिजनों को हॉस्पिटल से बाहर निकालने के लिए कह दिया. करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद मामला एडीएसआईसी डॉ. केएस गुप्ता के ऑफिस तक पहुंच गया. परिजनों ने उनसे डॉक्टर के खिलाफ फौरन कार्रवाई करने की मांग की.

सांस रोगी था हार्ट का नहीं

एडीएसआईसी डॉ. गुप्ता ने बताया कि मरीज सांस रोगी था. उसे इमरजेंसी के मेडिकल वार्ड में एडमिट किया था. मरीज का इलाज डॉ. एमएल शर्मा कर रहे थे और उसकी हालत में सुधार भी हुआ. यह बात ट्यूजडे सुबह उसके तीमारदार भी कह रहे थे. सुबह वह अपने तीमारदारों के साथ छत से नीचे आया और उसके बाद फिर छत पर जाने के बाद उसकी मौत हो गई.

सांस रोगी था हार्ट का नहीं

एडीएसआईसी डॉ. केएस गुप्ता ने बताया कि मरीज सांस का रोगी था. उसे इमरजेंसी मेल मेडिकल वार्ड में एडमिट किया था. मरीज का इलाज डॉ. एमएल शर्मा कर रहे थे, उसकी हालत में सुधार भी हुआ. यह बात सुबह को उसके तीमारदार भी कह रहे थे. लेकिन सुबह को वह अपने तीमारदारों के साथ छत से नीचे आया और उसके बाद छत पर गया तो उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई. उसकी ईसीजी रिपोर्ट भी नार्मल थी.

मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई..

कफील की शादी को दस साल हो गए हैं उसके पांच बच्चे हैं. सबसे बड़ा बेटा 8 साल का है. कफील फेरी लगाकर कपड़े बेचने का काम करता है. उसकी पत्‍‌नी जिला अस्पताल के बाहर अपना माथा पीटते हुए बस यही कह रही थी ..मेरी तो दुनिया ही उजड़ गई. अब मेरे बच्चों का क्या होगा?

3 साल से नहीं है हार्ट स्पेशलिस्ट, फिर क्यों नहीं किया रेफर?

जिला अस्पताल में करीब तीन साल से हार्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं. हैरत की बात तो यह है कि जब हार्ट स्पेशलिस्ट नहीं था तो कफील को दो दिन तक क्यों रखा गया? तीमारदारों के बार-बार कहने के बावजूद भी कफील को रेफर नहीं किया गया और उसकी जान चली गई.

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क्या बोले डॉक्टर

मैंने कोई गलत इंजेक्शन नहीं लगाया. मरीज को दर्द हो रहा था, जिसे कम करने के लिए इंजेक्शन लगाया था. हार्ट अटैक इंजेक्शन की वजह से नहीं आया. मृतक के परिजनों के सभी आरोप निराधार हैं. मैंने किसी भी प्रकार की कोई अभद्रता नहीं की.

डॉक्टर एमएल शर्मा, वरिष्ठ चेस्ट फिजीशियन